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दुनीया का सबसे ताकतवर पोषण पुरक आहार है सहजन (मुनगा) 300 से अधि्क रोगो मे बहोत फायदेमंद इसकी जड़ से लेकर फुल, पत्ती, फल्ली, तना, गोन्द हर चीज़ उपयोगी होती है आयुर्वेद में सहजन से तीन सौ रोगों का उपचार संभव है सहजन के पौष्टिक गुणों की तुलना •••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• -विटामिन सी- संतरे से सात गुना -विटामिन ए- गाजर से चार गुना -कैलशियम- दूध से चार गुना -पोटेशियम- केले से तीन गुना प्रोटीन- दही की तुलना में तीन गुना स्वास्थ्य के हिसाब से इसकी फली, हरी और सूखी पत्तियों में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, कैल्शियम, पोटेशियम, आयरन, मैग्नीशियम, विटामिन-ए , सी और बी-काम्प्लेक्स प्रचुर मात्रा में पाई जाती है इनका सेवन कर कई बीमारियों को बढ़ने से रोका जा सकता है, इसका बॉटेनिकल नाम ' मोरिगा ओलिफेरा ' है हिंदी में इसे सहजना , सुजना , सेंजन और मुनगा नाम से भी जानते हैं. जो लोग इसके बारे में जानते हैं , वे इसका सेवन जरूर करते हैं सहजन में दूध की तुलना में चार गुना कैल्शियम और दोगुना प्रोटीन पाया जाता है. ये हैं सहजन के औषधीय गुण सहजन का फूल पेट और कफ रोगों में , इसकी फली वात व उदरशूल में , पत्ती नेत्ररोग , मोच , साइटिका , गठिया आदि में उपयोगी है इसकी छाल का सेवन साइटिका , गठिया , लीवर में लाभकारी होता है। सहजन के छाल में शहद मिलाकर पीने से वात और कफ रोग खत्म हो जाते हैं इसकी पत्ती का काढ़ा बनाकर पीने से गठिया , साइटिका , पक्षाघात , वायु विकार में शीघ्र लाभ पहुंचता है। साइटिका के तीव्र वेग में इसकी जड़ का काढ़ा तीव्र गति से चमत्कारी प्रभाव दिखता है. मोच इत्यादि आने पर सहजन की पत्ती की लुगदी बनाकर सरसों तेल डालकर आंच पर पकाएं और मोच के स्थान पर लगाने से जल्दी ही लाभ मिलने लगता है सहजन की सब्जी के फायदे. सहजन के फली की सब्जी खाने से पुराने गठिया , जोड़ों के दर्द , वायु संचय , वात रोगों में लाभ होता है। इसके ताजे पत्तों का रस कान में डालने से दर्द ठीक हो जाता है साथ ही इसकी सब्जी खाने से गुर्दे और मूत्राशय की पथरी कटकर निकल जाती है, . इसकी जड़ की छाल का काढ़ा सेंधा नमक और हिंग डालकर पीने से पित्ताशय की पथरी में लाभ होता है सहजन के पत्तों का रस बच्चों के पेट के किड़े निकालता है और उल्टी-दस्त भी रोकता है ब्लड प्रेशर और मोटापा कम करने में भी कारगर सहजन का रस सुबह-शाम पीने से हाई ब्लड प्रेशर में लाभ होता है इसकी पत्तियों के रस के सेवन से मोटापा धीरे-धीरे कम होनेलगता है इसकी छाल के काढ़े से कुल्ला करने पर दांतों के कीड़े नष्ट होते है और दर्द में आराम मिलता है इसके कोमल पत्तों का साग खाने से कब्ज दूर होता है इसके अलावा इसकी जड़ के काढ़े को सेंधा नमक और हिंग के साथ पीने से मिर्गी के दौरों में लाभ होता है। इसकी पत्तियों को पीसकर लगाने से घाव और सूजन ठीक होते हैं पानी के शुद्धिकरण के रूप में कर सकते हैं इस्तेमाल सहजन के बीज से पानी को काफी हद तक शुद्ध करके पेयजल के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। इसके बीज को चूर्ण के रूप में पीसकर पानी में मिलाया जाता है। पानी में घुल कर यह एक प्रभावी नेचुरल क्लेरीफिकेशन एजेंट बन जाता है यह न सिर्फ पानी को बैक्टीरिया रहित बनाता है , बल्कि यह पानी की सांद्रता को भी बढ़ाता है। काढ़ा पीने से क्या-क्या हैं फायदे कैंसर और पेट आदि के दौरान शरीर के बनी गांठ , फोड़ा आदि में सहजन की जड़ का अजवाइन , हींग और सौंठ के साथ काढ़ा बनाकर पीने का प्रचलन है यह भी पाया गया है कि यह काढ़ा साइटिका (पैरों में दर्द) , जोड़ों में दर्द , लकवा ,दमा,सूजन , पथरी आदि में लाभकारी है | सहजन के गोंद को जोड़ों के दर्द और शहद को दमा आदि रोगों में लाभदायक माना जाता है। आज भी ग्रामीणों की ऐसी मान्यता है कि सहजन के प्रयोग से वायरस से होने वाले रोग , जैसे चेचक के होने का खतरा टल जाता है शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है सहजन में हाई मात्रा में ओलिक एसिड होता है , जो कि एक प्रकार का मोनोसैच्युरेटेड फैट है और यह शरीर के लिए अति आवश्यक है। सहजन में विटामिन-सी की मात्रा बहुत होती है। यह शरीर के कई रोगों से लड़ता है सर्दी-जुखाम यदि सर्दी की वजह से नाक-कान बंद हो चुके हैं तो , आप सहजन को पानी में उबालकर उस पानी का भाप लें। इससे जकड़न कम होगी। हड्डियां होती हैं मजबूत. सहजन में कैल्शियम की मात्रा अधिक होती है , जिससे हड्डियां मजबूत बनती हैं। इसके अलावा इसमें आइरन , मैग्नीशियम और सीलियम होता है इसका जूस गर्भवती को देने की सलाह दी जाती है , इससे डिलवरी में होने वाली समस्या से राहत मिलती है और डिलवरी के बाद भी मां को तकलीफ कम होती है, गर्भवती महिला को इसकी पत्तियों का रस देने से डिलीवरी में आसानी होती है। सहजन में विटामिन-ए होता है, जो कि पुराने समय से ही सौंदर्य के लिए प्रयोग किया आता जा रहा है इस हरी सब्जी को अक्सर खाने से बुढ़ापा दूर रहता है इससे आंखों की रोशनी भी अच्छी होती है यदि आप चाहें तो सहजन को सूप के रूप में पी सकते हैं इससे शरीर का खून साफ होता है
चने अंकुरित करने की विधि : सर्वप्रथम चने को साफ करके प्रातःकाल इतने पानी में भिगोएं जितना पानी चना सोख ले। एवं रात में साफ, मोटे, गीले कपडे़ या उसकी थैली में बांधकर लटका दें। गर्मी में 12 घंटे और सर्दी के मौसम में 18 से 24 घंटों के बाद भिगोकर गीले कपड़ों में बांधने से दूसरे, तीसरे दिन उसमें अंकुर निकल आते हैं। गर्मी में थैली में आवश्यकतानुसार पानी छिड़कते रहना चाहिए। इस प्रकार चने अंकुरित हो जाएंगे। अंकुरित चनों का नाश्ता एक उत्तम टॉनिक है। अंकुरित चनों में कुछ व्यक्ति स्वाद के लिए कालीमिर्च, सेंधानमक, अदरक एवं नींबू का रस भी मिलाते हैं परन्तु यदि अंकुरित चने को बिना किसी मिलावट के साथ खाएं तो अधिक लाभकारी है। रोगों में चने के कुछ प्रयोग : कब्ज: • 1 या 2 मुट्ठी चनों को धोकर रात को भिगो दें। सुबह जीरा और सोंठ को पीसकर चनों पर डालकर खाएं। घंटे भर बाद चने भिगोये हुए पानी को भी पीने से कब्ज दूर होती है। धातु पुष्टि: • 1 मुट्ठी सेंके हुए चने या भीगे हुए चने और 5 बादाम खाकर दूध पीने से वीर्य का पतलापन दूर होकर वीर्य गाढ़ा हो जाता है। नपुंसकता: • भीगे हुए चने सुबह-शाम चबाकर खाने से ऊपर से बादाम की गिरी खाने से मैथुन-शक्ति बढ़ती है और नंपुसकता खत्म होती है। त्वचा का कालापन: • लगभग 12 चम्मच बेसन, 3 चम्मच दही या दूध, थोड़ा सा पानी सभी को मिलाकर पेस्ट सा बनाकर पहले चेहरे पर मले और फिर सारे शरीर पर मलने के लगभग 10 मिनट बाद स्नान करें तथा स्नान में साबुन का उपयोग न करें। इस प्रकार का उबटन करते रहने से त्वचा का कालापन दूर हो जाएगा। चेहरे का सौंदर्यवर्धक: • चना के बेसन में नमक मिलाकर अच्छी तरह गौन्दकर लेप बना लें। इस लेप को चेहरे पर मलने से त्वचा में झुर्रियां नहीं आती हैं और चेहरा सुन्दर रहता है। अण्डकोष वृद्धि : • चने के बेसन को पानी और शहद में मिलाकर अण्डकोष की सूजन पर लगाने से लाभ होता है। श्वेतप्रदर : • प्रातः सेंके हुए चने पीसकर उसमें खाण्ड मिलाकर खाएं। ऊपर से एक गिलास दूध में एक चम्मच देशी घी मिलाकर पियें। इससे श्वेतप्रदर लाभ होता है। चेहरे की झांई के लिए: • रात्रि में 2 बड़े चम्मच चने की दाल को आधा कप दूध में भिगोकर रख दें। सुबह दाल को पीसकर उसी दूध में मिला लें। फिर इसमें एक चुटकी हल्दी और 6 बूंदे नींबू की मिलाकर चेहरे पर लगाकर रखें। सूखने पर चेहरे को गुनगुने पानी से धो लें। इस पैक को सप्ताह में तीन बार लगाने से चेहरे की झाईयां दूर हो जाती हैं। खाज-खुजली: • चने के आटे की रोटी को लगातार 64 दिन तक खाने से दाद, खुजली आदि रोग मिट जाते हैं। निम्न रक्तचाप: • 20 ग्राम काला चना और 25 दाने किशमिश या मुनक्का रात को ठण्डे पानी में भिगो दें। सुबह रोजाना खाली पेट खाने से निम्न रक्तचाप (लो ब्लड प्रेशर) में लाभ होगा और साथ ही चेहरे की चमक भी बढ़ जाती है। पीलिया : • चना का सत्तू पीलिया रोग में लाभदायक है। 