Tuesday, 4 August 2015

मधुमेह-SUGAR-DIABETES











मधुमेह-SUGAR-DIABETES

मधुमेह आज की व्यस्त जीवन चर्या का परिणाम है। इससे भी अधिक चिंताजनक है इसका नवयुवको एवं नवयुवतियों को अपनी गिरफ्त में लेना। यह चलन विशेषत: विकासशील देशों में अधिक देखा गया है जहॉँ अचानक आर्थिक शक्ति की वृद्धि के कारण सामान्य दिन चर्या मे नौजवानो को विमुख कर और शारीरिक श्रम के प्रति उदासीन कर दिया है। इसके अतिरिक्त मधुमेंह के रोगियो की वृद्धि के बहुत कारण है । यह स्थिति और भी विकराल होती है क्योंकि इस बीमारी को समझने के लिये जन साधारण प्रयास नही करते।

सर्व प्रथम रोगी को अपनी जीवन शैली में परिवर्तन करना होगा। क्यों की बिना जीवन शैली में बदलाव किये कोई भी इलाज स्थायी नहीं हैं।
कितना आहार लेना कब आहार लेना, क्या आहार लेना, किस प्रकार का व्यायाम करना जिससे रोग में अधिकतम लाभ हो, आदि विषय की जानकारी उन्हें प्रामाणिक ढ़ग से नही मिल पाती जिससे वे व्यक्ति और परेशान हो जाते हैं।

हर उम्र और वर्ग में अलग-अलग कारणों से अलग-अलग रूप में मधुमेह होती है।

आइये समझे मधुमेह को। (Let's understand diabetes)
मधुमेह एक ऐसी अवस्था है जिसमे शरीर में इन्सुलिन की कमी हो जाती है या शरीर में इन्सुलिन तो होता है मगर वो सही तरीके से शुगर नहीं बना पाता। अग्नाशय इन्सुलिन बनाता है, इन्सुलिन एक हॉर्मोन है। (हार्मोन एक रसायन होता है। जो एक सेल या एक ग्रंथि या शरीर के एक भाग में एक अंग द्वारा जारी किया जाता है। यह उस जीव के अन्य भागों में कोशिकाओं को प्रभावित करता है।) अगर व्यक्ति का शरीर इन्सुलिन उत्पादन कम कर दे तो फिर शरीर में शुगर की मात्रा काफी बढ़ जाती है। जो काफी चिंताजनक विषय है।

इससे रक्त में ग्लूकोज़ की मात्रा इन्सुलिन की कमी के कारण बढ़ जाती है अगर रक्त में इस ग्लूकोज़ की मात्रा को नियंत्रित नहीं किया जाए तो यह कई अन्य शारीरिक समस्याऎं उत्पन्न कर सकती हैं।

अगर एक बार दवा-इलाज, विशेषकर इन्सुलिन लेने के चक्कर में फँस गए तो वे जीवन पर्यन्त इस चक्र से निकल न सकेंगे। इस चक्कर में पड़कर घनचक्कर बनने से बचने के लिए सन्तुलित आहार लेना बहुत आवश्यक है।

मधुमेह एक नज़र में बारिश की उदहारण से।

1. अगर वर्षा की बूंदे सही समय पर सही मात्रा में बरसे तो वो अमृत की तरह होती है, उसी तरह शरीर को भी ग्लूकोज़ की आवश्यकता होती है।

2. जिस तरह वर्षा का जल सही निकास होने पर सही जगह पर पहुँचता है और उपयोगी होता है, उसी प्रकार भोजन से रक्त में पहुंचा ग्लूकोज़ इन्सुलिन की मदद से सही स्थान अर्थात कोशिकाओं के भीतर पहुँचता है तो उर्जा प्रदान करता है।

3. यदि बाढ़ आ जाये तो जल नुकसानदायक भी हो सकता है, ठीक उसी तरह रक्त में ग्लूकोज़ का स्तर अधिक रहे तो ये भी शरीर को गंभीर क्षति पहुंचा सकता है ।

4. बारिश का पानी निकास ना होने के कारण, बाढ़ का रूप ले कर, नुकसान पहुंचाता है, उसी तरह भोजन से रक्त में पहुंचा ग्लूकोज़, इन्सुलिन की कमी होने पर सही स्थान पर नहीं पहुँच पाता और रक्त में ही घूमता रहता है और शरीर को नुक्सान पहुंचाता है।

क्या है इन्सुलिन ?

1.हमारे शरीर के लिए इन्सुलिन का वही महत्व है जो वृक्ष के लिए पानी का।

2. मधुमेह का अर्थ है इन्सुलिन की कमी, ये शरीर को वैसे ही प्रभावित करती है जैसे वृक्ष को पानी की कमी।

3. मधुमेह में दवाएं शरीर में इन्सुलिन के बहाव को बढाती है, यह एक पंप द्वारा भूमिगत पानी एक वृक्ष को उपलब्ध कराने जैसा है।

4. शरीर में इन्सुलिन का उत्पादन एक स्तर से गिर जाने पर दवाओ की अधिकतम डोज़ भी कारगर नहीं होती, जैसे भू जल स्तर गिर जाने पर अधिकतम क्षमता वाला पंप भी पानी नहीं देता।

5. जिस प्रकार भू जल स्तर गिर जाने पर बाहर से पानी लाना एक मात्र समाधान है, उसी प्रकार शरीर को बाहरी स्रोत से इन्सुलिन देना एक मात्र समाधान है।

6. इन्सुलिन कोई दवा नहीं बल्कि एक प्राकर्तिक हॉर्मोन है, जो जनम से मृत्यु तक हमारे शरीर में बनता है। इन्सुलिन की कमी का अर्थ है 

मधुमेह(SUGAR)। शरीर को स्वस्थ रखने के लिए इन्सुलिन की प्रयाप्त मात्रा ज़रूरी होती है, दवाइयों और आवश्यकता पड़ने पर इन्सुलिन इंजेक्शन स्वस्थ बने रहने के लिए ज़रूरी है।

क्या मधुमेह रक्त में अतिरिक्त SUGAR की समस्या है.

