Wednesday, 20 January 2016

रोज एक केला खाइए













रोज एक केला खाइए

रोज एक केला खाने के अनेक फायदे हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि सिर्फ केला ही नहीं, इसका छिलका भी बहुत उपयोगी होता है। यदि आप भी केला खाकर उसके छिलके को फेंक देते हैं, तो ऐसा मत कीजिए। आज हम आपको बताने जा रहे हैं केला खाने के फायदे के साथ ही उसके छिलकों की उपयोगिता के बारे में।

– केले के छिलकों को हल्के हाथों से चेहरे पर पांच मिनट तक घिसने से पिंपल्स दूर हो जाते हैं।

– इसके छिलके का पेस्ट बनाकर लगाने से चेहरा ग्लो करने लगता है।

– केले का छिलका दांतों पर रगड़ने से दांत चमकने लगते हैं।

– जब कोई कीड़ा काट ले तो उस स्थान पर केले के छिलके को पीसकर लगाने से आराम मिलता है।

– सोराइसिस होने पर केले के छिलकों को पीसकर लगाएं। इससे दाग भी चले जाते हैं और आराम मिलता है।

– थकान महसूस हो तो केले के छिलके को थोड़ी देर आंखों पर रख लें, राहत मिलेगी।

– लेदर बैग, बेल्ट या शू डल दिखने लगे हों, तो उन पर केले का छिलका रगड़ने से चमक आ जाती है।

– यदि आप झुर्रियों से परेशान हैं तो अंडे की जर्दी में केले के छिलके को मिलाकर चेहरे पर लगाएं। इससे झुर्रियां खत्म हो जाती हैं। इस पेस्ट को चेहरे पर पांच मिनट के लिए लगाएं। फिर चेहरा धो लें।

– यदि शरीर में कहीं भी दर्द हो तो केले का छिलका उस स्थान पर लगाकर 30 मिनट के लिए छोड़ दें, दर्द से राहत मिलेगी।

– मस्सों पर नियमित रूप से छिलका घिसने से मस्से झड़ जाते हैं।
तुरंत एनर्जी देता है-

-केले में सुक्रोज, फ्रुक्टोज और ग्लूकोज पाया जाता है। यही कारण है कि इसे खाने पर शरीर को तुरंत एनर्जी मिलती है।

पाचन संबंधी दिक्कतें दूर होती हैं-
केले में रेशा अधिक मात्रा में पाया जाता है। इसीलिए इसे नियमित खाने से पाचन संबंधी दिक्कतें दूर होती हैं।

डिप्रेशन में दवा का काम करता है-

केले में प्रोटीन के साथ कुछ ऐसे तत्व पाए जाते हैं, जो माइंड को रिलैक्स कर देते हैं। यही कारण है कि डिप्रेशन से पीड़ित लोगों के लिए केला दवा का काम करता है।

नीमिया के रोगियों के लिए लाभदायक है-

नियमित रूप से केला खाने से हीमोग्लोबिन बढ़ता है। इससे एनीमिया की शिकायत दूर हो जाती है।

अनिद्रा में है रामबाण-

दूध में केला और शहद मिलाकर शेक बनाकर पीने से अनिद्रा की समस्या दूर हो जाती है।

ब्लड प्रेशर कंट्रोल करता है-

केले में पोटैशियम पाया जाता है। इसीलिए इसे नियमित खाने से ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रहता है।

दिमागी थकान दूर करता है-

यदि दिमागी थकान महसूस कर रहे हैं, तो केला खाइए। आप इसे खाने के 

कुछ देर बाद ही खुद को ऊर्जा से भरा महसूस करने लगेंंगे

Tuesday, 19 January 2016

मिनटों में तनाव पर काबू पाने के 7 आसान टिप्स










मिनटों में तनाव पर काबू पाने के 7 आसान टिप्स

आजकल की व्यस्तत जिंदगी में हर इंसान के जीवन में तनाव होना तो आम बात है, लेकिन कभी-कभी ये तनाव कई बीमारियों की वजह भी बन जाता है। तनाव काफी घातक साबित हो सकता है। अगर हम रोजमर्रा की जिंदगी में अपने लिए कुछ वक्त निकाले तो इस तनाव से छुटकारा पा सकते हैं। कुछ ऐसे ही उपाय जिससे आप तनाव से छुटकारा पा सकते हैं।