1 मुट्ठी चने की दाल को 2 गिलास पानी में भिगो दें। फिर दाल को निकालकर बराबर मात्रा में गुड़ मिलाकर 3 दिन तक खाना चाहिए। प्यास लगने पर दाल का वहीं पानी पीना चाहिए। इससे पीलिया रोग नष्ट हो जाता है। सफेद दाग: • मुट्ठी भर काले चने और 10 ग्राम त्रिफला चूर्ण (हरड़, बहेड़ा, आंवला) को 125 मिलीलीटर पानी में भिगो दें। कम से कम 12 घंटों के बाद इन चनों को मोटे कपड़े में बांधकर रख दें और बचा हुआ पानी कपडे़ की पोटली के ऊपर डाल दें। फिर 24 घंटे के बाद पोटली को खोल दें अब तक इन चनों में से अंकुर निकल आयेंगे। यदि किसी मौसम में अंकुर न भी निकले तो चनों को ऐसे ही खा लें। इस तरह से अंकुरित चनों को चबा-चबाकर लगातार 6 हफ्तों खाने से सफेद दाग दूर हो जाते हैं। शरीर का वजन बढ़ाने के लिए : • लगभग 50 ग्राम की मात्रा में चने की दाल को लेकर शाम को 100 मिलीलीटर कच्चे दूध में भिगोकर रख दें। अब इस दाल को सुबह उठकर किशमिश और मिश्री में मिलाकर अच्छी तरह से चबाकर खायें। इसका सेवन लगातार 40 दिनों तक करना चाहिए। इससे शरीर को ताकत मिलती है और मनुष्य का वीर्य बल भी बढ़ता है। रात को सोते समय थोड़े से देशी चने लेकर उनको पानी में भिगोकर रख दें। सुबह उठकर गुड़ के साथ इन चनों को रोजाना खूब चबाकर खाने से शरीर की लम्बाई बढ़ती है। चनों की मात्रा शरीर की पाचन शक्ति के अनुसार बढ़ानी चाहिए। इन चनों को 2-3 तीन महीने तक खाना चाहिए।
किडनी अकर्मण्यता के आसान उपचार: How to deal with kidney falure
किडनी फेल्योर क्या है - शरीर मे किडनी का मुख्य कार्य शुद्धिकरण का होता है| लेकिन किडनी के किसी रोग की वजह से जब दोनों गुर्दे अपना सामान्य कार्य करने मे अक्षम हो जाते हैं तो इस स्थिति को हम किडनी फेल्योर कहते हैं| खून मे क्रिएट्नीन और यूरिया की मात्रा की जांच से किडनी की कार्यक्षमता का पता चलता है| वैसे तो किडनी की क्षमता शरीर की आवश्यकता से ज्यादा होती है इसलिए गुर्दे को थोड़ा नुकसान हो भी जाये तो भी खून की जाच मे कोई खराबी देखने को नहीं मिलती है| जब रोग के कारण किडनी 50 प्रतिशत से ज्यादा खराब हो जाती तभी खून की जांच मे यूरिया और क्रिएट्नीन की बढ़ी हुई मात्रा का प्रदर्शन होता है| किडनी वास्तव में रक्त का शुद्धिकरण करने वाली एक प्रकार की 11 सैं.मी. लम्बी काजू के आकार की छननी है जो पेट के पृष्ठभाग में मेरुदण्ड के दोनों ओर स्थित होती हैं। प्राकृतिक रूप से स्वस्थ गुर्दे में रोज 60 लीटर जितना पानी छानने की क्षमता होती है। सामान्य रूप से वह 24 घंटे में से 1 से 2 लीटर जितना मूत्र बनाकर शरीर को निरोग रखती है। किसी कारणवशात् यदि एक गुर्दा कार्य करना बंद कर दे अथवा दुर्घटना में खो देना पड़े तो उस व्यक्ति का दूसरा गुर्दा पूरा कार्य सँभालता है एवं शरीर को विषाक्त होने से बचाकर स्वस्थ रखता है। गुर्दों का विशेष सम्बन्ध हृदय, फेफड़ों, यकृत एवं प्लीहा (तिल्ली) के साथ होता है। ज्यादातर हृदय एवं गुर्दे परस्पर सहयोग के साथ कार्य करते हैं। इसलिए जब किसी को हृदयरोग होता है तो उसके गुर्दे भी बिगड़ते हैं और जब गुर्दे बिगड़ते हैं तब उस व्यक्ति का रक्तचाप उच्च हो जाता है और धीरे-धीरे दुर्बल भी हो जाता है।गुर्दे के रोगियों की संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही है। इसका मुख्य कारण आजकल के समाज मे हृदयरोग, दमा, श्वास, क्षयरोग,मधुमेह, उच्च रक्तचाप जैसे रोगों में किया जा रहा अंग्रेजी दवाओं का दीर्घकाल तक अथवा आजीवन सेवन है। किडनी अकर्मण्यता के लक्षण- 1. उल्टी होना 2. भूख न लगाना 3. थकावट और कमजोरी महसूस होना 4. नींद की समस्या होना 5. पेशाब की मात्रा कम हो जाना 6. दिमाग ठीक से काम नहीं करना 7. हिचकी आना 8. मांसपेशयों मे खिंचाव और आक्षेप आना 9. पैरों और टखने मे सूजन आना 10. लगातार खुजली होने की समस्या 11. हृदय मे पानी जमा होने पर छाती मे दर्द होना 12. हाई ब्ल प्रेशर जिसे से कट्रोल करना कठिन हो| किडनी खराब करने वाली 10 आदतें- 1) पेशाब आने पर करने न जाना (रोकना) 2) रोज 8 गिलास से कम पानी पीना 3) बहुत ज्यादा नमक खाना 4) उच्च रक्त चाप के ईलाज मे लापरवाही 5) शुगर के ईलाज मे लापरवाही 6) अधिक मांसाहार करना| 7 दर्द नाशक(पेन किलर) दवाएं लगातार लेते रहना 8) ज्यादा शराब पीना 9) काम के बाद जरूरी मात्रा मे आराम नहीं करना 10) कोला , पेप्सी आदि साफ्ट ड्रिंक्स और सोडा पीना हमारे गुर्दे रक्त में उपस्थित अपशिष्ट पदार्थों और जल को फ़िल्टर कर मूत्र के रूप में बाहर निकालने की क्रिया संपन्न करते हैं। हमारी मांसपेशियों में उपस्थित क्रिएटिन फ़ास्फ़ेटस के विखंडन से उर्जा उत्पन होती है और इसी प्रक्रिया में अपशिष्ट पदार्थ क्रिएटनीन बनता है । स्वस्थ गुर्दे अधिकांश क्रिएटनीन को फ़िल्टर कर मूत्र में निष्कासित करते रहते हैं। अगर खून में क्रिएटनीन का स्तर १.५ से ज्यादा हो जाता है तो समझा जाता है कि गुर्दे ठीक से काम नहीं कर रहे हैं। इसलिये खून में क्रिएटनीन की मात्रा का परीक्षण करना जरूरी होता है। कुछ ऐसे उपाय जिनको व्यवहार में लाकर रोगी अपने खून मे क्रिटनीन की मात्रा घटा सकते हैं। ये ऊपाय गुर्दे का कार्य-भार कम करते हैं जिससे खून में उपस्थित क्रिएटनीन का लेविल कम होने में मदद मिलती है। क्रिएटनीन कम करने वाले भोजन में प्रोटीन, फ़ास्फ़ोरस,पोटेशियम,नमक की मात्रा बिल्कुल कम होने पर ध्यान दिया जाता है। जिन भोजन पदार्थों में इन तत्वों की अधिकता हो उनका परहेज करना आवश्यक है। जब उच्च प्रोटीन वाले खाद्य पदार्थ उपयोग नहीं किये जाएंगे तो मांसपेशियों में कम क्रिएटीन मौजूद रहेगा अत: क्रिएटनीन भी कम बनेगा। किडनी को भी अपशिष्ट पदार्थ को फ़िल्टर करने में कम ताकत लगानी पडेगी जिससे किडनी की तंदुरस्ती में इजाफ़ा होगा। याद रखने योग्य है कि क्रिएटिन के टूटने से ही क्रिएटनीन बनता है। एक और जहां उच्च क्रिएटनीन लेविल गुर्दे की गंभीर विकृति की ओर संकेत करता है वही शरीर में जल की कमी से समस्या और गंभीर हो जाती है। जल की कमी से रक्तगत क्रिएटनीन में वृद्धि होती है। अत: महिलाओं को २४ घंटे में २.५ लिटर तथा पुरुषों को ३.५ लिटर पानी पीने की सलाह दी जाती है। चाय ,काफ़ी में केफ़ीन तत्व ज्यादा होता है जो गुर्दे के स्वास्थ्य के लिये हानिकारक है।अत: इनका सर्वथा परित्याग आवश्यक है। मूत्र प्रणाली में कोई संक्रामक रोग हो जाने से भी रक्तगत क्रिएटनीन बढ सकता है। अत: इस विषय में सावधानी पूर्वक इलाज करवाना चाहिये। उच्च रक्त चाप से गुर्दे को रक्त पहुंचाने वाली नलिकाओं को नुकसान होता है। इससे भी रक्त गत क्रिएटनीन बढ जाता है। अत: ब्लड प्रेशर नियंत्रित करने के उपाय करना जरूरी है। नमक ३ ग्राम से ज्यादा हानिकारक है। नियमित २० मिनिट व्यायाम करने और ३ किलोमिटर घूमने से खून में क्रिएटनीन की मात्रा काबू करने में मदद मिलती है।व्यायाम और घूमने के मामले में बिल्कुल आलस्य न करें । मधुमेह रोग धीरे -धीरे गुर्दे को नुकसान पहुंचाता रहता है। इसलिये यह रोग भी रक्तगत क्रिएटनीन को बढाने में अपनी भूमिका निर्वाह करता है। खून में शर्करा संतुलित बनाये रखने के उपाय आवश्यक हैं। प्रोटीन हमारे शरीर के ऊतकों और मांसपेशियों के निर्माण में उपयोग होता है। इससे रोगों के विरुद्ध लडने में भी मदद मिलती है। जब प्रोटीन शारीरिक क्रियाओं के लिये टूटता है तो इससे यूरिया अपशिष्ट पदार्थ बनता है। अकर्मण्य अथवा क्षतिग्रस्त किडनी इस यूरिया को शरीर से बाहर नहीं निकाल पाती है। खून में यूरिया का स्तर बढने पर क्रिएटनीन भी बढेगा । मांस में और अंडों में किडनी के लिये सबसे ज्यादा हानिकारक प्रोटीन पाया जाता है।