बिल्कुल नहीं। मगर ये समस्या तब बनती है जब शरीर के सेल इस SUGAR को अपने अन्दर पचा नहीं पाते। रक्त में ज़्यादा SUGAR होने की बजाये वो स्तिथि बहुत बुरी या खतरनाक है जब हमारा शरीर SUGAR प्राप्त नहीं कर पाता। जहाँ तक शरीर का सम्बन्ध है तो SUGAR इसके लिए एनर्जी का काम करती है जो शरीर के लिए बहुत उपयोगी है। याद रखिये शरीर को बेहतरीन तरीके से काम करने के लिए लगातार उर्जा चाहिए। शरीर और दिमाग के cells के लिए बहुत प्रकार के पोषक तत्वों की ज़रूरत होती है जिनमे से एक है SUGAR. शरीर के cells में उर्जा, रक्त में SUGAR के माध्यम से पहुंचाई जाती है। संचार प्रणाली SUGAR को हमारे शरीर के cells में पहुंचाती है वो भी इन्सुलिन की सहायता से। SUGAR हमारे cells में तभी जा सकती है जब हमारे cells SUGAR लेने के लिए खुले हो। इन्सुलिन एक चाबी की तरह काम करता है जो हमारे cells को खोलता है तांकि रक्त से SUGAR cells में पहुंचाई जा सके।

SUGAR के कारण

1. डायबिटीज का कारण है इंसुलिन हार्मोंन का कम निर्माण होना। जब इंसुलिन कम बनता है तो कोशिकाओं तक और रक्त में शुगर ठीक से नहीं पहुंच पाती जिससे सेल्स की एनर्जी कम होने लगती है और इसी कारण से शरीर को नुकसान पहुंचने लगता है। जैसे- बेहोशी आना, दिल की धड़कन तेज होना इत्यादि समस्याएं होने लगती हैं।

2. डायबिटीज के कारण इंसुलिन के कम निर्माण से रक्त में शुगर अधिक हो जाती है क्योंकि शारीरिक ऊर्जा कम होने से रक्त में शुगर जमा होती चली जाती है जिससे कि इसका निष्कासन मूत्र के जरिए होता है। इसी कारण डायबिटीज रोगी को बार-बार पेशाब आता है।

3. डायबिटीज होने के और भी कारण है। यह अनुवांशिक भी होती है। यदि आपके परिवार के किसी सदस्य मां-बाप, भाई-बहन में से किसी को है तो भविष्य में आपको भी डायबिटीज होने की आशंका बढ़ जाती है।

4. आपका समय पर ना खाना, बहुत अधिक जंकफूड खाना या आपका मोटापा भी डायबिटीज का मुख्य कारक है।

5. आपका वजन बहुत बढ़ा हुआ है, आपका बीपी बहुत हाई है और कॉलेस्ट्रॉल भी संतुलित नहीं है तो आपको डायबिटीज हो सकता है।

6. बहुत अधिक मीठा खाने, नियमित रूप से बाहर का खाना खाने, कम पानी पीने, एक्सरसाइज ना करने, खाने के बाद तुरंत सो जाने या ज्यादा समय तक लगातार बैठा रहना इत्यादि कारण भी डायबिटीज को जन्म दे सकते हैं।

7. वर्तमान में बच्चों में होने वाली डायबिटीज का मुख्य कारण उनका रहन-सहन और खानपान है। इसके साथ ही शारीरिक रूप से निष्क्रियता भी बच्चों को डायबिटीज की और अग्रसर कर सही है। इसलिए उनको नियमित सैर या OUTDOOR GAMES के लिए प्रेरित करे।

8. यदि आप चाहते हैं कि आप और आपका परिवार डायबिटीज से बचें तो उसके लिए हेल्दी लाइफ स्टाइल अपनाना जरूरी है। जिसमें एक्सरसाइज और हेल्दी फूड को खास प्राथामिकता दें।

लक्षण

1. बार बार पेशाब जाने की ज़रूरत महसूस करना।
2. पेशाब से तेज़ बदबू का आना।
3. बार बार प्यास लगना।
4. गरम और रुखी त्वचा।
5. तेज़ और असरल श्वांस प्रक्रिया।
6. धड़कन का कमज़ोर होना।
7. पेट सम्बन्धी दर्द।
8. पैरो में दर्द।
9. व्यक्ति चिडचिडा हो जाता है।
10. हर पल थकान और कमजोरी महसूस करना।
11. भूखा और कुछ मीठा खाने की ज़िद करना।
12. भ्रम की स्थिति में रहना, इत्यादि।
13. आंखें कमज़ोर होना-
14. घाव का जल्दी न भरना
15. आनुवंशिक