नींद
नींद पूरी ना होना भी तनाव का एक कारण हो सकता है। एक वयस्क को सात से नौ घंटे की नींद की जरूरत पड़ती है। नींद में ही आपके दिमाग की सफाई भी होती है और प्राकृतिक रूप से तनाव कम होता है। इसलिए नींद पूरी ले अन्यथा अधूरी नींद की वजह से आपको तनाव हो सकता है। तनाव कम करने के लिए पूरी नींद लेना बेहद जरूरी होता है।

कसरत
जॉगिंग, कसरत और साइक्लिंग तनाव को दूर रखने में मददगार साबित होते हैं। कसरत करने से तंत्रिका तंत्र यानि नर्वस सिस्टम एंडॉर्फिन छोड़ता है, जो आपको खुशी और स्फूर्ति का एहसास कराता है। साथ ही स्ट्रेस हार्मोन में कमी आती है। लेकिन किसी के साथ मुकाबला ना करें क्योंकि इससे भी तनाव वाले हार्मोन का स्तर बढ़ने लगता है।

तनाव, चिंता और अवसाद से मुक्ति चाहते हैं तो ई-मेल से रहें दूर

संगीत
तनाव कम करने के लिए अपनी पसंद का संगीत सुनना भी इच्छा उपाय है। पसंदीदा संगीत सुनने से आप तनाव से काफी हद तक मुक्ति पा सकते है। कई शोधों के जरिए यह साबित हो चुका है कि तनाव और अवसाद दूर करने में संगीत की अहम भूमिका होती है।

टहलना और दौड़ना
तनाव दूर करने के लिए टहलना और दौड़ना भी एक बेहतर उपायों में शुमार होता है। आप वर्जिश करने के साथ ही दौड़ने, टहलते से भी तनाव से मुक्ति पा सकते है। क्योंकि इस दौरान आपके शरीर में ऑक्सीजन का प्रवाह बढ़ जाता है और आप तनावमुक्त हो जाते हैं। अगर आप रोज कम से कम 30 मिनट भी एक्सरसाइज करें तो आप काफी हद तक तनाव पर काबू पा सकते हैं। इससे आप शारीरिक तौर तो फिट रहेंगे ही साथ ही आपको मानसिक शांति भी मिलेगी।

रोजनामचा लिखना
तनाव मुक्ति के लिए रोजनामचा लिखने की भी आदत को डाल ले। ऐसे करने से आप तनाव पर काबू पा सकते है। जो भी आपकी जिंदगी में जो हर रोज घटित हो रही है उसे लिखने की आदत डाल ले। यकीनन यह तनाव को दूर करने में सहायक सिद्ध होगा।

किताब पढ़ना 
तनाव पर काबू पाने के लिए किताबें पढ़ना भी एक अच्छा उपाय है। आप अपनी पसंदीदा किताबें पढ़ें जिससे काफी हद तक आपका तनाव कम होगा।

मेडिटेशन करें
तनाव से मुक्ति का सबसे आसान तरीका है मेडिटेशन। अगर आप रोजाना कम से कम 30 मिनट मेडिटेशन करें तो तनाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

Monday, 18 January 2016

माइग्रेन का उपचार















माइग्रेन का उपचार ::

माइग्रेन एक गंभीर बीमारी है जिसका समय रहते उपचार होना जरूरी है। माइग्रेन में रोगी को बेचैन कर देने वाला दर्द होता है। माइग्रेन को कई नामों से जाना जाता है। इसे आधे सिर का दर्द, सुदाअ निस्फी, शकीका आदि भी कहा जाता है।
इस रोग में सिर दर्द का अधिक होना, सिर के दायें या बायें भाग में दर्द होना, दर्द की वजह से उल्टी आना, सिर में दर्द के साथ शरीर में सुन्नता भी आ सकती है। आधे सिर में दर्द बने रहना आदि लक्षण होते हैं। यह दर्द सिर से शुरू होकर आंख और जबड़े तक फैल जाता है। और रेागी को अत्याधिक दर्द होता है।

माइग्रेन की समस्या को दूर करने के प्राकृतिक अचूक उपाय

माइग्रेन का दर्द होने पर आप देशी घी में गुड खायें यह आधे सिर मे होने वाले दर्द से निजात दिलाता है। यदि दर्द सुबह से ही होने लगे तो आप दूध में जलेबी या रबड़ी का सेवन करें। एैसा करने से आधे सीसी का दर्द रूक जाता है।माइग्रेन के दर्द से यदि उल्टी हो रही हो तो खाने के समय में रोगी को शहद खिलाएं एैसा करने से उल्टी और दर्द बंद हो जाता है। यदि दर्द सुबह से ही शुरू हो जाता है तो तुलसी के पत्तों को छाया में सुखाकर उसका चूर्ण बना लें और फिर इसमें शहद मिलाकर दिन में तीन बार चाटें। यह दर्द में राहत देगा और धीरे-धीरे माइग्रेन के प्रभाव को कम करेगा।