अत: किडनी रोगी को ये भोजन पदार्थ नहीं लेना चाहिये। प्रोटीन की पूर्ति थोडी मात्रा में दालो के माध्यम से कर सकते हैं। * किडनी के सुचारु कार्य नहीं करने से खून में पोटेशियम का लेविल बहुत ज्यादा बढ जाता है। पोटेशियम की अधिकता से अचानक हार्ट अटेक होने की सम्भावना बढ जाती है। अगर लेबोरेटरी जांच में रक्त में पोटेशियम बढा हुआ पाया जाए तो कम पोटेशियम वाला खाना लेना चाहिये। * पाईनेपल,शिमला मिर्च,पत्ता गोभी,फूल गोभी,लहसुन,प्याज,अंडे की सफेदी,जेतुन का तेल,मछली,, खीरा ककडी,गाजर,सेव,लाल अंगूर और सफ़ेद चावल कम पोटेशियम वाले भोजन पदार्थ हैं । * केला,तरबूज,किशमिस,पालक टमाटर, आलू बुखारा ,भूरे चावल,संतरा,आलू का उपयोग वर्जित है।इनमे अधिक पोटेशियम पाया जाता है।लेकिन अगर पोटेशियम वांछित स्तर का हो तो इन फ़लों का इस्तेमाल किया जा सकता है। क्रोनिक किडनी फेल्योर के कारणों का उपचार - *डायबीटीज और उच्च रक्तचाप का उचित इलाज | *पेशाब में इन्फेक्शन का सही उपचार| *किडनी में पथरी का हर्बल उपचार जो गुर्दे की कार्यक्षमता बढाता हो| एलौपथिक पद्धति में किडनी फेल्योर के लिए कोई स्पेसिफिक मेडिसिन नहीं है और शुगर और ब्लड प्रेशर नियंत्रण पर ही ज्यादा ध्यान देते हैं| * दामोदर चिकित्सालय की हर्बल औषधि क्रोनिक किडनी फेल्योर में वरदान तुल्य सिद्ध हो सकती है| बढ़ा हुआ क्रिएटनिन धीरे धीरे नीचे आने लगता है | हाँ , हिमोग्लोबिन बढाने के लिए एरिथ्रोपोएटिन इंजेक्शन की मदद ली जा सकती है| किडनी के मरीज क्या खाएँ- रोगी की किडनी कितने प्रतिशत काम रही है, उसी के हिसाब से उसे खाना दिया जाए तो किडनी की आगे और खराब होने से रोका जा सकता है : 1. प्रोटीन : 1 ग्राम प्रोटीन/किलो मरीज के वजन के हिसाब से लिया जा सकता है। नॉनवेज खाने वाले 1 अंडा, 30 ग्राम मछली, 30 ग्राम चिकन और वेज लोग 30 ग्राम पनीर, 1 कप दूध, 1/2 कप दही, 30 ग्राम दाल 2. कैलरी : दिन भर में 7-10 सर्विंग कार्बोहाइड्रेट्स की ले सकते हैं। 1 सर्विंग बराबर होती है - 1 स्लाइस ब्रेड, 1/2 कप चावल या 1/2 कप पास्ता। 3. विटामिन : दिन भर में 2 फल और 1 कप सब्जी लें। 4. सोडियम : एक दिन में 1/4 छोटे चम्मच से ज्यादा नमक न लें। अगर खाने में नमक कम लगे तो नीबू, इलाइची, तुलसी आदि का इस्तेमाल स्वाद बढ़ाने के लिए करें। पैकेटबंद चीजें जैसे कि सॉस, आचार, चीज़, चिप्स, नमकीन आदि न लें। 5. फॉसफोरस : दूध, दूध से बनी चीजें, मछली, अंडा, मीट, बीन्स, नट्स आदि फॉसफोरस से भरपूर होते हैं इसलिए इन्हें सीमित मात्रा में ही लें। 6. कैल्शियम : दूध, दही, पनीर, फल और सब्जियां उचित मात्रा में लें। ज्यादा कैल्शियम किडनी में पथरी का कारण बन सकता है। 7. पोटैशियम : फल, सब्जियां, दूध, दही, मछली, अंडा, मीट में पोटैशियम काफी होता है। इनकी ज्यादा मात्रा किडनी पर बुरा असर डालती है। इसके लिए केला, संतरा, पपीता, अनार, किशमिश, भिंडी, पालक, टमाटर, मटर न लें। सेब, अंगूर, अनन्नास, तरबूज़, गोभी ,खीरा , मूली, गाजर ले सकते हैं। 8. फैट : खाना बनाने के लिए वेजिटेबल या ऑलिव आईल का ही इस्तेमाल करें। बटर, घी और तली -भुनी चीजें न लें। फुल क्रीम दूध की जगह स्किम्ड दूध ही लें। 9. तरल चीजें : शुरू में जब किडनी थोड़ी ही खराब होती है तब सामान्य मात्रा में तरल चीजें ली जा सकती हैं, पर जब किडनी काम करना कम कर दे तो तरल चीजों की मात्रा का ध्यान रखें। सोडा, जूस, शराब आदि न लें। किडनी की हालत देखते हुए पूरे दिन में 5-7 कप तरल चीजें ले सकते हैं। 10. सही समय पर उचित मात्रा में जितना खाएं, पौष्टिक खाएं। 11. अंकुरित मूंग किडनी खराब रोगी के लिए उत्तम आहार है| अंकुरित मूंग को भली प्रकार उबालकर जीवाणु रहित कर लेना चाहिए
यव (जौ) के क्या-क्या फायदे है - WHAT ARE THE BENEFITS OF MALT (BARLEY)
जौ को यव और धान्यराज भी कहा जाता है यह सभी अनाजों में सर्वश्रेष्ठ माना गया है यह एकमात्र बुद्धि वर्धक अनाज है किसी भी रोग के लिए यह निरापद है इसका सेवन बिना झिझके किसी भी रोग के लिए निरापद रूप से किया जा सकता है यह बहुत कम परिश्रम से ही बंजर या पथरीली भूमि पर भी उग जाता है यह वास्तव में अनाज नहीं बल्कि औषधि है भुने हुए जौ के आटे से बना हुआ सत्तू शीतल और पौष्टिक पेय होता है मीठा और ठंडा सत्तू गर्मी के दिनों में पीने से पित्त शांत होता है और शीतलता मिलती है मिश्री मिलाकर पीने से अधिक शीतलता मिलती है प्रयोग- जौ रक्तशोधक होता है इससे त्वचा भी सुन्दर हो जाती है जौ के आटे को खाने से ही नहीं वरन लगाने से भी चेहरे की सुन्दरता निखरती है बारीक जौ के आटे में खीरे और टमाटर का रस मिलाकर चेहरे पर लेप करें कुछ देर ऐसे ही रहने दें बाद में धो लें ऐसा कुछ दिन करने से चेहरा खिल उठेगा - जौ खांसी के लिए अचूक दवाई है जौ को जलाकर इसकी राख 1- 1 ग्राम की मात्रा में शहद के साथ सवेरे शाम चाटने से खांसी बिलकुल ठीक हो जाती है इसके पौधे की राख को भी खांसी के लिए 1-1 ग्राम की मात्रा में लिया जा सकता है श्वास रोगों में भी यह राख शहद के साथ ली जा सकती है यदि इस राख को 1-1 ग्राम की मात्रा में पानी के साथ लिया जाए तो पेशाब खुलकर आता है और किडनी की समस्या ठीक हो जाती है शुगर की बीमारी में यह अनाज लिया जाए तो दवा का काम करता है इस बीमारी के उपचार के लिए प्रयोग- जौ - 10 ग्राम तिल - 5 ग्राम मेथी दाना - 3 ग्राम उपरोक्त सभी सामग्री को दरदरा कूटकर मिट्टी के बर्तन में रात को भिगो दें और सवेरे-सवेरे इस पानी को छानकर पी लें इससे गर्मी भी शांत होगी और पेशाब की जलन भी खत्म हो जाएगी शुगर की बीमारी में जौ चने और गेहूँ की मिस्सी रोटी खानी चाहिए इससे सभी खनिज , विटामिन, कैल्शियम और लौह तत्व भी भरपूर मात्रा में मिल जाते हैं इस रोटी को खाने से कमजोरी भी दूर होती है इसका दलिया रात को मिटटी के बर्तन में पानी में भिगो दें सवेरे इसका पानी निथारकर पीने से शीतलता व शक्ति मिलती है बचे हुए दलिए को ऐसे ही पका लें या फिर खीर बना लें इससे ताकत बढती है यवक्षार या जौ का क्षार हल्के मटमैले रंग का होता है यह बहुत सी बीमारियों के लिए रामबाण है इसे बनाना बहुत आसान है आधे पके हुए जौ के पौधों को उखाडकर उनके टुकड़े कर लें इसको जलाकर राख बना लें राख में पानी मिलाकर अच्छी तरह से हिलाएं 10-15 मिनट के लिए रख दें फिर से हिलाएं और 10-15 मिनट तक रख दें ऐसा चार पांच बार करें फिर ऊपर के तिनके निकाल कर पानी को निथारकर फेंक दें नीचे के बचे हुए सफ़ेद रंग के गाढे द्रव को धीमी आंच पर धीरे धीरे पकाएं जब यह काफी गाढ़ा हो जाए तो इसे सुखा लें यही मटमैला सा पाऊडर यवक्षार कहलाता है इसे जौ के बीजों को जलाकर भी प्राप्त कर सकते हैं यवक्षार की 1-2 ग्राम मात्रा शहद के साथ लेने से खांसी और अस्थमा जैसी बीमारियों से छुटकारा मिलता है यवक्षार को पानी के साथ लेने पर पथरी और किडनी की समस्याओं से राहत मिलती है भूख कम लगती हो तो आधा ग्राम यवक्षार रोटी में रखकर खाएं यह कई तरह की दवाओं में प्रयोग में लाया जाता है इस अनाज को पवित्र माना गया है हवन में में यव (जौ ) और तिल डाले जाते हैं इससे वातावरण के बैक्टीरिया आदि समाप्त हो जाते हैं इसे खाने से शरीर के विजातीय तत्व खत्म हो जाते हैं या बाहर निकल जाते हैं आजकल के प्रदूषित वातावरण में प्रदूषित खाद्यान्नों का प्रभाव कम करना हो तो जौ का सेवन अवश्य ही करना चाहिए - इसके निरंतर सेवन से कई प्रकार की अंग्रेजी दवाइयां लेने से भी बचा जा सकता है