जांच

सुबह खाली पेट रक्त की जाँच में शर्करा की मात्रा 80 से 120 एमजी (प्रति 100 सीसी रक्त) के बीच में होना सामान्य स्वस्थ अवस्था होती है। यदि यह अवस्था हो तो मनुष्य स्वस्थ है। यदि शर्करा की मात्रा 120 एमजी से ज्यादा, लेकिन 140 एमजी से कम हो तो यह मधुमेह की प्रारंभिक अवस्था होगी। यदि 140 एमजी से ज्यादा हो तो मधुमेह रोग ने जड़ जमा ली है ऐसा माना जाएगा। भोजन करने के दो घण्टे बाद की गई जाँच में भी रक्त शर्करा 120 एमजी से कम पाई जाए तो मनुष्य स्वस्थ है, किन्तु यदि 140 एमजी तक या इससे कम पाई जाए तो मधुमेह होने की प्रारंभिक अवस्था मानी जाएगी, लेकिन अगर 140 एमजी से ज्यादा पाई जाए तो मधुमेह रोग से ग्रस्त होना मान लिया जाएगा। मधुमेह धीरे-धीरे पनपता है और जब तक उग्र अवस्था में न पहुँच जाए तब तक इसका साफ पता नहीं चल सकता, इसलिए मोटे शरीर वाले और 40 वर्ष से अधिक आयु वाले स्त्री-पुरु षों को 2-3 माह में एक बार स्वमूत्र और रक्त की जाँच कराते रहना चाहिए। यदि पेशाब में शर्करा पाई जाए या रक्तगत SUGAR सामान्य मात्रा से ज्यादा पाई जाए तो अपने आहार में तुरन्त उचित सुधार कर सन्तुलित आहार लेना शुरू कर देना चाहिए और आवश्यक परहेज का सख्ती से पालन करना चाहिए।

समाधान।

एलोपैथी, भारत में अब तक बुरी तरह विफल रही है। जो दवा हम डायबिटीज के लिए लेते है उसमे इन्सुलिन नहीं होता। वैसे भी अगर हम इन्सुलिन मौखिक रूप से ले तो ये ज्यादा फायदेमंद नहीं होता। टेबलेट्स शुगर को हमारे cells में अवशोषित करने की मदद करती है। टेबलेट्स और इन्सुलिन रासायनिक होती है जिनके अपने साइड इफेक्ट्स होते है। इनके द्वारा भी कोई पुख्ता समाधान संभव नहीं है। आप केवल कुछ दिनों या कुछ घंटो तक अपनी समस्या को स्थगित कर सकते हैं। डायबिटीज को शुरुआती अवस्था में आप प्रयाप्त और संतुलित आहार या योगा से नियंत्रित कर सकते है। लेकिन, ज़ाहिर है, आपको एक संतुलित आहार के बारे में और सही योगासन के बारे में स्पष्ट रूप से जानकारी होनी चाहिए। ये कहने की जरूरत नहीं कि मोटापे से ग्रस्त लोगों को पहले अपना वज़न कम करना होगा।

क्या खाये क्या ना खाये
इस बीमारी को घरेलू इलाज से काफी हद तक कम किया जा सकता है। आइए जानते है मधुमेह को घरेलू इलाज से कैसे कंट्रोल कर सकते हैं।

मधूमेह को ठीक करने के लिए घरेलू इलाज

करेला
डायबिटीज में करेला काफी फायदेमंद होता है, करेले में कैरेटिन नामक रसायन होता है, इसलिए यह प्राकृतिक स्टेरॉयड के रुप में इस्तेमाल होता है, जिससे खून में शुगर लेवल नहीं बढ़ पाता। करेले के 100 मिली. रस में इतना ही पानी मिलाकर दिन में तीन बार लेने से लाभ होता है।

आमला
एक चम्मच आमले का रस करेले के रस में मिला कर रोज पीएं , यह मधुमेह की सबसे अच्छी दवा है।

आम की पत्ती
15 ग्राम ताजे आम के पत्तों को 250 एम एल पानी में रात भर भिगो कर रख दें। इसके बाद सुबह इस पानी को छान कर पी लें। इसके अलावा सूखे आम के पत्तों को पीस कर पाउडर के रूप में खाने से भी मधुमेह में लाभ होता है।

शहद
कार्बोहाइर्ड्रेट, कैलोरी और कई तरह के माइक्रो न्यू ट्रिएंट से भरपूर शहद मधुमेह के लिए लाभकारी है। शहद मधुमेह को कम करने में सहायता करता है।

नीबू
नीबू से प्यास बुझाइए मधुमेह के मरीज को प्यास अधिक लगती है। अतः बार-बार प्यास लगने की अवस्था में नीबू निचोड़कर पीने से प्यास की अधिकता शांत होती है।

खीरा
खीरा खाकर भूख मिटाइए मधुमेह के मरीजों को भूख से थोड़ा कम तथा हल्का भोजन लेने की सलाह दी जाती है। ऐसे में बार-बार भूख महसूस होती है। इस स्थिति में खीरा खाकर भूख मिटाना चाहिए।

गाजर-पालक रस
गाजर-पालक को औषधि बनाइए इन रोगियों को गाजर-पालक का रस मिलाकर पीना चाहिए। इससे आँखों की कमजोरी दूर होती है।

