Wednesday 21 January 2015

अपने दांतों को जानिए














अपने दांतों को जानिए

हरेक दांत के दो मुख्य भाग होते हैं- शीर्ष और जड़. शीर्ष दांत का वह भाग होता है, जिसे आप देख सकते हैं, और जड़ आपके मसूड़ों के नीचे छिपी होती है। यह दांत की कुल लंबाई का करीब दो तिहाई हिस्सा होती है। वयस्कों में ज्ञान दंत समेत 32 स्थायी दांत होते हैं।

प्रत्येक दांत का निर्माण चार प्रकार के ऊतकों से होता है

1.एनामेल या आवरण स्थायी, उजला आवरण होता है। एनामेल दांत को चबाने के दौरान होनेवाली टूट-फूट से बचाता है।

2.डेंटिन आपके दांत के आवरण की सुरक्षा करता है। यह पीले रंग का हड्डी जैसा पदार्थ होता है, जो एनामेल से मुलायम होता है और इसमें कुछ स्नायु तंत्र भी होते हैं, जो आपको आपके दांत के भीतर कुछ होनेवाली गड़बड़ के बारे में बताते हैं।

3.पल्प या गूदा दांत का केंद्र होता है। यह नरम ऊतक होता है, जो रक्त और द्रव वाहिकाओं तथा स्नायु तंत्र से भरा होता है। पल्प के माध्यम से ही दांत पोषण ग्रहण करता है और आपके दिमाग को संकेत भेजता है।

4.सीमेंटम या जड़यौगिक से दांत की जड़ का अधिकांश हिस्सा ढंका होता है। यह आपके जबड़ों की हड्डियों से दांतों को जोड़े रखने में मदद करता है। सीमेंटम और जबड़े की हड्डी के बीच एक गद्देदार परत होती है, जिसे पीरियोडोंटल लिगामेंट कहा जाता है। यह दोनों को जोड़ने में मदद करती है।

मुंह का स्वास्थ्य

मुंह और दांतों का स्वास्थ्य समाज में सभी के लिये सबसे महत्वपूर्ण है.ऐसी सभी तरह की संभावनाएं हैं कि स्वस्थ मुंह से जीवन स्वस्थ होता है।निम्नलिखित सलाह आपको मुंह के बढ़िया स्वास्थ्य की ओर अग्रसर करेगी।

आपके मसूड़े(जिंजिवे) आपके दांतों को घेरे रख कर उनको अपनी जगह पर जमाए रखते हैं।अपने मसूड़ों को स्वस्थ रखने के लिये मुख की सफाई अच्छी तरह करें—अपने दांतों को रोज दो बार ब्रश करें। दांतों को रोज एक बार फ्लॉस करें और नियमित रूप से अपने डेंटिस्ट के पास जाएं। यदि आपके मसूड़े लाल होकर फूल गए हों या उनसे खून निकलता हो,तो ऐसा संक्रमण के कारण हो सकता है। इसे मसूड़ों का शोथ(जिंजीवाइटिस) कहते हैं, इसके तुरंत उपचार से मुख वापस स्वस्थ हो सकता है।इलाज न करने पर मसूड़ों का शोथ गंभीर रोग में विकसित हो सकता है(पेरीओडाँटाइटिस) और आप अपने दांतों को खो सकते हैं।

मौखिक स्वास्थ्य के लिये ब्रश करना

मौखिक स्वास्थ्य साफ दांतों से शुरू होता है ,ब्रश करने की इन मूल बातों को ध्यान में रखें।

अपने दांतों को कम से कम दो बार ब्रश करें.जब आप ब्रश करें तो जल्दबाजी न करें ,अचछी सफाई के लिये इसे पर्याप्त समय दें।

अच्छे टूथपेस्ट और टूथब्रश का प्रयोग करें फ्लोराइड टूथपेस्ट और मुलायम ब्रिस्टल वाले टूथब्रश का प्रयोग करें।

अच्छी तकनीक का इस्तेमाल करें अपने टूथब्रश को अपने दांतों से हल्के कोण पर पकड़ें और आगे और पीछे करते हुए ब्रश करें.अपने दांतों की भीतरी और चबाने वाली सतहों और जीभ पर ब्रश करना न भूलें ,तेजी से न रगड़े,वरना आपके मसूड़े क्षोभित हो सकते हैं।