बालों को झड़ने से रोकने के घरेलू उपाय-BALO KO JHDNE SE ROKNE KE GHRELU UPAYE आज कल बाल झड़ने कि समस्या आम हो गयी है है महिलाये हो या पुरुष बाल झड़ने कि समस्या दोनों को ही हो रही है आजकल खराब खान-पान, प्रदूषित वातावरण, हार्मोनल के बदलाव आदि के कारण कम उम्र में ही बाल झड़ने की समस्या से परेशान हो जाते हैं यह समस्या आम बात हो गई है इसे पूरी तरह तो छुटकारा नहीं दिला सकते लेकिन कुछ घरेलू उपये करके इसे रोक सकते है आज कुछ ऐसे ही घरेलू उपये बताने जा रहे है- 1- कुछ लोग बाल मे बार बार कंघी करते है ऐसा करने से बाल झड़ने लगते है ज्यदा कंघी करना भी हानिकारक है इसलिए आप दिन में एक या दो तीन बार ही कंघी करे इससे ज्यदा नहीं और वेसे भी बाल है तो सब है। 2- बालों को झड़ने से बचाने के लिए आपको इन्हे धूप से बचना चाहिए ज्यदा धुप में रहने से भी बालो को परेशानी होती है यदि आप धुप में निकलते है तो छाता लेकर निकले और अपने बालो को ज्यदा गरम पानी से न धोये। 3- मेथी के बीज में काफी शक्तिशाली हॉर्मोन के गुण होते हैं इनमें निकोटिनिक एसिड और प्रोटीन के गुण होते हैं जो बालों को शक्ति देते हैं मेथी के बीजों को रात भर पानी में भिगोकर रखें और सुबह उसका एक महीन पेस्ट बना लें फिर इस पेस्ट को तीस मिनिट बालो में लागने से काफी आरम मिलेगा और इसे एक महिना करके देखे फायदा होगा । 4- आजकल हम जंक फुड ज्यदा पंसद करते है जो कि हमारे बालो के लिए हानिकारक है हमें ज्यदा से ज्यदा प्रोटीन, आइरन, जिंक,सलफर,विटामिन सी, के अलावा विटामिन ब से युक्त खध पदार्थ भरपूर मात्रा मे लेने चाहिए। 5- हमे बालो में हॉट रोल्स वा ब्लू ड्राइयर या आइरन के ज़्यादा इस्तेमाल करने से भी बाल डॅमेज हो जाते है इसलिए कोशिश करे की बालों को प्राकृतिक ही रहने दे और बालों पर बहूत ज़्यादा एक्सपेरिमेंट करने से बचे बालों को सही पोषण ना मिलने से भी बाल झड़ने लगते है ऐसे मे बालों को झड़ने से बचाने के लिए समय समय पर बालों मे मेहन्दी लगानी चाहिए या फिर बालों को पोषण देने के लिए दही भी लगा सकते है। 6- यदि आपको बालो के झड़ने से रोकना है तो आंवला सबसे अच्छा उपयोग है आंवला बालों को जड़ से मजबूत बनाता है और यह प्राकृतिक रूप से बालों को गिरने से रोकता है आप कुछ सूखें आंवले लीजिए और उन्हें नारियल के तेल में मिक्स करके उबालें तब तक इसे उबालें जब तक इसका रंग काला ना हो जाए फिर इसे ठंड़ा करके बालों के सिरे से लेकर जड़ों तक लगाएं नियमित एैसा करने से आपको इसका फायदा मिलेगा बाल झड़ना जरूर रूकेगा। 7- हम रोज तो तेल लगा नहीं सकते लेकिन हफ्ते में एक दिन तेल से बालो कि मालिश जरुर करनी चहिये इसे बाल टूटना बंद हो जाता है यदि आप गुनगुने तेल से बालो कि मालिश करते है तो और ही फयदा होता है नारियल के तेल से मालिश करने से और काफी फयदा होता है। 8- बालों पर कलर करने से भी बाल खराब हो जाते है और जल्दी टूटने लगते है इसलिए ज्यदा से ज्यदा इनका उपयोग नहीं करना चहिये अगर लगाना ही है तो आवंला और सिकाकई का उपयोग करे इसे बाल नहीं टूटेगे। 9- दही एक बहुत ही अचूक घरेलू नुस्खा है दही से बालों को पोषण मिलता है। बालों को धोने से कम से कम आधा घंटा पहले बालों में दही लगाइये और जब यह पूरी तरह सूख जाएं तो उसे पानी से धो लीजिए। दही में नींबू का रस मिलाकर भी प्रयोग किया जा सकता है नींबू के रस को दही में मिलाकर पेस्ट बना लीजिए। नहाने से पहले इस पेस्ट को बालों में लगाइए, तीस(३०) मिनट बाद बालों को धुल लीजिए। बालों का गिरना कम हो जाएगा। 10- नारियल के दूध में प्रोटीन होता है। इससे बाल बढ़ते हैं और बालों का झड़ना रुकता है। तेज़ परिणामों के लिए नारियल के दूध को बालों में लगाएं नारियल को पीस कर उसका दूध निकाल और इसे बालो कि जडो में लगाये इससे बाल टूटना बंद हो जयेगा।
आँख आना / Conjunctivitis आँख आना, जिसे ‘पिंक आई’, ‘कंजंक्टिवाइटिस’ या “ नेत्र शोथ” भी कहा जाता है। आँख की बाहरी पर्त कंजंक्टिवा और पलक की अंदरूनी सतह के संक्रमण को नेत्र शोथ कहते हैं। यह प्रायः एलर्जी या संक्रमण (सामान्यतः वायरस से लेकिन कभी-कभी बैक्टीरिया से होने वाला संक्रमण) द्वारा होता है। कंजंक्टिवाइटिस को बोलचाल की भाषा में ‘आँख आना’ कहा जाता है। इसकी वजह से आँखें लाल, सूजन युक्त, चिपचिपी [कीचड़युक्त] होने के साथ-साथ उसमें तेज चुभन भी होती है। शहद : नमक को शहद के साथ मिलाकर सुबह शाम आंखोँ मेँ लगाने से आपको आँखों की समस्याओं से छुटकारा मिलेगा। जायफल : जायफल को पीसकर दूध मेँ मिलाकर आंखोँ मेँ लगाने से, आपको आंखोँ से संबंधित सभी बिमारियों से तुरंत राहत मिलता है। हल्दी : हल्दी को पानी में उबालकर छान लें, फिर इसे आंखों में बार-बार बूंदों की तरह डालने से आंखों का दर्द कम होता है। इससे आंखों में कीचड़ आना और आंखों का लाल होना आदि रोग समाप्त हो जाते हैं। इसके लिए आप कपड़ें को हल्दी से रंग कर जब आँख आये तो इस कपड़े का प्रयोग कर सकते है। उस समय इस कपडे़ से आंखों को साफ करने से फायदा होता है। मुलहठी : मुलहठी को पानी मेँ भिगो देँ फिर हर दो घंटे के बाद उस पानी मेँ रूई डुबोकर आंखोँ पर रखने से आंखोँ की जलन और दर्द कम होती है। धनिया : धनिये का काढ़ा तैयार करके अच्छी तरह से छान लें। अब इस काढ़े को बूंद-बूंद करके हर 2-3 घंटों में आंखों में डालें। इससे आंखों को आराम मिलता है। इस काढ़े को आंखों में डालने की शुरुआत करने से पहले आंखों में एक बूंद एरण्ड तेल (कैस्टर आयल) डाल लें। यह आंख आने और आंखों के दर्द की बहुत लाभकारी दवा है। बेर : बेर की गुठली को पीसकर गर्म पानी से मिलाकर, अच्छी तरह से छान लें, फिर इसे आंखों में डालने से आँख आना और आंखों का दर्द ठीक हो जाता है। आंवला : आंवले का रस निकालकर उसे किसी कपडे़ में छान लें। इस रस को बूंद-बूंद करके आंखों में डालने से आंखों का लाल होना और आंखों की जलन जैसी समस्याओं से तुरंत निजात मिलता है। त्रिफला : त्रिफला का चूर्ण पानी में भिगों दें। फिर उस पानी को अच्छी तरह से छानकर आंखों पर छींटे मारकर आंखों को दिन में 4 से 5 बार धोने से आंखों के रोगों में लाभ होता है। बबूल : बबूल की पत्तियों को पीसकर टिकिया बना लें और रात के समय आंखों पर बांध लें सुबह उठने पर खोल लें। इससे आंखों का लाल होना और आंखों का दर्द आदि रोग दूर हो जायेंगे। पीले धतूरे : पीले धतूरे का दूध को गाय के घी के साथ आंखों में लगाने से लाभ होता है। यह दूध हर समय नहीं मिलता इसलिए जब यह दूध मिले तो तब इस दूध को इकट्ठा करके सुखाकर रख लें। इसके बाद जरूरत पड़ने पर इसे गाय के घी में मिलाकर काजल की तरह आंखों में लगाने से आंख आने का रोग दूर होता है। बेल : आंख आने पर बेल के पत्तों के रस को सुबह-शाम पिए और उसके पत्तों का लेप बनाकर आँखों के ऊपर रखें। इससे आंखों को आराम मिलता है। सुहागा : आंख आने पर सुहागा और फिटकरी को एक साथ पानी में घोल बना लें और फिर इसी पानी से आंख को धोयें और बीच-बीच में बूंद-बूंद करके आई ड्राप्स की तरह प्रयोग करें। इससे बहुत जल्दी लाभ होता है। बकरी का दूध : आँख आने या आंखों के लाल होने पर मोथा या नागरमोथा के फल को साफ करके बकरी के दूध में घिसकर आंखों में लगाने से बहुत जल्द आराम होता है। वेदमुश्क के फूल : वेदमुश्क के फूलों के रस में कपड़ा भिगोकर, आंखों पर रखने से आंख आना जैसी समस्याओं में लाभ मिलता है। गुलाबजल : आंखों को साफ करके गुलाब जल की बूंदें, आंखों में डालने से आंखों से सम्बंधित सारी समस्यायों से निजात मिलता हैं। यदि आपको आंखों में जलन और किरकिरापन (आंखों में कुछ चुभना) मेहसूस हो रहा है तो गुलाबजल डालने से आंखों में आराम मिलता है। चमेली : आंख आने पर कदम के रस में चमेली के फूलों को पीसकर आँखों के ऊपर रखने से रोगी को लाभ होता है। अगस्त के फूल : अगस्त के फूल और पत्तों का रस, नाक में डालने से आंखों की समस्यायों से छुटकारा मिलता है। बोरिक एसिड पाउडर: बोरिक एसिड पाउडर को पानी में मिलाकर, आंखों को कई बार साफ करने से आंखों के अंदर जमा कीचड़ और धूल मिट्टी साफ हो जाती है। मिश्री : महात्रिफला और मिश्री को घी में मिलाकर, सुबह-शाम रोगी को देने से गर्मी के कारण उत्पन आंखों में जलन, आंखें ज्यादा लाल हो जाना और रोशनी की ओर देखने से आंखों में जलन होना इत्यादि समस्याएं दूर होती हैं। इसके साथ ही त्रिफला के पानी से आंखों को धोने से भी आराम मिलता है। फिटकरी : फिटकरी का टुकड़ा पानी में भिगोकर, उसी पानी से रोजाना 3 से 4 बार आँखों को धोने से लाभ मिलता है। बरगद : बरगद का दूध लेकर यदि उसे पैरों के नाखूनों में लगाये तो आंख आना ठीक हो जाता है। दूध : मां के दूध की 1-2 बूंदे बच्चे की आंखों में डालने से बच्चों को आंखों के सभी प्रकार के रोगों से लाभ मिलता है। दूब : हरी दूब या घास के रस में रूई के टुकड़े को भिगोकर आँखों पर रखने से आंख आना जैसे रोग से छुटकारा मिलता है। हरड़ : हरड़ को रात में पानी में भिगोकर रखें। सुबह उस पानी को कपड़े से छानकर आंखों को धोयें। इससे आंखों का लाल होना दूर होता है। नीम : नीम के पत्ते और मकोय का रस निकालकर आँखों पर लगाने से आंखों का लाल होना जैसी समस्याएं दूर हो जाती है। नीम के पानी से आंखें धोकर, फिर आंखों में गुलाबजल या फिटकरी के पानी को बूंद बूँद डालें, इससे आपको काफी आराम मिलेगा। अडूसा : अड़ूसा के ताजे फूलों को हल्का सा गर्म करके आँखों पर बांधने से आंखों के दर्द होने जैसी समस्या दूर होती है।