शलगम
रामबाण औषधि है शलगम मधुमेह के रोगी को तरोई, लौकी, परवल, पालक, पपीता आदि का प्रयोग ज्यादा करना चाहिए। शलगम के प्रयोग से भी रक्त में स्थित SUGAR की मात्रा कम होने लगती है। अतः शलगम की सब्जी, पराठे, सलाद आदि चीजें स्वाद बदल-बदलकर ले सकते हैं।

जामुन
जामुन खूब खाइए मधुमेह के उपचार में जामुन एक पारंपरिक औषधि है। जामुन को मधुमेह के रोगी का ही फल कहा जाए तो अतिश्योक्ति नहीं होगी, क्योंकि इसकी गुठली, छाल, रस और गूदा सभी मधुमेह में बेहद फायदेमंद हैं। मौसम के अनुरूप जामुन का सेवन औषधि के रूप में खूब करना चाहिए। जामुन की गुठली संभालकर एकत्रित कर लें। इसके बीजों जाम्बोलिन नामक तत्व पाया जाता है, जो स्टार्च को SUGAR में बदलने से रोकता है। गुठली का बारीक चूर्ण बनाकर रख लेना चाहिए। दिन में दो-तीन बार, तीन ग्राम की मात्रा में पानी के साथ सेवन करने से मूत्र में शुगर की मात्रा कम होती है।

मैथी
मैथी का प्रयोग कीजिए मधुमेह के उपचार के लिए मैथीदाने के प्रयोग का भी बहुत चर्चा है। दवा कंपनियाँ मैथी के पावडर को बाजार तक ले आई हैं। इससे पुराना मधुमेह भी ठीक हो जाता है। मैथीदानों का चूर्ण बनाकर रख लीजिए। नित्य प्रातः खाली पेट दो टी-स्पून चूर्ण पानी के साथ निगल लीजिए। कुछ दिनों में आप इसकी अद्भुत क्षमता देखकर चकित रह जाएँगे।

गेहूँ के जवारे
चमत्कार दिखाते हैं गेहूँ के जवारे गेहूँ के पौधों में रोगनाशक गुण विद्यमान हैं। गेहूँ के छोटे-छोटे पौधों का रस असाध्य बीमारियों को भी जड़ से मिटा डालता है। इसका रस मनुष्य के रक्त से चालीस फीसदी मेल खाता है। इसे ग्रीन ब्लड के नाम से पुकारा जाता है। जवारे का ताजा रस निकालकर आधा कप रोगी को तत्काल पिला दीजिए। रोज सुबह-शाम इसका सेवन आधा कप की मात्रा में करें।

अदरक
अदरक भोजन का जायका ही नहीं बढ़ाता बल्कि हमारी सेहत के लिए भी यह फायदेमंद है। दादी, नानी के नुस्खों में इसे स्वाद एवं सेहत बादशाह का नाम दिया गया है और अब वैज्ञानिकों ने भी तरह-तरह के प्रयोगों से इसे गुणों की खान माना है। वैज्ञानिकों की नई शोध में अदरक मधुमेह की बीमारी में बेहद कारगर साबित हुई है। यूनीविर्सटी आफ सिडनी के फारमास्यूटिकल कमेस्ट्री के प्रोफेसर बासिल रौफोगालिस की प्लांटा मेडिका में रिपोर्ट प्रकाशित हुई है। प्रो.बासिल के अनुसार अदरक का रस खून में शर्करा के स्तर को नियंत्रित करता है। प्रो. रौफोगालिस के अनुसार मरीज में मधुमेह का रोग पुराना होने पर बहुत सी परेशानियों को जन्म देता है। हमारे शरीर के प्रमुख अंग इससे प्रभावित होते हैं। ऐसे में अदरक का रस ऐसे रोगियों के लिए बेहद ही फायदेमंद है। उन्होंने कहा कि अदरक का मुख्य जिंजररोल्स खून मे शर्करा के स्तर को नियंत्रित करता है।

त्रिफला 
त्रिफला चूर्ण मधुमेह की बहुत बढ़िया औषिधि हैं, हर रात सोने से पहले 1 चम्मच त्रिफला चूर्ण गुनगुने पानी के साथ लीजिये। और इसको अपनी दिन चर्या में शामिल करे।

एलो वेरा ।
एलो वेरा शरीर के अन्दर जाते ही शरीर को ज़हर मुक्त बनाने का काम शुरू करता है, हमारा शरीर इसको बेहद आसानी से पचा लेता है. याद रहे एलो वेरा एक प्राकृतिक ज़हर नाशक एजेंट है। ये गुर्दे को उत्तेजित करता है, जो के अपने आप में एक ऐसा अंग है जो शारीर को निरंतर ज़हर मुक्त करता है। एलो वेरा खून परिसंचरण को बढ़ा देता है और हमारे रोग प्रतिरोधक सिस्टम को मज़बूत करता है अपने अन्दर समाये हुए ढेरो विटामिन्स, एमिनो एसिड्स, एंजाइमों, फाइबर और वो सारे पोषक तत्वों से जिनकी हमारे शरीर में बहुत कमी हो गयी थी। और सबसे महत्वपूर्ण ये हमारे पैंक्रियास(अग्नाशय) को उत्तेजित करता है जो हमारे शरीर में इन्सुलिन बनाने का काम करता है। इन्सुलिन को सही ढंग से काम करने के लिए chromium picolinate की बेहद ज़रूरत रहती है. ये एक बेहद महत्वपूर्ण मिनरल (खनिज) है, इन्सुलिन क्रोमियम की मदद से इन्सुलिन कार्बोहायड्रेट, वसा, और प्रोटीन को शुगर के रूप में बदलती है जो कि बाद में हमारे शरीर के लिए उर्जा का काम करती है. और एलो वेरा में ये मिनरल (खनिज) मौजूद रहता है. जिसकी वजह से इन्सुलिन बेहतरीन काम करता है. Carboxypeptidases एलो वेरा में पाए जाने वाला एक अहम् एंजाइम है जो भोजन को पचाने में मदद करता है और हमारे शारीर के बायोलॉजिकल प्रोसेस को सही ढंग से चलने में मदद करता है और इसके साथ ये घावों को जल्दी भरने में मदद करता है.

