Tuesday 10 February 2015















"कलौंजी (Nigella), प्याज के बीज/किरायता"

[A] सामान्य परिचय. [B] अलग-अलग रोगोपचार में कलौंजी की प्रयोग विधियाँ.
[A] सामान्य परिचय:

१/. इसे संस्कृत में कृष्णजीरा, उर्दू में كلونجى कलौंजी, बांग्ला में कालाजीरो, मलयालम में करीम जीराकम, रूसी में चेरनुक्षा, तुर्की में çörek otu कोरेक ओतु, फारसी में शोनीज, अरबी में हब्बत-उल-सौदा, हब्बा-अल-बराकाحبه البركة, तमिल में करून जीरागम और तेलुगु में नल्ला जीरा कारा कहते हैं. लेकिन ध्यान रखें काली जीरी अलग होती है.

२/. इसका स्वाद हल्का कड़वा व तीखा और गंध तेज होती है. इसका प्रयोग विभिन्न व्यंजनों नान, ब्रेड, केक और अचारों में किया जाता है.

३/. यह श्वास नली की मांसपेशियों को ढीला करती है, प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत करती है और खांसी, दमा, ब्रोंकाईटिस आदि को ठीक करती है.

४/. इसमें मौजूद थाइमोक्विनोन एक बढ़िया एंटी-आक्सीडेंट है, कैंसर रोधी, कीटाणु रोधी, फंगस रोधी है, यकृत का रक्षक है और असंतुलित प्रतिरक्षा प्रणाली को दुरूस्त करता है.

५/. कलौंजी, शरीर से कैंसर कोशिकाओं का सफाया करती है और एंटी-बोडीज के निर्माण करने वाली कोशिकाओं की संख्या को बढ़ाती है.

६/. यकृत की कोशिकाओं की रक्षा करती है और यकृत में एस.जी.ओ.टी व एस.जी.पी.टी. के स्राव को कम करती है.

७/. कलौंजी में उपस्थित उड़नशील तेल रक्त में शर्करा की मात्रा को कम करते हैं.

८/. कलौंजी दमा, अस्थिसंधि शोथ आदि रोगों में शोथ (इन्फ्लेमेशन) दूर करती है. , सूजन को कम कर दर्द निवारण करती हैं. कलौंजी में विद्यमान 'निजेलोन' कोशिकाओं में हिस्टेमीन का स्राव कम करते हैं तथा श्वास नली की मांसपेशियों को ढीला कर दमा के रोगी को राहत प्रदान करते हैं.

९/. पेट के कीड़ों को मारने के लिए आधी छोटी चम्मच कलौंजी के तेल को एक बड़ी चम्मच सिरके के साथ दस दिन तक दिन में तीन बार पिलाते हैं. मीठे से परहेज जरूरी है.

१०/. एच.आई.वी./एड्स के रोगी को नियमित कलौंजी, लहसुन और शहद देने से शरीर की रक्षा करने वाली टी-4 और टी-8 लिंफेटिक कोशिकाओं की संख्या में आश्चर्यजनक रूप से वृद्धि होती है.

११/. कलौंजी दुग्ध वर्धक और मूत्र वर्धक होती है. कलौंजी जुकाम ठीक करती है और कलौंजी का तेल गंजापन दूर करता है. कलौंजी के नियमित सेवन से पागल कुत्ते के काटे जाने पर भी लाभ होता है. लकवा, माइग्रेन, खांसी, बुखार, फेशियल पाल्सी के इलाज में यह फायदा पहुँचाती हैं. दूध के साथ लेने पर यह पीलिया में लाभदायक पाई गई है. यह बवासीर, पाइल्स, मोतिया बिंद की आरंभिक अवस्था, कान के दर्द व सफेद दाग में भी फायदेमंद है.

[B] अलग-अलग रोगोपचार में कलौंजी की प्रयोग विधियाँ:

१/. कैंसर के उपचार में कलौंजी के तेल की आधी बड़ी चम्मच को एक गिलास अंगूर के रस में मिलाकर दिन में तीन बार लें. लहसुन भी खूब खाएँ. 2 किलो गेहूँ और 1 किलो जौ के मिश्रित अनुपात से आटे की रोटी 40 दिन तक खिलाएँ. आलू, अरबी और बैंगन से परहेज़ करें.

२/. खाँसी व दमा में छाती और पीठ पर कलौंजी के तेल की मालिश करें, तीन बड़ी चम्मच तेल रोज पिएँ और पानी में तेल डाल कर उसकी भाप लें.

३/. अवसाद और सुस्ती की स्थिति में एक गिलास संतरे के रस में एक बड़ी चम्मच तेल डाल कर 10 दिन तक सेवन करें. बहुत फर्क महसूस होगा.

४/. स्मरणशक्ति और मानसिक चेतना के लिए एक छोटी चम्मच तेल 100 ग्राम उबले हुए पुदीने के साथ सेवन करें.

५/. मधुमेह में एक कप कलौंजी के बीज, एक कप राई, आधा कप अनार के छिलके और आधा कप पितपाप्र को पीसकर चूर्ण बना लें. इसकी आधी छोटी चम्मच कलौंजी के तेल के साथ रोज नाश्ते के पहले एक महीने तक लें.