आधे सिर के हिस्से में दर्द ज्यादा हो तो आप रोगी को आधा चम्मच शहद में आधा चम्मच नमक मिलाकर चटाएं। हींग भी माइग्रेन के दर्द से रहात देने में असरकारी है। 

पानी में हींग को अच्छी तरह से घोल लें फिर इसे सूंघे और इसका लेप माथे पर लगाएं। दर्द से निजात मिलेगा।

अंगूर का रस सुबह पीने से माइग्रेन के दर्द से निजात मिलता है। सुबह से शुरू होने वाले दर्द में आप सुबह-सुबह ही 150 ग्राम पानी में 50 ग्राम शक्कर मिलाकर धीरे-धीरे पीएं यह सिर दर्द से मुक्ति दिलवाता है। आधे सिर के दर्द से निजात पाने के लिए आप सूर्योदय से पहले उठकर 25 ग्राम खील को शहद के साथ सेवन करें और फिर आधे घंटे की नींद लें एैसा 1 सप्ताह तक करने से माइग्रेन के दर्द से मुक्ति मिलती है।

लहसून को पीस कर उसका लेप दर्द वाली जगह पर लगाने से दर्द से निजात मिलता है साथ ही आप लहसून के रस की दो छोटी बूंदे नाक के छिद्र में डालें।

आकास्मिक रोगों को इलाज















आकास्मिक रोगों को इलाज

आकास्मिक रोग(emergency problems) व घटनाएं कभी बताकर नहीं आते हैं। इसलिए आपको इस बात की जानकारी रखना जरूरी है जिससे समय पर इंसान का उपचार हो जाए और अस्पताल ले जाने तक का समय मिल सके। एैसे में आपको बेहद सावधान और धैर्य रखना चाहिए। आकास्मिक रोग व घटनाएं जैसे अंग कटना, कांच निगलना, मोच आना, नाक में कुछ फंस जाना, आग से अंग का जलना आदि प्रमुख घटनाएं हैं। वैदिकवाटिका आपको इस तरह की आकास्मिक घटनाओं में कैसे आयुर्वेदिक प्राथमिक उपचार किया जाए। इस बात की पूरी जानकारी दे रही है।

आकास्मिक रोगों को इलाज(emergency treatment in hindi)

‪*‎मोच‬ आना
दो चम्मच जीरा को 1 गिलास पानी में डालकर गर्म कर लें। फिर इस पानी से मोच वाली जगह पर कपड़े से सिकाई करें। एैसा करने से आपको मोच के दर्द से निजात मिलेगा।
‪*‎चोट‬ या खरोच लगने पर
• चोट या खरोच लगने पर प्याज का टुकड़ा खरोच वाली जगह लगाने से सूजन व चोट में आराम मिलता है।
• नमक के गर्म पानी से चोट वाली जह पर सिकाई करने से सूजन उतर जाती है।

‪*‎अंग‬ के जलने पर
आग से यदि कोई अंग जल गया हो तो एैसे में जले स्थान पर ग्लिसरीन लगा दें। इससे जली हुई जगह पर छाले नहीं पड़ते और जलन भी कम हो जाती है।
दूसरा उपचार है यदि शरीर का कोई अंग आग से झुलस गया हो तो तुरंत सरसों का तेल लगा लें। इससे शरीर पर न तो जले का निशान बनेगा और न ही छाला पड़ेगा।

‪*‎नाक‬ में कोई चीज फसना
यदि नाक में कोई चीज चली गई हो या फंस गई हो तो एैसे में घबराएं नहीं तुरंत तंबाकू को पीसकर सूंघे । एैसा करने से छीके आने लगती है और नाक में फंसी चीज अपने आप बाहर आ जाती है।
*‎खट्टी‬ डाकार आना
गुड और सेंधा नमक को आपस में मिलाकर चाटने से खट्टी डकारें बंद हो जाती हैं।
*‎कांच‬ खाने व कांच चुभने पर उपाय
• यदि गलती से किसी ने कांच खा लिया हो तो घबराएं नहीं। एैसे में उसे उबले आलू खिलाएं। या पेट भर दही का सेवन करा दें।
• इसबगोल की 12 ग्राम भुस्सी को गर्म दूध के साथ उस इंसान को खिला दें।
• गुड और अजवाइन को हल्का गरम करके कांच चुभने वाले स्थान पर लगाने से कांच खुद बाहर आ जाता है।
• देशी शहद में राई को मिलाकर कांच चुभने वाली जगह पर लेप लगाने से कांच बाहर आ जाता है।
• कांटा चुभने पर हींग को घोलकर लगाने से वह वस्तु सरलता से बाहर आ जाती है।