एलो वेरा चुनाव करते समय आप इसकी गुणवत्ता को ज़रूर जांच ले, आज कल लोग एलो वेरा के नाम पर बहुत लूट मचा रहे हैं।
अलसी :- गर्मियों में 1 चम्मच अलसी दही या छाछ के साथ और सर्दियों में ३ चम्मच तक अलसी खाए क्यूंकि इसमें ओमेगा 3 होता हैं। ओमेगा 3 फैटी एसिड आपकी धमनियों को साफ एवं स्वस्थ रखने में अहम् भूमिका निभाता है। मधुमेह के रोगियों को अक्सर उच्च ट्राइग्लिसराइड्स और एचडीएल के कम स्तर की शिकायत रहती है। एचडीएल 'अच्छा कोलेस्ट्रॉल होता है जो ख़राब कोलेस्ट्रॉल के कुप्रभाव को कम करता है। ओमेगा -3 फैटी एसिड शुगर लेवल कम करने में विभिन्न तरीकों से मददगार सिद्ध होता है। ओमेगा-3 फैटी एसिड्स दिल एवं दिमाग के लिए भी टोनिक का काम करता है।

दालचीनी: दालचीनी घर घर में पाया जाने वाला एक मसाले के रूप में जाना जाता है। लेकिन यह न सिर्फ आपके खाने का जायका बढाता है बल्कि यह आपके शरीर में रक्त शर्करा को भी नियंत्रण में रखता है। जिन लोगों को मधुमेह नहीं है वे इसका सेवन करके मधुमेह से बच सकते हैं। और जो मधुमेह के मरीज हो चुके हैं वे इसके सेवन से ब्लड शुगर को कम कर सकते है। दालचीनी को पीसकर चाय में चुटकी भर मिलाकर दिन में दो तीन बार पीया करें। इसका ज्यादा सेवन करना उचित नहीं होता इसलिए रोजाना थोड़ा थोड़ा हीं सेवन करें।

लहसुन: लहसुन भी ब्लड शुगर को कम करने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। अतः अगर आप मधुमेह के मरीज हैं तो रोज सुबह लहसुन की दो तीन कलियों को चबाया करें या कुतरकर निगला करें। इससे आपको हाई ब्लड प्रेशर एवं दिल की बीमारियों में भी बहुत लाभ मिलेगा। मधुमेह से कैंसर होने की संभावना बढ़ जाती है लेकिन लहसुन कैंसर को रोकने में बहुत हीं प्रभावशाली माना जाता है।

ओटमील यानि जई का आटा: जई का आटा मधुमेह के लिए मरीजों के लिए बहुत हीं उपयुक्त आहार माना जाता है। आप इसका सेवन सुबह शाम नाश्ते के रूप में किया करें तो आपको बहुत लाभ पहुंचेगा।
इनका बहुत कम, या ना के बराबर इस्तेमाल करना चाहिये.
नमक, चीनी, घी, तेल, दूध व दूध से निर्मित वस्‍तुऍं परांठे, मेवे, आइसक्रीम, मिठाई, मांस, अण्‍डा, चॉकलेट, सूखा नारियल
इनका इस्तेमाल नहीं करना चाहिये.

तला-भुना भोजन, उड़द की दाल, अचार

खाद्य प्रदार्थ जो अधिक खाना चाहिए।

हरी सब्जियॉं, खीरा, ककडी, टमाटर, करेला, प्‍याज, लहसुन, नींबू और भोजन का समय जहॉं तक संभव हो निश्चित होना चाहिए और लम्‍बे समय तक ‍भूखा नही रहना चाहिये।

सुंदर बाहों के लिए करें ये उपाय

















सुंदर बाहों के लिए करें ये उपाय

● यदि आप खुली बाहों वाली पोशाकें पहनने की शौकीन हैं, लेकिन धूप से आपकी बाहों की त्वचा बदरंग और बेजान हो गई है, तो धूप में निकलते वक्त त्वचा की सुरक्षा का ख्याल जरूर रखें।

अगर शरीर के किसी भी अंग पर टैनिंग हो गई है तो उसे दूर करने में काफी ज्‍यादा समय लगता है। इसलिये अच्‍छा होगा कि आप अपने हाथ और पैरों को हमेशा ढंक कर रखें।

1) सूरज की घातक किरणों से सुरक्षा :
धूप में निकलने से पहले बाहों पर हमेशा एसपीएफ 30 एवं पीए ++ वाला बोर्ड स्पेक्ट्रम संस्क्रीन लगाना चाहिए। धूप में रहने के दौरान हर चार घंटे में त्वचा पर संस्क्रीन लगाना चाहिए।