६/. गुर्दे की पथरी और मूत्राशय की पथरी में पाव भर कलौंजी को महीन पीस कर पाव भर शहद में अच्छी तरह मिला कर रख दें. इस मिश्रण की दो बड़ी चम्मच को एक कप गर्म पानी में एक छोटी चम्मच तेल के साथ अच्छी तरह मिला कर रोज नाश्ते के पहले पियें.

७/. उल्टी और उबकाई एक छोटी चम्मच कार्नेशन और एक बड़ी चम्मच तेल को उबले पुदीने के साथ दिन में तीन बार लें.

८/. हृदयरोग, रक्तचाप और हृदय की धमनियों के अवरोध की स्थिति में जब भी कोई गर्म पेय लें, उसमें एक छोटी चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर लें, साथ ही रोज सुबह लहसुन की दो कलियाँ नाश्ते के पहले लें और तीन दिन में एक बार पूरे शरीर पर कलौंजी के तेल की मालिश करके आधा घंटा धूप का सेवन करें. यह उपचार एक महीने तक लें.

९/. सफेद दाग और कुष्ठ रोग में 15 दिन तक रोज पहले सेब का सिरका मलें, फिर कलौंजी का तेल मलें.

१०/. कमर दर्द और गठिया में कलौंजी के तेल को हल्का गर्म करके जहाँ दर्द हो वहाँ मालिश करें और एक बड़ी चम्मच तेल दिन में तीन बार लें. 15 दिन में बहुत आराम मिलेगा.

११/. सिरदर्द में माथे और सिर के दोनों तरफ कनपटी के आस-पास कलौंजी का तेल लगायें और नाश्ते के पहले एक चम्मच तेल तीन बार लें कुछ सप्ताह बाद सिरदर्द पूर्णतः खत्म हो जायेगा.

१२/. अम्लता और आमाशय शोथ में एक बड़ी चम्मच कलौंजी का तेल एक प्याला दूध में मिलाकर रोज पाँच दिन तक सेवन करने से आमाशय की सब तकलीफें दूर हो जाती है.

१३/. बाल झड़ते हों तो बालों में नीबू का रस अच्छी तरह लगाएँ, 15 मिनट बाद बालों को शैंपू कर लें व अच्छी तरह धोकर सुखा लें, सूखे बालों में कलौंजी का तेल लगायें एक सप्ताह के उपचार के बाद बालों का झड़ना बन्द हो जायेगा.

१४/. नेत्र रोग और कमजोर नजर में रोज सोने के पहले पलकों ओर आँखो के आस-पास कलौंजी का तेल लगायें और एक बड़ी चम्मच तेल को एक प्याला गाजर के रस के साथ एक महीने तक लें.

१५/. दस्त या पेचिश में एक बड़ी चम्मच कलौंजी के तेल को एक चम्मच दही के साथ दिन में तीन बार लें तुरंत लाभ मिटा है.

१६/. सर में रूसी हो तो 10 ग्राम कलौंजी का तेल, 30 ग्राम जैतून का तेल और 30 ग्राम पिसी मेंहदी को मिलाकर गर्म करें. ठंडा होने पर बालों में लगाएँ और एक घंटे बाद बालों को धोकर शैंपू कर लें.

१७/. मानसिक तनाव एक चाय की प्याली में एक बड़ी चम्मच कलौंजी का तेल डालकर लेने से मन शांत हो जाता है और तनाव के सारे लक्षण ठीक हो जाते हैं.

१८/. स्त्रियों के गुप्त रोगों ( जैसे श्वेत प्रदर, रक्त प्रदर, प्रसवोपरांत दुर्बलता व रक्त स्त्राव आदि) के लिए कलौंजी अत्यंत गुणकारी है. थोड़े से पुदीने की पत्तियों को दो गिलास पानी में डालकर उबालें व इसमें आधा चम्मच कलौंजी का तेल डालकर दिन में दो बार पियें. बैगन, अचार, अंडा, मछली आदि मांसाहार से परहेज रखें.

१९/. पुरषों के गुप्तरोग जैसे स्वप्नदोष, स्तंभन दोष, पुरुषहीनता आदि रोगों में एक प्याला सेब के रस में आधा छोटी चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर दिन में दो बार 21 दिन तक पियें. थोड़ा सा तेल गुप्तांग पर रोज मलें. तेज मसालेदार चीजों से परहेज करें.

२०/. सुन्दर व आकर्षक चेहरे के लिए, एक बड़ी चम्मच कलौंजी के तेल को एक बड़ी चम्मच जैतून के तेल में मिलाकर चेहरे पर मलें और एक घंटे बाद चेहरे को धो लें. कुछ ही दिनों में आपका चेहरा चमक उठेगा. एक बड़ी चम्मच तेल को एक बड़ी चम्मच शहद के साथ रोज सुबह लें, आप तंदुरूस्त रहेंगे और कभी बीमार नहीं होंगे.

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