गर्मी के मौसम में खुद का बचाव करें गर्मी का मौसम आ गया है और सूरज अपनी प्रखर किरणों की तीव्रता से संसार के जलियांश को सुखा कर वायु में रूखापन और ताप बढ़ा कर मनुष्यों के शरीर के ताप की भी वृद्धि कर रहा है। गर्मी में लापरवाही के कारण शरीर में निर्जलीकरण (dehydration), लू लगना, चक्कर आना, घबराहट होना, नकसीर आना, उलटी-दस्त, sun-burn, घमोरियों जैसी कई बीमारियां हो जाती हैं। गर्मी के मौसम में खुले शरीर, नंगे सर, नंगे पाँव धूप में चलना , तेज गर्मी में घर से खाली पेट या प्यासा बाहर जाना, कूलर या AC से निकल कर तुरंत धूप में जाना, बाहर धुप से आकर तुरंत ठंडा पानी पीना, सीधे कूलर या AC में बैठना, तेज मिर्च-मसाले, अत्यधिक गर्म खाना, चाय, शराब इत्यादि का सेवन ज्यादा करना, सूती और ढीले कपड़ो की जगह सिंथेटिक और कसे हुए कपडे पहनना इत्यादि कारण गर्मी से होने वाले रोगों को पैदा कर सकते हैं। हम कुछ छोटी-छोटी किन्तु महत्त्वपूर्ण बातों का ध्यान रखकर, इन सबसे बचे रहकर, गर्मी का आनंद ले सकते हैं। क्योंकि उपचार से बचाव बेहतर होता है, है न !! तो चलिए हम कुछ वचाव के तरीके जानते हैं । गर्मी में सूरज अपनी प्रखर किरणों से जगत के स्नेह को पीता रहता है, इसलिए गर्मी में मधुर, शीतल, द्रव तथा हल्का खान-पान हितकर होता है। गर्मी में जब भी घर से निकले, कुछ खा कर और पानी पी कर ही निकले, खाली पेट नहीं । गर्मी में ज्यादा भारी गरिष्ठ और बासी भोजन न करे, क्योंकि गर्मी में शरीर की जठराग्नि मंद रहती है। इसलिए वह भारी खाना पूरी तरह पचा नहीं पाती और जरुरत से ज्यादा खाने या भारी खाना खाने से उलटी-दस्त की शिकायत हो सकती है । गर्मी में सूती और हलके रंग के कपडे पहनने चाहिये। चेहरा और सर रुमाल या साफी से ढक कर निकलना चाहिये। बाजारू ठंडी चीजें नहीं बल्कि घर की बनी ठंडी चीजो का सेवन करना चाहिये। ठंडा मतलब आम का पना, खस,चन्दन गुलाब फालसा संतरा का शर्बत, ठंडाई सत्तू, दही की लस्सी, मट्ठा, गुलकंद का सेवन करना चाहिये । इनके अलावा लौकी, ककड़ी, खीरा, तोरी, पालक, पुदीना ,नीबू, तरबूज आदि का सेवन अधिक करना चाहिये । प्रतिदिन कम से कम चार से पांच लीटर पानी पीजिये । तरबूज के बीज, चीनी, केसर, इलायची को पीस कर पाउडर बना लें और रख लें। जब भी खुद दूध पिएं या किसी को पीने के लिए दें तो उसमें एक चम्मच यह पाउडर मिला दें। इससे भी गर्मी नहीं लगेगी और शरीर हमेशा ठंडा बना रहेगा। दूध में पिसी इलायची और गुलाब की पिसी हुई पत्तियां मिलाकर उसे उबाल लें। फिर ठंडा करके फ्रिज में रख दें। गर्मी में नाश्ते के बाद अगर यह मिश्रण पी लिया जाए तो सारा दिन धूप का असर नहीं होता। शरीर में ठंडक बनी रहती है। पुदीने की पत्तियों को सुखाकर उनका चूरा बनाकर घर में रख लेना चाहिए। इसे दही में मिलाकर खाने से गर्मी से काफी बचाव होता है। अगर आपको या आपके परिवार में किसी को गर्मी की वजह से सिरदर्द हो तो उसे दस बादाम चबाकर खाने को कहिए। इससे सामान्य सिरदर्द कुछ मिनटों में भाग जाता है। और अगर इससे भी राहत न आए तो उंगलियों को लौंग के तेल में डुबोकर लगातार इनसे सिर के उस हिस्से पर लगाएं, जहां दर्द है। इससे तो दर्द शर्तिया छूमंतर हो जाएगा । गर्मी में चेहरे की चमक कहीं दूर भाग जाती है। ग्लो की जगह कालिमा घेर लेती है। किसी किसी की त्वचा पर दाने से निकल आते हैं। इसके लिए नारियल पानी में तरबूज और संतरे का गूदा (मैश करके) मिला लें और इसे चेहरे पर लगाकर गुनगुने पानी से चेहरा धो दें। चेहरे की चमक बरकरार रहेगी। नीम की पत्तियों को पानी में उबाल लें। इस पानी को छानकर रख लें। इसे चेहरे या हाथ पैरों पर लगाकर धोने से झाइंयों, कालिमा और दानों से बचाव होता है। इन कुछ छोटी छोटी बातों का ध्यान रखकर गर्मी की गर्मी से हम स्वयं को बचा सकते हैं ।
हरी मिर्च (Green Chilli) के आयुर्वेदिक व औषधीय गुण! 1:- तीखी हरी मिर्च का सेवन सेहत और सौंदर्य दोनों के लिए फायदेमंद होता है। ये साफ त्वचा से लेकर प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करता है। रोजाना हरी मिर्च का सेवन करने से सेहत तो दुरुस्त रहती है। हरी मिर्च में कैप्सियासिन नामक यौगिक मौजूद होता है जो इसे मसालेदार बनाता है। यह सौंदर्य के लिए भी फायदेमंद होता है, 2:- एक्ने :– मिर्च खाने से खून साफ होता है और नसों में इसका फ्लो तेजी से होता है, जिससे चेहरे पर पिंपल्स की समस्या नहीं होती। मिर्च में काफी विटामिन सी और ई पाया जाता है।छोटी-छोटी फुन्सियाँ उठने पर हरी मिर्च का लेप लगाने से फुन्सियाँ बैठ जाती है। खाज-खुजली के लिए मिर्च को तेल मे जलाकर मालिश करने से आराम मिलता है। गर्मी के दिनों में खाने के साथ हरी मिर्च खाएं। खाने के साथ मिर्च खाने से लू नहीं लगती है 3:- त्वचा :– हरी मिर्च या फिर शिमला मिर्च में आपको काफी ज्यादा विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट मिल जाएगा। एंटीऑक्सीडेंट हमारी त्वचा और सेहत के लिये बहुत अच्छा माना जाता है। मिर्च खाने से चेहरे पर जल्दी झुर्रियां नहीं पड़ेंगी।हरी मिर्च में बहुत सारा विटामिन ई होता है जो कि त्वचा के लिये फायदेमंद प्राकृतिक तेल का प्रोडक्शन करता है। तो अगर आप तीखा खाना खाती हैं तो आपकी त्वचा अपने आप ही अच्छी हो जाएगी। 4:- बैक्टीरियल इंफेक्शन से बचाव :– हरी मिर्च में एंटी बैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं, जो कि संक्रमण को दूर रखते हैं। हरी मिर्च को खाने से आपको स्किन रोग नहीं होगा।महिलाओं में अक्सर आयरन की कमी हो जाती है लेकिन अगर आप हरी मिर्च खाने के साथ रोज खाएंगी तो आपकी यह कमी भी पूरी हो जाएगी। 5:- जवां रहते हैं आप :– हरी मिर्च में फाइटोन्यूट्रियंट्स होते हैं जो कि स्किन को एक्ने, झाइयां और रैश से बचाते हैं। मिर्च का सेवन करने से आप बुढापे के लक्षणों से लड़ सकती हैं। इसका नियमित सेवन करने से आप जवां बन सकती हैं। हरी मिर्च में विटामिन ई होता है, जो कि त्वचा के लिए फायदेमंद है। इसलिए खाने के साथ कच्ची हरी मिर्च चबाने से त्वचा हमेशा जवान बनी रहती है। 6:- वजन घटाता है :– हरी मिर्च में कैलोरीज कम होती है। यह शरीर में अतिरिक्त फैट को बर्न करने में सहायता करती है और वजन पर नियंत्रण रखने में भी सहायक होती है।मोटापे से पीड़ित लोगों में कोलैस्ट्रॉल के स्तरों को कम करने में हरी मिर्चें काफी सहायक होती हैं। हरी मिर्च में मौजूद विटामिन के ओस्टियोपोरोसिस के खतरे को कम करता है। 7:- रक्तचाप और पाचन रखता है दूर :- रक्तचाप को नियंत्रित करने में हरी मिर्च काफी फयदेमंद होती है। मधुमेह होने की स्थिति में भी हरी मिर्च में रक्तचाप का स्तर नियंत्रित रखने के गुण होते हैं। मिर्चों में मुख्य तौर पर विटामिन ए तथा आयरन, कैल्शियम, पोटाशियम, मैंगनीज और मैग्रीशियम की कुछ मात्रा मौजूद होती है। इसमें पोटाशियम भी होता है जो कोशिका तरलों का एक महत्वपूर्ण अंग है। यह हमारी हृदय गति तथा रक्तचाप को नियंत्रित रखने में सहायक होता है।हरी मिर्चें शरीर में से विषैले तत्व बाहर निकालने के लिए जानी जाती हैं। ये डाइटरी फाइबर का एक अच्छा स्रोत हैं। इनसे आंतडिय़ों की गतिविधि को बढिय़ा बनाने में सहायता मिलती है और कब्ज नहीं होती।