टूथब्रश बदलना हर तीन से चार महीनों में नया टूथब्रश खरीदें –या उससे भी पहले यदि ब्रिस्टल फैल गए हों।

मुख के स्वास्थ्य के लिये सामान्य नुस्खे

•हमेशा नरम ब्रिस्टल वाले टूथब्रश का प्रयोग करें।

•भोजन के बाद कुल्ला करके सुंह को साफ कर लें।

•दांतों के बीच फ्लॉस करके फंसे हुए खाद्य कणों को निकाल दें।

•मुंह सूखने पर लार का प्रवाह बढ़ाने के लिये शक्कर रहित चुइंग गम खाएं।

•लार का प्रवाह बढ़ाने और चबाने की पेशियों की कसरत के लिये कड़े नट खाएं।

•शिशुओं को टूथपेस्ट मटर के आकार जितनी मात्रा में दें और उन्हें ब्रश करने के बाद पेस्ट को थूक देने के लिये प्रोत्साहित करें।

•हमेशा बिना अल्कोहल वाले माउथवाश का प्रयोग करें क्यौंकि अल्कोहल युक्त माउथवाश से जीरास्टोमिया(शुष्क मुख) हो जाता है।

•जिव्हा को साफ रखने के लिये टंग क्लीनर का प्रयोग करें.जिवाणू से संक्रमित जिव्हा से होने वाले रोगों का एक उदाहरण है, हैलिटोसिस.जिव्हा को टूथब्रश से भी साफ किया जा सकता है।

दांतों के गिर जाने पर डेंटल इम्प्लांट लगाए जा सकते हैं। इनसे क्राउनों या ब्रिजों को सहारा मिलेगा जिससे चेहरा अच्छा दिखेगा और गिरे हुए दांतों के रिक्त स्थानों की समस्या का यह एक हल है।

•जिनके दांत घिस गए हों,वे विभिन्न तरह के एनहैंसमेंटों के बारे में सोच सकते हैं। क्राउनों से दांत को मूल आकार में लौटाने का प्रयत्न किया जा सकता है और इम्प्लांटों के लिये अनेक विकल्प उपलब्ध हैं।

अंत में, धूम्रपान मुख के स्वास्थ्य के लिये हानिकारक है,और दांतों को बदरंग बनाने के अलावा,धूम्रपान अन्य कई खतरनाक स्वास्थ्य समस्याओं का स्रोत हो सकता है।

दांत के दर्द का प्राकृतिक उपचार

हम में से कई लोग कभी-कभी अचानक दांत के दर्द से पीड़ित हो जाते हैं, और यह जानना बहुत जरूरी है कि इसे सुरक्षित प्राकृतिक तरीके से कैसे कम किया जा सकता है। जड़ी-बूटी से बने कई प्रकार के प्राकृतिक दर्दनिवारक हैं, जैसे सरसों, काली मिर्च या लहसुन, जिनका दांत के दर्द के उपचार में प्रभावी तरीके से उपयोग किया जा सकता है। आपको दांत के दर्द में क्या करना चाहिए और इससे छुटकारा पाने के लिए क्या प्राकृतिक उपाय हैं, इसके बारे में नीचे सलाह मिलेंगी

•दांत के दर्द में लौंग का तेल प्राकृतिक जड़ी-बूटी का सबसे प्रभावी उपचार माना जाता है। लौंग के तेल को काली मिर्च के पाउडर में मिलाएं और उसे दर्द वाले दांत पर लगाएं।

•दांत के दर्द से छुटकारे का एक अन्य प्राकृतिक विकल्प सरसों का तेल है। एक चुटकी नमक के साथ मिला कर इसे मसूढ़े के प्रभावित हिस्से पर मालिश करनी चाहिए।

•नींबू के रस की कई बूंदें दांत के दर्द को दूर सकती हैं।

•मसूढ़े या दांत के प्रभावित हिस्से पर प्याज के ताजा कटे हुए टुकड़े रखने से दांतों के दर्द को प्रभावी ढंग से दूर किया जाना संभव है।

•आप दांत के दर्द से छुटकारा पाने के लिए घर में ही जड़ी-बूटी युक्त माउथ वाश तैयार करते हैं। इसके लिए कैलेंडुला (कैलेंडुला आफिसिनालिस), माइर (काम्मीफोरा माइरा) और सेग (सैल्विया आफिसिनालिस) का उपयोग किया जा सकता है। अन्य उपयोगी औषधीय जड़ी-बूटी में बासिल, मारजोरम और आसाफोटिडा शामिल हैं।