*अंग का कटना
यदि कटने में खून निकलना बंद न हो रहा हो तो एैसे में कटे स्थान पर आंवले का रस लगाने से राहत मिलती है। और खून बहना बंद हो जाता है।
कटने पर खून को बहने से रोकने के लिए किसी कपड़े को मिट्टी के तेल में भिगोकर कटे स्थान बांधने से खून आना बंद हो जाता है।
बर्फ के टुकड़े या बर्फ के पानी की पट्टी बांधने से भी कटे स्थान से खून आना बंद हो जाता है।

बालों बालो को काला करने का आयुर्वेदिक उपाय


















बालों को काला करने का आयुर्वेदिक उपाय

आजकल एक गंभीर समस्या जन्म ले रही है वो है बालों का सफ़ेद होना, जो अब एक नार्मल बात हो चुकी है. ऐसे में आयर्वेद आपकी मदद कर सकता है. आपके काले व् घने बालों के लिये आमले का पाउडर सबसे अच्‍छा रहेगा। ।

ayurvedic remedy for black hair - balo ko kala karne ke upay

बाल सफेद होने का कारण: -reason for white hair

बाल सफ़ेद होने के कई कारण है जैसे खूब ज्‍यादा तनाव लेना, सही पोषण ना मिलना, बहुत ज्‍यादा जंक फूड खाना, बहुत ज्‍यादा साबुन, शैंपू और तेल का प्रयोग करना। कुल मिलाकर हमारा मॉडर्न लाइफस्टाइल ही इसके लिए जिम्मेदार है.

सामग्रियां (Ingredients)
सामग्री: नींबू, आमला पाउडर, साफ पानी। 

विधि: नींबू के रस में, 2 चम्‍मच पानी और 4 चम्‍मच आमला पाउडर मिला कर पेस्‍ट बनाइये। 1 घंटे के लिये रख दें और फिर प्रयोग करें।
कैसे लगाएं: इस पेस्‍ट को 20-25 मिनट के लिये बालों और जड़ों में लगाएं और फिर सिर धो लें, लेकिन उस दिन शैंपू का प्रयोग ना करें।

ध्यान रखें ये बाते Things to know
बालों को धोते वक्‍त ध्‍यान रखें कि यह आपकी आंखों में ना जाए।
इस पेस्‍ट को हफ्ते में हर चौथे दिन प्रयोग करें। ऐसा करने से आपके सारे सफेद बाल एक ही महीने में काले होने लगेगें।
अगर हो सके तो, आयुर्वेदिक तेल, शैंपू और साबुन का ही प्रयोग करें।
बालों के लिये असली आमले का तेल प्रयोग करें।

भ्रामरी प्राणायाम : विधि और लाभ











भ्रामरी प्राणायाम : विधि और लाभ

आजकल की दौड़-भाग और तनाव की जिंदगी में दिमाग और मन को शांत कर चिंता, भय, शोक, इर्ष्या और मनोरोग को दूर भगाने के लिए योग और प्राणायाम से अच्छी कोई और चीज नहीं हैं। मानसिक तनाव और विचारो को काबू में करने के लिए भ्रामरी प्राणायाम किया जाता हैं। भ्रामरी प्राणायाम करते समय भ्रमर (काले भँवरे) के समान आवाज होने के कारण इसे अंग्रेजी में Humming Bee Breath भी कहा जाता हैं। यह प्राणायाम हम किसी भी समय कर सकते हैं। खुर्ची पर सीधे बैठ कर या सोते समय लेटते हुए भी यह किया जा सकता हैं।

भ्रामरी प्राणायाम की विधि
सबसे पहले एक स्वच्छ और समतल जगह पर दरी / चटाई बिछाकर बैठ जाए। 
पद्मासन या सुखासन में बैठे। 
अब दोनों हाथो को बगल में अपने कंधो के समांतर फैलाए। 
दोनों हाथो को कुहनियो (Elbow) से मोडकर हाथ को कानों के पास ले जाए। 
अब अपनी दोनों हाथों के अंगूठो (Thumb) से दोनों कानों को बंद कर लें। 
अब दोनों हाथो की तर्जनी (Index) उंगली को माथे पर और मध्यमा (middle), अनामिका (Middle) और कनिष्का (Little) उंगली को आँखों के ऊपर रखना हैं। 
कमर, पीठ, गर्दन तथा सिर को सिधा और स्थिर रखे। 
अब नाक से श्वास अंदर लें। (पूरक)
नाक से श्वास बाहर छोड़े। (रेचक) 
श्वास बाहर छोड़ते समय कंठ से भ्रमर के समान आवाज करना हैं। यह आवाज पूर्ण श्वास छोड़ने तक करना है और आवाज आखिर तक समान होना चाहिए। 
श्वास अंदर लेने का समय 10 सेकंड तक होना चाहिए और बाहर छोड़ने का समय 20 से 30 सेकंड तक होना चाहिए। 