आमले और कढ़ी पत्ते से बनाइये बालों को काला करने वाला तेल! कडी पत्ते का तेल बनाने की विधि – कडी पत्ते का एक गुच्छा ले कर उसे साफ पानी से धो लें और सूरज की धूप में तब तक सुखा लें, जब तक कि यह सूख कर कड़ी ना हो जाए। फिर इसे पाउडर के रूप में पीस लें अब 200 एम एल नारियल के तेल में या फिर जैतून के तेल में लगभर 4 चम्मच कडी पत्ती मिक्स कर के उबालिये। 2 मिनट के बाद आंच बंद कर के तेल को ठंडा होने के लिये रख दीजिये। तेल को छान कर किसी एयर टाइट शीशी में भर कर रख प्रयोग करने का तरीका हफ्ते में एक या दो बार इस कडी पत्ते का तेल जरुर लगाएं। अपनी दीजिये। उंगलियों को सिर पर हल्के - हल्के घुमाते हुए सिर पर तेल फैलाएं। सिर धोने से 40 मिनट पहले यह तेल लगाएं। इस विधि से यह तेल सफेद हो रहे बालों को काला करने में मदद करेगा। 2) आमला तेल आमला एक प्राकृतिक डाई के रूप में पुराने जमाने की महिलाओं दृारा प्रयोग किया जाता था। ● इस तेल को बनाने की विधि – ताजा आमला ले कर उसे छोटे टुकड़ों में काट लें और उसका बारीक पेस्ट बना लें। पेस्ट बनाते वक़्त उसमें रोज वॉटर का भी प्रयोग कर सकते हैं। इस पेस्ट को अपने हेयर ऑयल के साथ मिक्स कर के किसी कपड़े या फिर ढक्कन से बिलकुल कस के बांध दीजिये। अब आमला को तेल के साथ बिल्कुल मिक्स हो जाने दीजिये, ऐसा होने में लगभर 1 हफ्ता लगेगा। एक हफ्ते के बाद तेल को छान कर किसी साफ शीशी में भर लीजिये। ● प्रयोग करने की विधि :- सोने से पहले रोज रात को यह तेल लगाएं और इससे अपने सिर की अच्छे से मसाज करें। अगर इस तेल को हल्की आंच पर गरम कर के लगाया जाए तो जल्दी असर दिखेगा। अगली सुबह सिर को शैंपू से धो लें। इस आमला ट्रीटमेंट को आप रोज या फिर हर दूसरे दिन आजमां सकती हैं। इससे आपको बहुत लाभ मिलेगा। ☆ टिप्स :- अपने भोजन में नियमित रूप से कडी पत्ता शामिल करें और जितना हो सके तनाव से दूर रहें। इससे आपके बालों को काला होने में मदद मिलेगी।
आँखों के सभी रोगों के लिए आंवला गुलाब जल ऑय ड्रॉप्स. आँखों की कम रौशनी, आँखों में जलन, आँखों में ललाई, चुभन और खुजली में विशेष आंवले और गुलाब जल से घर पर बना हुआ बिलकुल सुरक्षित, और बेहद कारगार Eye Drops. आँखों की किसी भी प्रकार कि समस्या में ज़रूर इस्तेमाल कीजिये. आंवला गुलाब जल ऑय ड्रॉप्स के लिए आवश्यक सामग्री 100 मिली शुद्ध गुलाब जल 10 ग्राम सूखे आंवले आंवला गुलाब जल ऑय ड्रॉप्स बनाने की विधि. सबसे पहले सूखे आंवलों को शुद्ध गुलाब जल में डालकर अच्छी तरह डुबोकर रख दीजिये. इसको दो दिन तक डूबा रहने दीजिये, दो दिन के बाद इसे निथारकर एक साफ़ सूती कपडे को 8 तह दे कर इस कपडे से छान लें, इसके बाद इस जल को शीशी में भर कर रख लीजिए. आपकी आँखों की रौशनी बढ़ाने कि दवा बन कर तैयार है. आंवला गुलाब जल ऑय ड्रॉप्स उपयोग की विधि. सुबह शाम आँखों को अच्छी तरफ साफ़ पानी से धुलाई कर के सीधे सो जाएँ और 2-2 बूँद दोनों आंखों में डालिए, उसके बाद कुछ क्षण चित लेटे रहें. आंवला गुलाब जल ऑय ड्रॉप्स के फायदे. इस दवा को डालने से आँखों की रौशनी बढती है, अगर आँखों में बहता पानी रुक जाता है, आँखों में ललाई दूर होती है, आँखों में जलन, चुभन, नेत्रदाह, एवम खुजली में विशेष आराम आता है.
एरंण्ड के लाभ एरंड का पौधा प्राय: सारे भारत में पाया जाता है। एरंड की खेती भी की जाती है और इसे खेतों के किनारे-किनारे लगाया जाता है। ऊंचाई में यह 2.4 से 4.5 मीटर होता है। एरंड का तना हरा और चिकना तथा छोटी-छोटी शाखाओं से युक्त होता है। एरंड के पत्ते हरे, खंडित, अंगुलियों के समान 5 से 11 खंडों में विभाजित होते हैं। इसके फूल लाल व बैंगनी रंग के 30 से 60 सेमी. लंबे पुष्पदंड पर लगते हैं। फल बैंगनी और लाल मिश्रित रंग के गुच्छे के रूप में लगते हैं। प्रत्येक फल में 3 बीज होते हैं, जो कड़े आवरण से ढके होते हैं। एरंड के पौधे के तने, पत्तों और टहनियों के ऊपर धूल जैसा आवरण रहता है, जो हाथ लगाने पर चिपक जाता है। ये दो प्रकार का होते हैं लाल रंग के तने और पत्ते वाले एरंड को लाल और सफेद रंग के होने पर सफेद एरंड कहते हैं। विभिन्न भाषाओं में नाम : संस्कृत एरंड, गन्धर्वहस्त, वर्धमान, व्याघ्रपुच्छ, उत्तानपत्रक हिंदी. अंडी, अरण्ड, एरंड मराठी एरंडी गुजराती एरंडो दिवेलेगों बंगाली भेरेंडा, शादारेंडी मलयालम अमन वक्कु फारसी . वेद अंजीर अरबी खिर्वअ अंग्रेजी कैस्टर प्लांट लैटिन रिसिनस कोम्युनिट्स स्वाद : एरंड खाने में तीखा, बेस्वाद होता है। स्वरूप : एरंड दो प्रकार का होता है पहला सफेद और दूसरा लाल। इसकी दो जातियां और भी होती हैं। एक मल एरंड और दूसरी वर्षा एरंड। वर्षा एरंड, बरसात के सीजन में उगता है। मल एरंड 15 वर्ष तक रह सकता है। वर्षा एरंड के बीज छोटे होते हैं, परन्तु उनमें मल एरंड से अधिक तेल निकलता है। एरंड का तेल पेट साफ करने वाला होता है, परन्तु अधिक तीव्र न होने के कारण बालकों को देने से कोई हानि नहीं होती है। पेड़ : एरंड का पेड़ 2.4 से 4.5 मीटर, पतला, लम्बा और चिकना होता है। फूल : इसका फूल एक लिंगी, लाल बैंगनी रंग के होते हैं। फल : एरंड के फल के ऊपर हरे रंग का आवरण होता है। प्रत्येक फल में तीन बीज होते हैं। बीज : इसके बीज सफेद चिकने होते हैं। स्वभाव : एरंड गर्म प्रकृति का होता है। हानिकारक : एरंड आमाशय को शिथिल करता है, गर्मी उत्पन्न करता है और उल्टी लाता है। इसके सेवन से जी घबराने लगता है। लाल एरंड के 20 बीजों की गिरी नशा पैदा करती है और ज्यादा खाने से बहुत उल्टी होता है एवं घबराहट या बेहोशी तक भी हो सकती है। यह आमाशय के लिए अहितकर होता है। तुलना : इसकी तुलना जमालघोटा से की जा सकती है। दोषों को दूर करने वाला : कतीरा और मस्तगी एरंड के गुणों को सुरक्षित रखकर इसके दोषों को दूर करता है। नोट : लाल एरंड का तेल 5 से 10 ग्राम की मात्रा में गर्म दूध के साथ लेने से योनिदर्द, वायुगोला, वातरक्त, हृदय रोग, जीर्णज्वर (पुराना बुखार), कमर के दर्द, पीठ और कब्ज के दर्द को मिटाता है। यह दिमाग, रुचि, आरोग्यता, स्मृति (याददास्त), बल और आयु को बढ़ाता है और हृदय को बलवान करता है। गुण : एरंड पुराने मल को निकालकर पेट को हल्का करती है। यह ठंडी प्रकृति वालों के लिए अच्छा है, अर्द्धांग वात, गृध्रसी झानक बाई (साइटिका के कारण उत्पन्न बाय का दर्द), जलोदर (पेट में पानी की अधिकता) तथा समस्त वायुरोगों की नाशक है इसके पत्ते, जड़, बीज और तेल सभी औषधि के रूप में इस्तेमाल किए जाते है। यहां तक कि ज्योतिषी और तांत्रिक भी ग्रहों के दुष्प्रभावों को दूर करने के लिए एरंड का प्रयोग करते हैं। सफेद एरंड : सफेद एरंड, बुखार, कफ, पेट दर्द, सूजन, बदन दर्द, कमर दर्द, सिर दर्द, मोटापा, प्रमेह और अंडवृद्धि का नाश करता है। लाल एरंड : पेट के कीड़े, बवासीर, रक्तदोष (रक्तविकार), भूख कम लगना, और पीलिया रोग का नाश करता है। इसके अन्य गुण सफेद एरंड के जैसे हैं। एरंड के पत्ते : एरंड के पत्ते वात पित्त को बढ़ाते हैं और मूत्रकृच्छ्र (पेशाब करने में कठिनाई होना), वायु, कफ और कीड़ों का नाश करते हैं। एरंड के अंकुर : एरंड के अंकुर फोड़े, पेट के दर्द, खांसी, पेट के कीड़े आदि रोगों का नाश करते हैं। एरंड के फूल : एरंड के फूल ठंड से उत्पन्न रोग जैसे खांसी, जुकाम और बलगम तथा पेट दर्द संबधी बीमारी का नाश करता है। एरंड के बीजों का गूदा : एरंड के बीजों का गूदा बदन दर्द, पेट दर्द, फोड़े-फुंसी, भूख कम लगना तथा यकृत सम्बंधी बीमारी का नाश करता है। एरंड का तेल : पेट की बीमारी, फोड़े-फुन्सी, सर्दी से होने वाले रोग, सूजन, कमर, पीठ, पेट और गुदा के दर्द का नाश करता है। हानिकारक प्रभाव : राइसिन नामक विषैला तत्त्व होने के कारण एरंड के 40-50 दाने खाने से या 10 ग्राम बीजों के छिलकों का चूर्ण खाने से उल्टी होकर व्यक्ति की मौत भी हो सकती है। मात्रा : बीज 2 से 6 दाने। तेल 5 से 15 मिलीलीटर। पत्तों का चूर्ण 3 से 4 ग्राम। जड़ की पिसी लुगदी 10 से 20 ग्राम । जड़ का चूर्ण 1 से 3 ग्राम। विभिन्न रोगों में उपयोगी : 1. चर्म (त्वचा) के रोग : • एरंण्ड की जड़ 20 ग्राम को 400 मिलीलीटर पानी में पकायें। जब यह 100 मिलीलीटर शेष बचे तो इसे पिलाने से चर्म रोगों में लाभ होता है। • एरंड के तेल की मालिश करते रहने से शरीर के किसी भी अंग की त्वचा फटने का कष्ट दूर होता है। 