•दांत के दर्द को कम करने के लिए बाहर से बर्फ के टुकड़े से सेंकना भी काम आता है।

•यदि आप अचानक दांत के दर्द से प्रभावित हैं, तो अत्यधिक गर्म, ठंडी और मीठी चीजों से परहेज करें, क्योंकि इनसे आपके दांत का दर्द बढ़ सकता है।

•आप अपने खान-पान के प्रति सतर्कता बरतें, सब्जियां, फल, अनाज और अन्य चीजें अधिक मात्रा में लें। जंक फूड की उपेक्षा करें।

दांतों की स्केलिंग

स्केलिंग क्या है?

दांतों का स्वास्थ्य आपके सामान्य स्वास्थ्य का महत्वपूर्ण भाग है।आपकी उम्र चाहे जो भी हो,आप के दांत स्वस्थ होने चाहिये और ऐसा संभव है। दांतों की सही देखभाल आपके दांतों को जीवन भर स्वस्थ रखने में मदद कर सकती है। स्केलिंग एक ऐसी विधि है जो आपके मसूड़ों को स्वस्थ और मजबूत करती है। इस विधि का प्रयोग दांतों की सतह पर से संक्रमित जमावटें जैसे प्लाक,कैलकुलस और धब्बे हटाने के लिये किया जाता है। ऐसे संग्रह,यदि स्केलिंग द्वारा न निकाले जाएं तो संक्रमण और मसूड़ों को ढीला बना सकते हैं,जिससे अंततः पायरिया हो सकता है और दांत गिर सकते हैं। स्केलिंग एक सुरक्षित और नियमित प्रक्रिया है और दांतों की सतह को किसी तरह से हानि नहीं पहुंचाती। यह काम किसी अनुभवी दंत-चिकित्सक द्वारा किया जाना चाहिये।

प्लाक क्या है?

दांत का प्लाक जिवाणू और भोज्य-पदार्थों की एक नरम,चिपचिपी,रंगहीन पर्त होती है,जो दांतों पर लगातार बनती जाती है। इस पर्त में जिवाणू घर कर लेते हैं और तेजी से संख्या में बढ़ कर मसूड़ों में संक्रमण उत्पन्न करते हैं,जिससे अकसर मसूड़ों में दर्द और उनसे रक्तस्राव होने लगता है। यदि दांत के प्लाक को 10-14 घंटों के भीतर ब्रश करके न निकाला जाय तो इसका कैलकुलस या टार्टार में लवणीकरण हो जाता है। एक बार बननें के बाद टार्टार को ब्रश करके नहीं निकाला जा सकता है और इसे डेंटिस्ट ही स्केलिंग करके निकाल सकता है।

स्केलिंग क्यौं की जाती है?

ध्यानपूर्वक ब्रश और फ्लॉक करने के बावजूद उत्पन्न कैलकुलस या टार्टार को निकालने के लिये डेंटिस्ट द्वारा नियमित दांतों की सफाई महत्वपूर्ण है। पेशेवर सफाई में स्केलिंग और पॉलिश शामिल होती है। स्केलिंग दांतों की सतह पर से संक्रमित संग्रहों-टार्टार या कैलकुलस-निकालने का एक सामान्य बिना शल्य क्रिया वाला उपचार है। इन संग्रहों को न निकालने से पेरिओडाँटल रोग हो सकता है। पेरिओडाँटल रोग में,दांत और मसूड़े के बीच की खाली जगह गहरी होने लगती है। इससे अवायवीय जीवाणू को पलने के लिये अच्छा पर्यावरण मिलता है। जीवाणू तेजी से बढ़ने लगते हैं और मसूड़ों को और संक्रमित करके दांतों को सहारा देने वाली हड्डियों को घोलने लगते हैं। इससे दांत ढीले पड़ने लगते हैं, इस स्थिति में दांतों को बचाने के लिये इलाज अधिक विस्तृत और जटिल हो जाता है। दांतों के चारों ओर के ऊतकों को स्वस्थ बनाने के लिये मसूड़ों की शल्य क्रिया की आवश्यकता होती है।

स्केलिंग कितनी बार करनी चाहिये?

