Saturday, 15 November 2014

कानमें तेल डालना (कर्णपूरण)
















कानमें तेल डालना (कर्णपूरण)--

नस्य कर के २ चम्मच गुनगुना तेल (तिलका तेल अथवा नारियल तेल) ५ मिनट मुख में रखें. इसे गंडूष कहते है. इससे दांत और मसूडे स्वस्थ रहते हैं. जिनके दात अतिसंवेदशील हो गए हैं अथवा जिनके मुख में लार अल्प मात्रामें आती है, वे इसे अवश्य करें. मुख में रखा तेल मुख में रखकर ही कर्णपूरण इत्यादि विधि कर सकते हैं. इससे समय की बचत होती है . ५ मिनटके पश्‍चात यह तेल थूक दें, उसे निगले नहीं. इसके बाद 
आवश्यकतानुसार गुनगुने जल से गरारे करें.
मुखमें तेल रखते हुए करवट पर लेटकर एक कानमें गुनगुने तेल की ३-४ बूंद डालें. २ मिनट इसी स्थितिमें रहें. कान में रुई डालकर, दूसरी ओर करवट लें और दूसरे कानमें भी गुनगुने तेल की बूंदें डालें. कर्णपूरण के लिए नारियल तेल, तिल का तेल अथवा रुई का तेल भी उपयोग में ला सकते हैं.

लाभ -----

- कानमें तेल डालने से कान के स्वास्थ्य में सुधार होता है.

- कर्णशूल, चक्कर आना, खडे रहनेपर रक्तदाब न्यून होना, चलते समय संतुलन जाना आदि व्याधियों में नियमित कर्णपूरण करनेसे लाभ होता है.

- जो लोग नियमित रूपसे कान में इअरफोन लगाकर बैठते हैं, वे नित्य कर्णपूरण करें.

सावधानी --------

- कर्णपूरणके लिए उपयुक्त तेल गरम कर, ठंडा करें और स्वच्छ सूखी बोतलमें भर लें. तेल अथवा बोतल में पानीका अंश रह जाने से तेल में फंगस लग सकती है. ऐसा तेल कान में डालनेपर कान में इन्फेक्शन हो सकता है.

- कान के परदे में छिद्र होने पर अथवा कान में इन्फेक्शन होनेपर कर्णपूरण न करें.

- कानमें तेल डालनेपर यदि वह गलेमें उतर जाता है, तो समझ लें कि कानमें छिद्र है. ऐसेमें कान के वैद्य द्वारा कानकी जांच कर लें.

- कभी-कभी कानमें तेल डालनेपर कानका मैल फूल जाता है और कान में वेदना होने लगती है. कान बंद हो जाते हैं । ऐसा होने पर कान का मैल हलके हाथसे निकालें. मैल कडा हो, तो विशेषज्ञसे जांच करवा लें.

२ से ४ चम्मच काले तिल सवेरे चबाकर खानेसे दातों के स्वास्थ्य में सुधार आता है. पिसे हुए अन्नसे बने खाद्यपदार्थ, चीनी अथवा अन्य मिष्ठान्न अत्यधिक मात्रा और सतत सेवनसे दांतोंमें सडन की संभावना बढती है.

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