2. सिर पर बाल उगाने के लिए : ऐसे शिशु जिनके सिर पर बाल नहीं उगते हो या बहुत कम हो या ऐसे पुरुष-स्त्री जिनकी पलकों व भौंहों पर बहुत कम बाल हों तो उन्हें एरंड के तेल की मालिश नियमित रूप से सोते समय करना चाहिए। इससे कुछ ही हफ्तों में सुंदर, घने, लंबे, काले बाल पैदा हो जाएंगे। 3. सिर दर्द : एरंड के तेल की मालिश सिर में करने से सिर दर्द की पीड़ा दूर होती है। एरंड की जड़ को पानी में पीसकर माथे पर लगाने से भी सिर दर्द में राहत मिलती है। 4. जलने पर : एरंड का तेल थोड़े-से चूने में फेंटकर आग से जले घावों पर लगाने से वे शीघ्र भर जाते हैं। एरंड के पत्तों के रस में बराबर की मात्रा में सरसों का तेल फेंटकर लगाने से भी यही लाभ मिलता है। 5. पायरिया : एरंड के तेल में कपूर का चूर्ण मिलाकर दिन में 2 बार नियमित रूप से मसूढ़ों की मालिश करते रहने से पायरिया रोग में आराम मिलता है। 6. शिश्न (लिंग) की शक्ति बढ़ाने के लिए : मीठे तेल में एरंड के पीसे बीजों का चूर्ण औटाकर शिश्न (लिंग) पर नियमित रूप से मालिश करते रहने से उसकी शक्ति बढ़ती है। 7. मोटापा दूर करना : • एरंड की जड़ का काढ़ा छानकर एक-एक चम्मच की मात्रा में शहद के साथ दिन में तीन बार सेवन करें। • एरंड के पत्ते, लाल चंदन, सहजन के पत्ते, निर्गुण्डी को बराबर मात्रा में लेकर पीस लें, बाद में 2 कलियां लहसुन की डालकर पकाकर काढ़ा बनाकर रखा रहने दें इसमें से जो भाप निकले उसकी उस भाप से गला सेंकने और काढ़े से कुल्ला करना चाहिए। • एरंड के पत्तों का खार (क्षार) को हींग डालकर पीये और ऊपर से भात (चावल) खायें। इससे लाभ हो जाता है। • अरण्ड के पत्तों की सब्जी बनाकर खाने से मोटापा दूर हो जाता है। 8. स्तनों में दूध वृद्धि हेतु : • एरंड के पत्तों का रस दो चम्मच की मात्रा में दिन में तीन बार कुछ दिनों तक नियमित पिलाएं। इससे स्तनों में दूध की वृद्धि होती है। • अरण्ड (एरंड) पाक को 10 से लेकर 20 ग्राम की मात्रा में गुनगुने दूध के साथ प्रतिदिन सुबह और शाम को पिलाने से प्रसूता यानी बच्चे को जन्म देने वाली माता के स्तनों में दूध में वृद्धि होती है। 9. बालकों के पेट के कृमि (कीड़े) : • एरंड का तेल गर्म पानी के साथ देना चाहिए अथवा एरंड का रस शहद में मिलाकर बच्चों को पिलाना चाहिए। इससे बच्चों के पेट के कीडे़ नष्ट हो जाते हैं। • एरंड के पत्तों का रस नित्य 2-3 बार बच्चे की गुदा में लगाने से बच्चों के चुनने (पेट के कीड़े) मर जाते हैं। 10. बिच्छू के विष पर : एरंड के पत्तों का रस, शरीर के जिस भाग की ओर दंश न हुआ हो, उस ओर के कान में डालें और बहुत देर तक कान को ज्यों का त्यों रहने दें। इस प्रकार दो-तीन बार डालने से बिच्छू का विष उतर जाता है। 11. नींद कम आना : एरंड के अंकुर बारीक पीसकर उसमें थोड़ा सा दूध मिलाकर लेप बना लें। इस लेप को कपाल (सिर) तथा कान के पास लेप करने से नींद का कम आना दूर हो जाता है। 12. पीनस रोग- एरण्ड के तेल को तपाकर रख लें और जिस ओर नाक में पीनस हो गया हो उस ओर के नथुने से एरण्ड के तेल को दिन में कई बार सूंघने से पीनस नष्ट हो जाती है। • एरंड की जड़ और सोंठ को घिसकर योनि पर लेप करें। इससे योनि दर्द ठीक हो जाता है। • एरंड तेल में रूई का फोहा भिगोकर योनि में धारण करने से योनि का दर्द मिट जाता है। 13. पीठ के दर्द में : एरंड के तेल को गाय के पेशाब में मिलाकर देना चाहिए। इससे पीठ, कमर, कन्धे, पेट और पैरों का शूल (दर्द) नष्ट हो जाता है।
यूरिक एसिड को नियंत्रित करने के उपाय आपको हर समय उंगलियों की हड्डियों में हल्का-हल्का दर्द रहता है? इसका मतलब है कि आपके शरीर में यूरिक एसिड की मात्रा बढ़ रही है। शरीर में यूरिक एसिड, प्यूरिन का एक ब्रेकडाउन प्रोडक्ट है। सामान्य कोशिकाओं के टूटने और खाए जाने वाले खाद्य पदार्थो से शरीर में प्यूरिन मौजूद रहता है। 1. एक दिन में कम से कम 6-7 लीटर पानी पिएं। 2.तरबूज और दलिया जैसे पदार्थ भी इसमें सहायक होते है। 3.हाई यूरिक एसिड की शिकायत होने पर चेरी का सेवन फायदेमंद होता है। इसके सेवन से ब्लॉकेज खुल जाते है और यूरिक एसिड भी कम हो जाता है। 4.ब्रोकली में फाइबर भरपूर मात्रा में होते है। इसमें विटामिन सी भी काफी अच्छी मात्रा में पाया जाता है। इसे फूड चार्ट में अवश्य शामिल करें। इसके सेवन से शरीर यूरिक एसिड की मात्रा कम हो जाती है। नोट : अगर शरीर में यूरिक एसिड हाई हो तो कभी भी बेकरी प्रोडक्ट नहीं खाने चाहिये। इनमें सेच्युरेटेड फैट होता है जिससे शरीर में हाई यूरिक एसिड हो जाता है। केक, पैनकेक, पेस्ट्री आदि खाने से बचें। हाई यूरिक एसिड की शिकायत होने पर मछली और मीट को न खाएं। कुछ विशेष प्रकार की मछली जैसे- सारडिनेस और मैकीरिल को कतई न खाएं। शरीर में एल्कोहल पहुंचने पर हाई यूरिक एसिड हो जाता है। अगर लगातार एल्कोहल का सेवन किया जाएं, तो शरीर में यूरिक एसिड की मात्रा बढ़ जाती है और कई बार गाउट अटैक आ जाता है। यूरिक एसिड बढ़ने की शिकायत होने पर डिब्बा बंद फूड का सेवन न करें।
थायरायड को कम करे REDUCE THYROID आजकल एक गंभीर समस्या बहुतायात देखने को मिल रही है थायराइड - थायरायड गर्दन के सामने और स्वर तंत्र के दोनों तरफ होती है थायरायड में अचानक वृधि हो जाना या फिर अचानक कम हो जाना है। thyroid एक स्वस्थ्य मनुष्य में थायरायड ग्रंथि का भार 25 से 50 ग्राम तक होता है यह ‘ थाइराक्सिन ‘ नामक हार्मोन का उत्पादन करती है - पैराथायरायड ग्रंथियां- थायरायड ग्रंथि के ऊपर एवं मध्य भाग की ओर एक-एक जोड़े यानी कि कुल चार होती हैं यह ” पैराथारमोन ” हार्मोन का उत्पादन करती हैं। तनावग्रस्त जीवन शैली से थायराइड रोग बढ़ रहा है आराम परस्त जीवन से हाइपो थायराइड और तनाव से हाइपर थायराइड के रोग होने की आशंका आधुनिक चिकित्सक निदान में करने लगे हैं आधुनिक जीवन में व्यक्ति अनेक चिंताओं से ग्रसित है जैसे परिवार की चिंताएँतथा आपसी स्त्री-पुरुषों के संबंध- आत्मसम्मान को बनाए रखना- लोग क्या कहेंगे आदि अनेक चिंताओं के विषय हैं। उपचार- 1- थायरायड की समस्या वाले लोगों को दही और दूध का इस्तेमाल अधिक से अधिक करना चाहिए- दूध और दही में मौजूद कैल्शियम, मिनरल्स और विटामिन्स थाइरोइड से ग्रसित पुरूषों को स्वस्थ बनाए रखने का काम करते हैं। 2- थायरायड ग्रन्थि को बढ़ने से रोकने के लिए आप गेहूं के ज्वार का सेवन कर सकते है गेहूं का ज्वार आयुर्वेद में थायरायड की समस्या को दूर करने का बेहतर और सरल प्राकृतिक उपाय है इसके अलावा यह साइनस, उच्च रक्तचाप और खून की कमी जैसी समस्याओं को रोकने में भी प्रभावी रूप से काम करता है। 3- थायरायड की परेशानी में जितना हो सके फलों और सब्जियों का इस्तेमाल करना चाहिए- क्युकि फल और सब्जियों में एंटीआक्सिडेंटस होता है जो थायरायड को कभी भी बढ़ने नहीं देता है- सब्जियों में टमाटर, हरी मिर्च आदि का सेवन करें- 4- थायरायड के मरीजों को थकान बड़ी जल्दी लगने लगती है और वे जल्दी ही थक जाते हैं एैसे में मुलेठी का सेवन करना बेहद फायदेमंद होता है चूँकि मुलेठी में मौजूद तत्व थायरायड ग्रन्थि को संतुलित बनाते हैं और थकान को उर्जा में बदल देते हैं- मुलेठी थायरायड में कैंसर को बढ़ने से भी रोकता है। 5- योग के जरिए भी थायरायड की समस्या से निजात पाया जा सकता है इसलिए आपको भुजंगासन, ध्यान लगाना, नाड़ीशोधन, मत्स्यासन, सर्वांगासन और बृहमद्रासन आदि करना चाहिए। 6- अदरक में मौजूद गुण जैसे पोटेशियम, मैग्नीश्यिम आदि थायरायड की समस्या से निजात दिलवाते हैं- अदरक में एंटी-इंफलेमेटरी गुण थायरायड को बढ़ने से रोकता है और उसकी कार्यप्रणाली में सुधार लाता है।