दांतों पर प्लाक का बनना एक लगातार होने वाली प्रक्रिया है। यदि इसे ब्रश करके न निकाला जाय तो 10-14 घंटों के भीतर इसका टार्टार में लवणीकरण होने लगता है। ऐसे लोगों को हर 6 महीने में एक बार स्केलिंग की जरूरत पड़ती है। हर 6 महीने पर दांतों की नियमित जांच करवाना एक अच्छा नियम है। आपका डेंटिस्ट आपको सलाह दे सकेगा कि आपको स्केलिंग की जरूरत है या नहीं, वह आपको स्वस्थ दांतों के लिये गर पर की जाने वाली सही देखभाल के बारे में भी बताएगा। इस बात पर फिर से जोर दिया जाना चाहिये कि स्केलिंग दांतों को कमजोर नहीं करती है,लेकिन मसूड़ों के उन रोगों की रोकथाम करती है,जिनके कारण मसूड़ों से रक्तस्राव होता है और जिन्हें यदि रोका न जाए तो मसूड़ों की अधिक गंभीर और व्यापक समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।

इसके क्या फायदे हैं?

अच्छी मौखिक सफाई दांतों और मुंह के अनेक रोगों की रोकथाम करती है और उनके उपचार में महत्वपूर्ण है। अच्छी मौखिक सफाई से मुख स्वस्थ रहता है। इसके अलावा मुंह सारे शरीर का प्रवेशद्वार है। स्वस्थ मुख काफी हद तक स्वस्थ शरीर के लिये जिम्मेदार होता है।

गिंगिवाइटिस

गिंगिवाइटिस मसूढ़ों में होनेवाली एक सामान्य और साधारण बीमारी है, जिसके कारण आपके मसूढ़ों में सूजन होती है। चूंकि गिंगिवाइटिस एक बेहद साधारण बीमारी है, आप इस बारे में अनभिज्ञ हो सकते हैं कि आपमें इसके लक्षण हैं। लेकिन गिंगिवाइटिस को गंभीरता से लेना और इसकी चिकित्सा महत्वपूर्ण है, क्योंकि बाद में इसके कारण मसूढ़ों में अधिक गंभीर बीमारी हो सकती है।

यदि आपका मसूढ़ा सूज गया है और ब्रश करते समय इससे खून निकलता है, तो आपको गिंगिवाइटिस हो सकती है। गिंगिवाइटिस का सबसे सामान्य कारण मुंह की खराब साफ-सफाई है। मुंह की अच्छी तरह साफ-सफाई की आदतों, मसलन नियमित ब्रश और कुल्ला करने से गिंगिवाइटिस की रोकथाम में मदद मिलती है।

लक्षण

गिंगिवाइटिस के संकेत और लक्षण में शामिल हो सकते हैं-
1.सूजे हुए मसूढ़े
2.मुलायम मसूढ़े
3.कभी-कभी नरम मसूढ़े
4.ब्रश या कुल्ला करते समय मसूढ़े से आसानी से खून निकलना
5.सांस की दुर्गंध
6.आपके मसूढ़े का रंग स्वस्थ गुलाबी से हल्का लाल होना

चूंकि गिंगिवाइटिस कभी-कभी ही पीड़ादायक होता है, आपकी जानकारी के बिना भी आपको गिंगिवाइटिस हो सकता है। आप पहली बार समझ सकते हैं कि कुछ गड़बड़ है, जब आप अपने दांतों के ब्रश के रेशे को गुलाबी रंग में देखते हैं, यह एक संकेत है कि आपके मसूढ़े पर हल्का दबाव पड़ने से ही उसमें से खून निकलने लगता है।

दांतों के डाक्टर से कब परामर्श लें?

स्वस्थ मसूढ़े कड़े और हल्के गुलाबी होते हैं। यदि आपके मसूढ़े भुरभुरे, हल्के लाल हैं और इनसे आसानी से खून निकलता है, तो अपने डेंटिस्ट से मिलें। जितनी जल्दी आप सावधानी बरतेंगे, गिंगिवाइटिस से होनेवाले नुकसान को आप उतना ही कम कर सकेंगे और इससे होनेवाली अधिक समस्या से बचाव कर सकेंगे।

दाँतों का मटमैलापन (रंगायण)

कारण:
•दांतों को ठीक से साफ नहीं करना
•खाने की आदतें
•धूम्रपान
•पान मसाला चबाना
•मसूढ़ों का संक्रमण
•दांतों एवं जबड़े की हड्डियों का अस्थिभंग होना
•विटामिन सी और डी की कमी
•कैल्शियम का स्तर कम होना
•पीने के पानी में फ्लोरीन तत्व अधिक होना
•दांत कैरीज़ (क्षय) के साथ

