शलजम एक कंद (गूदेेदार जड़) है। सामान्यत: शलजम की जड़ ही पकाकर खाई जाती है लेकिन इसकी पत्तियां भी साग की भांति प्रयोग में लाई जा सकती हैं। बाजार में 2 प्रकार के शलजम आते हैं-लाल कंद वाले और सफेद कंद वाले। शलजम के पत्ते के पास का ऊपरी भाग और कंद की ऊपरी परत निकालने के बाद 80 से 85 प्रतिशत सेवन योग्य अंश बचता है।
इसमें प्रचुर मात्रा में पोषक तत्व पाए जाते हैं। चूंकि शलजम पोटाशियम, फास्फोरस, कैल्शियम और विटामिनों का उत्तम स्रोत है, अत: इसका सेवन करने से कई प्रकार के रोग-विकार दूर होते हैं। शलजम की पत्तियों में भी कई प्रकार के खनिज-लवणों, विशेषकर कैल्शियम की अधिकता पाई जाती है।
गूदेदार सब्जियों में शलजम को अधिक स्वास्थ्यवर्धक और चिकित्सकीय गुणों से भरपूर माना जाता है। शलजम की सब्जी पाचक, पथरी को निकालने वाली और मृदु विरेचक मानी गई है। बलगम से उत्पन्न होने वाले रोग-विकारों, मूत्र संबंधी विकारों, दांतों और मसूढ़ों से जुड़ी समस्याओं तथा कब्ज में इसका प्रयोग अधिक लाभदायी है। शलजम का सेवन त्वचा संबंधी रोग-विकारों में भी लाभप्रद है। नियमित रूप से शलजम का सेवन करने से रक्त का शोधन होकर चेहरे के फोड़े-फुंसी, मुंहासे, दाग आदि दूर होते हैं तथा चेहरा कांतिमान हो जाता है। शलजम के नियमित प्रयोग से शरीर में प्रतिरोधक क्षमता की बढ़ौतरी होती है। अत: सलाद आदि के रूप में शलजम का सेवन अवश्य करना चाहिए।

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