आंतों के कीड़ों के लिए घरेलू उपचार पेट में कीड़े पड़ जायें तो यह बहुत ही दुखदायी होता है। यह समस्या सबसे अधिक बच्चों में होती है लेकिन बड़ों की आंतों में भी कीड़े हो सकते हैं। ये कृमि लगभग 20 प्रकार के होते हैं जो अंतड़ियों में घाव पैदा कर सकते हैं। इसके कारण रोगी को बेचैनी, पेट में गैस बनना, दिल की धड़कन असामान्य होना, बदहजमी, पेट में दर्द, बुखार जैसी कई प्रकार की समस्याएँ होती हैं। इसके कारण रोगी को खाने में रुचि नहीं होती और उसे चक्कर भी आते हैं। गंदगी के कारण ही पेट में कीड़े होते हैं। अशुद्ध और खुला भोजन करने वालों को यह समस्या अधिक होती है। घरेलू उपचार के जरिये इस समस्या का इलाज किया जा सकता है। अजवायन अजवायन का सेवन करने से पेट के कीड़े मर जाते हैं। इसके लिए अजवायन का चूर्ण आधा ग्राम और उतना ही गुड़ में गोली बनाकर दिन में तीन बार इसका सेवन मरीज को करायें। अजवायन में एंटी-बैक्टीरियल तत्व पाये जाते हैं जो कीडों को समाप्त कर देते हैं। अजवायन का सेवन सेव 2-3 दिन करने पर कीड़े पेट से पूरी तरह से समाप्त हो जायेंगे। काला नमक चुटकी भर काला नमक और आधा ग्राम अजवायन चूर्ण मिला लीजिए, इस चूर्ण को रात के समय रोजाना गर्म पानी से लेने से पेट के कीड़े निकल जाते हैं। अगर बड़ों को यह समस्या है तो काला नमक और अजवायन दोनों को बराबर मात्रा में लीजिए। सुबह-शाम इसका सेवन करने से पेट के कीड़े दूर हो जायेंगे। अनार के छिलके बच्चों और बड़ों दोनों में पेट के कीड़े हो जायें तो यह बहुत ही फायदेमंद उपचार है। अनार के छिलकों को सुखाकर इसका चूर्ण बना लीजिए। यह चूर्ण दिन में तीन बार एक-एक चम्मच लीजिए। कुछ दिनों तक इसका सेवन करने से पेट के कीड़े पूरी तरह से नष्ट हो जाते हैं।
नीम के पत्ते नीम के पत्तों का सेवन करने से पेट की हर तरह की समस्या दूर हो जाती है। नीम के पत्ते एंटी-बॉयटिक होते हैं जो पेट के कीड़ों को नष्ट कर देते हैं। नीम के पत्तों को पीसकर उसमें शहद मिलकार पीने से जल्दी फायदा होता है और कीड़े नष्ट हो जाते हैं। सुबह के वक्त इनका सेवन करना अधिक फायदेमंद होता है। टमाटर के जरिये टमाटर का प्रयोग खाने का स्वाद बढ़ाने के साथ-साथ पेट के कीड़ों को नष्ट करने के लिए कर सकते हैं। टमाटर को काटकर, उसमें सेंधा नमक और कालीमिर्च का चूर्ण मिलाकर इसका सेवन कीजिए। इस चूर्ण का सेवन करने के बाद पेट के कीड़े मर कर गुदामार्ग से बाहर निकल जाते हैं। लहसुन की चटनी पेट की समस्या दूर करने के साथ आंतों को पूरी तरह से साफ करने के लिए लहसुन का प्रयोग करें। अगर बच्चे या बड़े किसी को भी पेट में कीड़े हैं तो उसे लहसुन की चटनी खिलायें। लहसुन की चटनी बनाकर उसमें थोड़ा सा सेंधा नमक मिलाकर सुबह-शाम खाने से पेट के कीड़े नष्ट होते हैं। तुलसी के पत्ते तुलसी भी एंटी-बैक्टीरियल होती है, किसी भी प्रकार के संक्रमण के उपचार के लिए इसका प्रयोग कर सकते हैं। पेट में कीड़े होने पर तुलसी के पत्तों का एक चम्मच रस दिन में दो बार पीने से पेट के कीड़े मरकर मल के साथ बाहर निकल जाते हैं। इसका सेवन करने से आंत पूरी तरह से साफ हो जाती है और पेट में गैस और कब्ज़ की भी शिकायत नहीं होती है। कच्चे आम की गुठली बच्चों या बड़ों की आंत में कीड़े पड़ गये हों तो कच्चे आम की गुठली का सेवन करने से कीड़े मल के रास्ते बाहर निकल जाते हैं। इसके लिए कच्चे आम की गुठली का चूर्ण दही या पानी के साथ सुबह-शाम सेवन करें। इसके नियमित सेवन से कुछ दिनों में ही आंत के कीड़े बाहर निकल जायेंगे।
अदरक वाली चाय के लाभ और साइड इफ़ेक्ट? ठंड के मौसम में अदरक वाली चाय का सेवन आपको बड़ी राहत देता है। अगर इसका नियमित सेवन किया जाए तो यह आपको कई रोगों से निजात दिलाती है। अदरक की चाय मसालेदार पेय पदार्थ है, जो पूरे एशिया में दिन भर पी जाती है। अदरक को औषधि के रूप में माना जाता है। अदरक के जड़ की चाय जलन, पाचन, जुकाम आदि रोगों में राहत दिलाती है। अदरक के जड़ की चाय पोटैशियम और मैग्नीशियम, विटामिन बी6 और विटामिन सी से भरपूर होती है। अदरक वाली चाय के लाभ: 1. पेट के लिए लाभकारी अदरक की चाय पाचन को बेहतर बनाने के साथ फ़ूड के अवशोषण को बढ़ाती है। साथ ही ज़्यादा खाना के बाद ब्लोंटिग की समस्या से छुटकारा दिलाती है। 2. जोड़ों की जलन में लाभ अदरक की चाय पीने से जोड़ों के जलन को सोखने में भी मदद मिलती है, क्योंकि अदरक में जलन को कम करने का गुण पाया जाता है। जिससे यह मसल और जोड़ों की समस्या का एक बेहतरीन घरेलू उपचार बन जाती है। 3. उल्टी या मतली में आराम कहीं सफ़र करने जा रहे हैं तो सफ़र में जाने से पहले एक कप अदरक की चाय ज़रूर पी लें ताकि मतली या उल्टी न लगे। 4. इम्यूनिटी बढ़ाये अदरक में बड़ी मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं, जिससे आपकी रोगों से लड़ने की क्षमता बढ़ जाएगी। 5. तनाव मुक्ति अदरक की चाय में मन को शांत करने का गुण पाया जाता है, इसलिए अदरक की चाय का सेवन करें और स्वयं को तनाव मुक्त रखें। 6. स्वस्थ रक्त संचार अदरक की चाय में पाए जाने वाले विटामिन, मिनरल्स और एमीनो एसिड ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाने में मदद करते हैं। अदरक अर्टरी पर फ़ैट को जमा होने से रोकती है। जिस कारण से हार्ट अटैक और स्ट्रोक का ख़तरा टल जाता है। 7. मासिक धर्म में आराम अगर शहद के साथ अदरक वाली चाय का सेवन करें, तो मासिक धर्म की परेशानी या दर्द में आराम मिलता है। 8. श्वास की समस्या में लाभ ठंड के मौसम में अक्सर लोगों को जुकाम हो जाता है या नाक बंद हो जाती है। ऐसे में यदि आप गरमागरम अदरक की चाय का सेवन करें तो आपको सांस लेने में भी आराम मिलेगा और जुकाम भी ठीक हो जाएगा। 9. अस्थमा में लाभ अस्थमा के मरीज़ों के लिए अदरक वाली चाय लाभकारी होती है। अदरक फ़्लेम phlegm हटाकर फेफड़ों को फ़ैलाती हैं, जिससे साँस न ले पाने की समस्या में बचाव होता है। यह एलर्जी और छींकों के लिए भी लाभदायक है। 10. फ़र्टिलिटी अदरक में एफ़रैडिज़ीऐक aphrodisiac गुण होते हैं। इसलिए मर्द में शुक्राणुओं को स्वस्थ रखता है और फ़र्टिलिटी को बढ़ाता है। अत: अगर आपको ऐसी कोई परेशानी हो तो नियमित अदरक का सेवन करें। यह मर्द में शीघ्र पतन की समस्या को सही करती है। 11. कैंसर में लाभकारी शोध से यह साबित हो चुका है कि यह कैंसर से रक्षा करती है। ख़ासकर ओवरी के कैंसर में यह कैंसर सेल्स को बड़े पैमाने पर ख़त्म कर सकती है। 12. वज़न घटाने में सहायक अदरक वाली चाय वज़न घटाने और पॉज़िटिव लाइफ़ जीने में बहुत सहायक हो सकती है। बिना आपके शरीर के सामान्य भार को नुक़सान पहुँचाये यह अतिरिक्त वसा को बर्न कर सकती है। इसे पीने के बाद पेट भरा भरा लगता है, जिससे आपको अतिरिक्त कैलोरी लेने की इच्छा नहीं होती है और आपका वज़न कम हो जाता है। अदरक वाली चाय के साइड इफ़ेक्ट 1. अनिद्रा और अस्थिरता की समस्या बढ़ा सकती है। 2. पित्त की पथरी वाले मरीज़ इसका सेवन न करें। 3. गर्भधारण के बाद अदरक की चाय न पिएँ। 4. बिना कुछ खाये अदरक वाली चाय पीने से आपका पेट ख़राब हो सकता है।
5. ज़्यादा अदरक वाली चाय पीने से डायरिया, पेट में जलन और सीने में जलन हो सकती है।