सावधानियां
•दांतों को दिन में दो बार साफ करें-सुबह (जागने के तुरंत बाद) और रात (सोने से पहले )
•हमेशा खाना खाने के बाद ताजे पानी से मुंह साफ करें
•उचित टूथ पेस्ट का इस्तेमाल करें
•पोषक भोजन खायें
•धूम्रपान, चबाने वाले तम्बाकू उत्पादों से बचें

दंत चिकित्सक से नियमित रूप से परामर्श लें

सांस की दुर्गंध

यद्यपि सांस की दुर्गंध या हैलीटोसिस एक गंभीर समस्या बन सकती है तथापि अच्छी खबर यह है कि कुछ साधारण उपायों से सांस की दुर्गंध को रोका जा सकता है।

सांस की दुर्गंध उन बैक्टीरिया से पैदा होती है, जो मुंह में पैदा होते हैं और दुर्गंध पैदा करते हैं। नियमित रूप से ब्रश नहीं करने से मुंह और दांतों के बीच फंसा भोजन बैक्टीरिया पैदा करता है। इन बैक्टीरिया द्वारा उत्सर्जित सल्फर, यौगिक के कारण आपकी सांसों में दुर्गंध पैदा करता है।

लहसुन और प्याज जैसे कुछ खाद्य पदार्थां में तीखे तेल होते हैं। इनसे सांसों की दुर्गंध पैदा होती है, क्योंकि ये तेल आपके फेफड़ों में जाते हैं और मुंह से बाहर आते हैं। सांस की दुर्गंध का एक अन्य प्रमुख कारण धूम्रपान है।

सांस की दुर्गंध पर काबू पाने के बारे में अनेक धारणाएं प्रचलित हैं। यहां कुछ ऐसी बातों का जिक्र है, जिन्हें आपने सांस की दुर्गंध के बारे में सुना होगा, लेकिन ये सच नहीं हैं:

धारणा 1

मुँह साफ कर लेने से सांस की दुर्गंध दूर होती है।
मुँह साफ करने से सांस की दुर्गंध केवल अस्थायी रूप से दूर होती है। मुँह साफ करने के लिए किसी ऐसे एंटी सेप्टिक की तलाश करें, जो दुर्गंध पैदा करनेवाले कीटाणुओं को मारता हो, दांतों की सड़न कम करता हो और वह इंडियन डेंटल एसोसिएशन (आइडीए) द्वारा मान्यता प्राप्त हो।

धारणा 2

नियमित रूप से दांतों की सफाई करने से सांसों में दुर्गंध नहीं होती।
सच यह है कि अधिकांश लोग केवल 30 से 45 सेकेंड तक ही दांतों को ब्रश करते हैं, जो समुचित नहीं है। आपके दांतों की सभी सतहों को समुचित रूप से साफ करने के लिए आपको हर दिन दो बार कम से कम दो मिनट तक ब्रश करना चाहिए। अपनी जीभ की सफाई भी करना याद रखें, क्योंकि बैक्टीरिया को वहां रहना पसंद है। कुल्ला करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है, क्योंकि केवल ब्रश करने से ही आपके दांतों और मसूड़ों के बीच फंसे हानिकारक सड़न और खाने के टुकड़े दूर नहीं हो सकते।

यदि आपको सांस की दुर्गंध की चिंता है, तो आप अपने मुंह और दांतों की देखभाल का ध्यान रखें। कुछ चीनी मुक्त गम और मिंट से भी अस्थायी रूप से दुर्गंध दूर हो सकती है।
यदि आप सही तरीके से ब्रश और कुल्ला करते हैं और नियमित सफाई के लिए अपने दांतों के डॉक्टर से पास जाते हैं, लेकिन आपकी सांसों में दुर्गंध बरकरार है, तो आपको कोई चिकित्सकीय समस्या, जैसे साइनसाइटिस या मसूड़ों की बीमारी हो सकती है। यदि आपको किसी समस्या का संदेह हो, तो अपने चिकित्सक या दांतों के डॉक्टर से सलाह लें। वे तय कर सकते हैं कि आपकी सांसों की दुर्गंध के पीछे क्या कारण है और उसे दूर करने में आपकी मदद कर सकते हैं।