2) धूप में बाहों को अच्छी तरह ढंककर निकलें :
ज्यादा समय तक धूप में रहने से बांहों में झाइयां पड़ जाती हैं और रंग काला पड़ने लगता है। यदि आप धूप में निकलते वक्त खुली बाहों वाली पोशाक के बदले पूरी बांह की पोशाक पहनने का विकल्प चुनती हैं, तो पाएंगी कि इससे आपकी बाहें नर्म और कोमल बनी रहती हैं। गर्मी के मौसम में सूती कपड़े और हल्के रंग के पोशाक पहनना ज्यादा सही रहता है।

3) घरेलू उपाय :
बाहों पर गहरे दाग धब्बों को हटाने के लिए घरेलू उबटन कारगर साबित हो सकते हैं। उबटन लगाने से त्वचा की रूखी परत हट जाती है और त्वचा कोमल और चमकदार बनती है। उबटन बनाने के लिए छाछ और बेसन का पतला पेस्ट बनाकर बाहों पर लगाएं और सूखने के बाद हल्के हाथों से मलते हुए पानी से धो डालें। ऐसा सप्ताह में एक से दो बार करें।

4) गुलाब जल :
इसके अलावा गुलाब के अर्क में चीनी मिलाकर इससे बाहों पर मसाज करें और फिर पानी से धो डालें। सप्ताह में कम से कम एक बार ऐसा करने से आपकी बाहें मुलायम और चमकदार होंगी।

5) नींबू:
यह एक प्राकृतिक ब्‍लीच की तरह काम करता है जिसे त्‍वचा पर लगाने से रंग साफ होता है। नींबू के रस को त्‍वचा पर लगाइये और सूखने दीजिये। उसके बाद इसे ठंडे पानी से धो लीजिये और तौलिये ये पोछ लीजिये। नींबू का रस लगाने के बाद धूप में न निकलें नहीं तो सूरज की किरणे नींबू के रस के साथ मिल कर रिएक्‍ट होंगी जिससे त्‍वचा का रंग और हल्‍का हो जाएगा।

कुछ बेहतरीन ब्यूटी टिप्स



















कुछ बेहतरीन ब्यूटी टिप्स :-

चेहरे के दाग-धब्बे और झाइयां हटाने के लिए हल्दी और काले तिल को बराबर मात्रा में पीसकर पेस्ट बनाकर चेहरे पर लगाएं। हल्दी-दूध का पेस्ट लगाने से त्वचा का रंग निखरता है और आपका चेहरा खिला-खिला लगता है।

सनबर्न की वजह से त्वचा झुलसने या काली पड़ने पर हल्दी पाउडर, बादाम चूर्ण और दही मिलाकर प्रभावित स्थान पर लगाएं। इससे त्वचा का रंग निखर जाता है और सनबर्न की वजह से काली पड़ी त्वचा भी ठीक हो जाती है। यह एक तरह से सनस्क्रीन लोशन की तरह काम करता है।

शरीर पर कहीं जल गया हो, तेज धूप से त्वचा झुलस गई हो, त्वचा पर झुर्रियां हों या कोई त्वचा रोग हो तो कच्चे आलू का रस निकालकर लगाने से फायदा होता है।

आलू को पीसकर त्वचा पर मलें। रंग गोरा हो जाएगा।

चेहरे पर शहद की एक पतली तह चढ़ा लें। इसे 15-20 मिनट लगा रहने दें, फिर कॉटनवूल भिगोकर इसे पोंछ लें। तैलीय त्वचा वाले शहद में चार-पांच बूंद नीबू का रस डालकर उपयोग करें।

चार-पांच नीम की पत्तियों को पीसकर मुलतानी मिट्टी में मिलाकर लगाएं, सूखने पर गरम पानी से धो लें।

बादाम, बेसन, गाजर का रस दूध में मिलाकर उबटन की तरह लगाने से त्वचा में कमनीयता आती है।

दही में नींबू का रस मिलाकर चेहरे, गर्दन व हाथ-पांव में लगाएं । 20 मिनट बाद धो लें, हाथ-पैर मुलायम होंगे व चेहरे पर चमक आएगी।

अगर आप मुंहासे की समस्या से परेशान हैं तो अपने चेहरे पर खट्टी दही का लेप लगाएं और चेहरा सूख जाए तब धो लें। थोड़े ही दिनों में आपको अप्रत्याशित लाभ होगा।

बादाम, गुलाब के फूल, चिरौंजी और पिसा जायफल रात को दूध में भिगो दें। सुबह इसे पीसकर इसका उबटन लगाएं। इससे चेहरे के दाग-धब्बे मिटते हैं और त्वचा कांतिमय बनती है

धब्बों की समस्या से परेशान हैं तो आधा चम्मच नारियल तेल में आधे नींबू का रस निचोड़े और चेहरे और कोहनी पर रगड़े, फिर गुनगुने पानी से धो लें।

मुलहठी के कुछ उपयोग












मुलहठी के कुछ उपयोग

* मुलहठी एक प्रसिद्ध और सर्वसुलभ जड़ी है।

*असली मुलेठी अंदर से पीली, रेशेदार एवं हल्की गंधवाली होती है। यह सूखने पर अम्ल जैसे स्वाद की हो जाती है। यह स्‍वाद में शक्‍कर से भी मीठी होती है। मुलेठी बड़ी ही गुणकारी औषधि के रूप में उपयोग की जाती है। मुलेठी गले की खराश, खांसी, उदरशूल क्षयरोग, श्‍वासनली की सूजन तथा मिरगी आदि के इलाज में उपयोगी है।