शुरुआत में 5 मिनिट तक करे और अभ्यास के साथ समय बढ़ाये। 
भ्रामरी प्राणायाम करते समय आप सिर्फ तर्जनी उंगली से दोनों कान बंद कर बाकि उंगली की हल्की मुट्ठी बनाकर भी अभ्यास कर सकते हैं। 
आप चाहे तो शरुआत में बिना कान बंद किये भी यह प्राणायाम कर सकते हैं। 

शन्मुखी मुद्रा - अंगूठे से दोनों कान बंद करना। तर्जनी उंगली को हल्के से आँखों के ऊपर आँखों के नाक के पासवाले हिस्से तक रखना हैं। मध्यमा उंगली को नाक के पास रखना हैं। अनामिका उंगली को होंटो (lips) के ऊपर और और कनिष्का उंगली को होंटो के निचे रखना हैं। इस मुद्रा में भी भ्रामरी प्राणायाम किया जा सकता हैं। 

भ्रामरी प्राणायाम के लाभ
भ्रामरी प्राणायाम से निचे दिए हुए लाभ होते है :
क्रोध, चिंता, भय, तनाव और अनिद्रा इत्यादि मानसिक विकारो को दूर करने में मदद मिलती हैं। 
मन और मस्तिष्क को शांति मिलती हैं। 
सकारात्मक सोच बढ़ती हैं। 
अर्धशिशी / Migraine से पीडितो के लिए लाभकारी हैं। 
बुद्धि तेज होती हैं। 
स्मरणशक्ति बढ़ती हैं। 
उच्च रक्तचाप को के रोगियों के लिए उपयोगी हैं। 
भ्रामरी प्राणायाम करते समय ठुड्डी (Chin) को गले से लगाकर (जालंदर बंध) करने से थाइरोइड रोग में लाभ होता हैं। 
Sinusitis के रोगियों को इससे राहत मिलती हैं। 
भ्रामरी प्राणायाम में क्या एहतियात बरतने चाहिए ?
भ्रामरी प्राणायाम में निचे दिए हुए एहतियात बरतने चाहिए :
कान में दर्द या संक्रमण होने पर यह प्राणायाम नहीं करना चाहिए। 
अपने क्षमता से ज्यादा करने का प्रयास न करे। 
प्राणायाम करने का समय और चक्र धीरे-धीरे बढ़ाये। 
भ्रामरी प्राणायाम करने के बाद आप धीरे-धीरे नियमति सामान्य श्वसन कर श्वास को नियंत्रित कर सकते हैं। भ्रामरी प्राणायाम करते समय चक्कर आना, घबराहट होना, खांसी आना, सिरदर्द या अन्य कोई परेशानी होने पर प्राणायाम रोककर अपने डॉक्टर या योग विशेषज्ञ की सलाह लेना चाहिए।

शीतकालीन कफ प्रधान खांसी निवारक प्रयोग











शीतकालीन कफ प्रधान खांसी निवारक प्रयोग 

उपाय :- अनार के छिलके फेंके नहीं बल्कि इन्हें छाया में सुखाकर इक्कठे कर ले | फिर खूब अच्छी तरह सुखा कर पीस कर चूर्ण कर ले | इस चूरन को आधी - tea spoon मात्रा में ले कर , थोड़े से शुद्ध शहद में मिला कर दिन में तीन बार चटा दिया करे | दो - तीन के प्रयोग से ही शीतकालीन कफ प्रधान खांसी चलना बंद हो जायेगी | 

अन्य लाभकारी प्रयोग :- रात में भुने हुए चने खाकर , ऊपर से गरम दूध पीने से श्वास नली का कफ निकल जाता हें | ( इस प्रयोग के बाद कुछ भी खाना पीना नहीं हें |)

अन्य लाभकरी प्रयोग :- पान का रस और तुलसी का रस तीन -चार ग्राम में शुद्ध शहद छ: ग्राम मिलाकर चाटने से पूराना जुखाम ठीक हो जाता हें |