सांसों की दुर्गंध के कारण

सांसों की अधिकांश दुर्गंध आपके मुंह से शुरू होती है। सांसों की दुर्गंध के कई कारण होते हैं। इनमें शामिल हैं

•भोजन: आपके दांतों में और इसके आसपास भोजन के टुकड़ों के टूटने से दुर्गंध पैदा हो सकती है। पतले तैलीय पदार्थ युक्त भोजन भी सांसों की दुर्गंध के कारण हो सकते हैं। प्याज और लहसुन इसके सबसे अच्छे उदाहरण हैं, लेकिन अन्य सब्जियां और मसाले भी सांसों में दुर्गंध पैदा कर सकते हैं। जब ये भोजन पचते हैं और तीखे गंध वाले तेल आपके खून में शामिल होते हैं, तो वे आपके फेफड़ों तक पहुंचते हैं और तब तक आपकी सांसों से बाहर निकलते रहते हैं, जब तक कि वह भोजन आपके शरीर से पूरी तरह खत्म न हो जाये। प्याज और लहसुन खाने के 72 घंटे बाद तक सांसों में दुर्गंध पैदा कर सकते हैं।

•दांतों की समस्या: दांतों की खराब सफाई और दांत की बीमारियां सांसों की दुर्गंध का कारण हो सकती हैं। यदि आप हर दिन ब्रश और कुल्ला नहीं करते हैं, तो भोजन के टुकड़े आपके मुंह में रह जाते हैं। वे बैक्टीरिया पैदा करते हैं और हाइड्रोजन सल्फाइड भाप बनाते हैं। आपके दांतों पर बैक्टीरिया (सड़न) का एक रंगहीन और चिपचिपा फिल्म जमा हो जाता है।

•मुंह सूखना: लार से आपके मुंह में नमी रहने और मुंह को साफ रखने में मदद मिलती है। सूखे मुंह में मृत कोशिकाओं का आपकी जीभ, मसूड़े और गालों के नीचे जमाव होता रहता है। ये कोशिकाएं क्षरित होकर दुर्गंध पैदा कर सकती हैं। सूखा मुंह आमतौर पर सोने के समय होता है।

•बीमारियां: फेफड़े का गंभीर संक्रमण और फेफड़े में गांठ से सांसों में बेहद खराब दुर्गंध पैदा हो सकती है। अन्य बीमारियां, जैसे कुछ कैंसर और चयापचय की गड़बड़ी से भी सांसों में दुर्गंध पैदा हो सकती है।

•मुंह, नाक और गला की स्थिति: सांसों की दुर्गंध का संबंध साइनस संक्रमण से भी है, क्योंकि आपके साइनस से नाक होकर बहनेवाला द्रव आपके गले में जाकर सांसों में दुर्गंध पैदा करता है।

•तंबाकू उत्पाद: धूम्रपान से आपका मुंह सूखता है और उससे एक खराब दुर्गंध पैदा होती है। तंबाकू का सेवन करनेवालों को दांतों की बीमारी भी होती है, जो सांसों की दुर्गंध का अतिरिक्त स्रोत बनती है।

•गंभीर डायटिंग: डायटिंग करनेवालों में खराब फलीय सांस पैदा हो सकती है। यह केटोएसीडोसिस, जो उपवास के दौरान रसायनों के टूटने से पैदा होती है, के कारण होता है।

इससे बचने के उपाय

•मुंह और दांतों की साफ-सफाई का उच्च स्तर बनाये रखें। ब्रश करने के अलावा दांतों के बीच की सफाई के लिए कुल्ला भी करते रहें,

•जीभ साफ करने के लिए जीभी का उपयोग करें और जीभ के अंतिम छोर तक सफाई करें,

•आपके दांतों के डॉक्टर या फार्मासिस्ट द्वारा अनुशंसित माउथवाश का उपयोग करें। इसके उपयोग का सबसे अच्छा समय सोने से ठीक पहले है,

•समुचित मात्रा में द्रव लें। अत्यधिक कॉफी पीने से बचें,

•दुग्ध उत्पाद, मछली और मांस खाने के बाद अपने मुंह को साफ करें,

•जब आपका मुंह सूखने लगे, चीनी मुक्त गम का इस्तेमाल करें,

•ताजी और रेशेदार सब्जियां खायें,

•नियमित रूप से अपने दांतों के डॉक्टर के पास जायें और अपने दांतों की अच्छी तरीके से सफाई करायें।

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