* मुलेठी का सेवन आँखों के लिए भी लाभकारी है। इसमें जीवाणुरोधी क्षमता पाई जाती है। यह शरीर के अन्‍दरूनी चोटों में भी लाभदायक होता है।

* भारत में इसे पान आदि में डालकर प्रयोग किया जाता है।

* मुलेठी या मुलहठी पान में भी डाल कर खाई जाती है। इसे मधुमेह के रोग को ठीक करने के लिये भी प्रयोग किया जाता है। आयुर्वेद के अनुसार मुलेठी अपने गुणों के कारण ही बढ़े हुए तीनों दोषों वात, कफ और पित्त को शांत करती है। कोई भी समस्या न हो तो भी कभी-कभी मुलेठी का सेवन कर लेना चाहिए आँतों के अल्सर ,कैंसर का खतरा कम हो जाता है तथा पाचनक्रिया भी एकदम ठीक रहती है।

* मुलहठी की एक से डेढ़ मीटर ऊँची बेल होती है और इमली जैसे छोटे-छोटे पत्ते होते हैं। इन बेलों पर बैंगनी रंग के फूल लगते हैं इसकी जड़ें जमीन के अंदर फैली होती हैं, जिनका औषधि के लिए उपयोग किया जाता है।

* मुलहठी स्वाद में मधुर, शीतल, पचने में भारी, स्निग्ध और शरीर को बल देने वाली होती है। इन गुणों के कारण यह बढ़े हुए तीनों दोषों को शांत करती है।

* खाँसी-जुकाम : कफ को कम करने के लिए मुलहठी का ज्यादातर उपयोग किया जाता है। बढ़े हुए कफ से गला, नाक, छाती में जलन हो जाने जैसी अनुभूति होती है, तब मुलहठी को शहद में मिलाकर चाटने से बहुत फायदा होता है।

* बड़ों के लिए मुलहठी के चूर्ण का इस्तेमाल कर सकते हैं। शिशुओं के लिए मुलहठी के जड़ को पत्थर पर पानी के साथ 6-7 बार घिसकर शहद या दूध में मिलाकर दिया जा सकता है। यह स्वाद में मधुर होती है अतः सभी बच्चे बिना झिझक के इसे चाट लेते हैं।

* मुलहठी बुद्धि को भी तेज करती है। अतः छोटे बच्चों के लिए इसका उपयोग नियमित रूप से कर सकते हैं।

* यह हल्की रेचक होती है। अतः पाचन के विकारों में इसके चूर्ण को इस्तेमाल किया जाता है। विशेषतः छोटे बच्चों को जब कब्ज होती है, तब हल्के रेच के रूप में इसका उपयोग किया जा सकता है। छोटे शिशु कई बार शाम को रोते हैं। पेट में गैस के कारण उन्हें शाम के वक्त पेट में दर्द होता है। उस समय मुलहठी को पत्थर पर घिसकर पानी या दूध के साथ पिलाने से पेट दर्द शांत हो जाता है।

* मुलहठी की मधुरता से पित्त का नाश होता है। आमाशय की बढ़ी हुई अम्लता एवं अम्लपित्त जैसी व्याधियों में मुलहठी काफी उपयुक्त सिद्ध होती है। आमाशय के अंदर हुए व्रण (अलसर) को मिटाने के लिए एवं पित्तवृद्धि को शांत करने के लि मुलहठी का उपयोग होता है। मुलहठी को मिलाकर पकाए गए घी का प्रयोग करने से अलसर मिटता है।यह कफ को आसानी से निकालता है। अतः खाँसी, दमा, टीबी एवं स्वरभेद (आवाज बदल जाना) आदि फेफड़ों की बीमारियों में बहुत लाभदायक है। कफ के निकल जाने से इन रोगों के साथ बुखार भी कम हो जाता है। इसके लिए ‪#‎मुलहठी‬ का एक छोटा टुकड़ा मुँह में रखकर चबाने से भी फायदा होता है।

*यह ठंडी प्रकृति की होती है और पित्त का नाश करती है।

* मुलेठी को काली-मिर्च के साथ खाने से कफ ढीला होता है। सूखी खांसी आने पर मुलेठी खाने से फायदा होता है। इससे खांसी तथा गले की सूजन ठीक होती है।

* मुलेठी का एक ग्राम चूर्ण नियमित सेवन करने से वे अपनी सुंदरता को लंबे समय तक बनाये रख सकती हैं।

* लगभग एक महीने तक , आधा चम्मच मुलेठी का चूर्ण सुबह शाम शहद कसाथ चाटने से मासिक सम्बन्धी सभी रोग दूर होते है।

* फोड़े होने पर मुलेठी का लेप लगाने से जल्दी ठीक हो जाते है।

* रोज़ ६ ग्रा. ‪#‎मुलेठी‬ चूर्ण , ३० मि.ली. दूध के साथ पीने से शरीर में ताकत आती है।

* लगभग ४ ग्रा. मुलेठी का चूर्ण घी या शहद के साथ लेने से ह्रदय रोगों में लाभ होता है।

* इसके चूर्ण को मुंह के छालों पर लगाने से आराम मिलता है।

* इसके आधा ग्राम रोजाना सेवन से खून में वृद्धि होती है।

* जलने पर मुलेठी और चन्दन के लेप से शीतलता मिलती है.

* मुलेठी की जड़ पेट के घावों को समाप्‍त करती है, इससे पेट के घाव जल्‍दी भर जाते हैं। पेट के घाव होने पर मुलेठी की जड़ का चूर्ण इस्‍तेमाल करना चाहिए।

* इससे न केवल गैस्ट्रिक अल्सर वरन छोटी आंत के प्रारम्भिक भाग ड्यूओडनल अल्सर में भी पूरी तरह से फायदा करती है। जब मुलेठी का चूर्ण ड्यूओडनल अल्सर के अपच, हाइपर एसिडिटी आदि पर लाभदायक प्रभाव डालता है। साथ ही अल्सर के घावों को भी तेजी से भरता है।

* टीबी रोग में फायदेमंद मुलेठी आंतों की टीबी के लिए भी फायदेमंद है।

* मुलेठी के चूर्ण से आँखों की शक्ति भी बढ़ती है सुबह तीन या चार ग्राम खाना चाहिये।

Monday, 3 August 2015

सफ़ेद बालों की समस्या

















सफ़ेद बालों की समस्या

* हर किसी को बाल काले ही अच्‍छे लगते हैं लेकिन जब यह बिना बुढापे के ही सफेद होने लगें तो दिल घबरा सा जाता है। पर आपको जानना होगा कि बाल सफेद क्‍यों हो जाते हैं वो भी तब जब हमारी खेलने खाने की उम्र होती है।

* जब बालों में मिलेनिन पिगमेंटेशन की कमी हो जाती है तब बाल अपना काला रंग खो देते हैं और सफेद हो जाते हैं।

* हांलाकि बालों का सफेद होना आज कल आम सी बात हो गई है इसलिये इसके लिये घबराना बिल्‍कुल नहीं चाहिये। आज हम आपको कुछ ऐसे घरेलू उपाय बताएंगे जिसे आजमा कर आपके सफेद हो रहे बाल काले होने शुरु हो जाएगें....!

* बालों का असमय सफेद होना एक बड़ी समस्या बन चुकी है। इसके लिए कई लोग कलर का इस्तेमाल करते हैं। हालांकि कलर बालों को जड़ से कमजोर बना सकता है....!

* आंवले को न सिर्फ डाइट में शामिल करें बल्कि मेंहदी में मिलाकर इसके घोल से बालों की कंडिशनिंग करते रहें। चाहे तो आंवले को बारीक काट लें और गर्म नारियल तेल में मिलाकर सिर पर लगाएं।

* आमला हो या उसका पाउडर, दोनों ही बालों को काला करने में मददगार होते हैं। आमला का रस अगर बादाम के तेल में मिक्‍स कर के बालों में लगाया जाए तो बाल काले होगें।

* काली मिर्च के दानों को पानी में उबाल कर उस पानी को बाल धोने के बाद सिर में डालें। लंबे समय तक बालों में इस तरह करने से यह असर दिखाती है।

* सफेद हो चुके बालों को अगर आप ब्लैक टी या कॉफी के अर्क से धोएंगें तो आपके सफेद होते बाल दोबारा से काले होने लगेगें। ऐसा आप दो दिन में एक बार जरूर करें। काली चाय को बनाने के लिए पैन में पानी डालें, उसमें 2 चम्‍मच चाय की पत्‍ती डाल कर खौलाएं और जब यह पानी ठंडा हो जाए तो इसे छान कर बालों में लगाएं। इसे लगाने के बाद बालों में शैंपू न लगाएं वरना असर खत्‍म हो जाएगा।

* अपनी डाइट में कडी पत्‍ता शामिल करें। इसे आप चटनी के रूप में खा सकते हैं। इसको खाने से बालों का सफेद होना रुक जाएगा। दक्षिण भारतीय महिलाए सबसे जादा कड़ी पत्ते का प्रयोग करती है और उनके बाल असमय सफ़ेद नहीं होते है .

* बालों में एलोवेरा जेल लगाने से भी बालों का झडऩा और ‪#‎सफेद‬ होना बंद हो जाता है। इसके लिए आप एलोवेरा जेल में नींबू का रस बना कर पेस्ट बना लें और इस पेस्ट को बालों में लगाएं।

* हिना और दही को बराबर मात्रा में मिलाकर पेस्ट बना लें और इस पेस्ट को बालों में लगाइये। इस घरेलू उपचार को हफ्ते में एक बार लगाने से ही ‪#‎बाल‬ काले होने लगते हैं।

* नहाने से कुछ देर पहले अपने बालों में ‪‎प्याज‬ का पेस्ट लगायें। इससे आपके सफेद बाल काले होने शुरू हो ही जाएंगे, बालों में चमक आएगी और साथ ही बालों का गिरना भी रुक जाएगा।

* भृंगराज और अश्वगंधा की जड़ें बालों के लिए वरदान मानी जाती हैं। इनका पेस्ट बना कर नारियल तेल में मिलाकर बालों की जड़ों में एक घंटे के लिए लगाएं। फिर बालों को गुनगुने पानी से अच्छी तरह से धो लें|

* प्रतिदिन देशी गाय का दूध बालों में लगाने से बाल कुदरती तौर पर काले होने लगते हैं। ऐसा हफ्ते में एक दिन करें | गाय का शुद्ध घी से सिर की मालिश करके भी ‪‎बालों‬ के सफेद होने की समस्या दूर होगी |

* नहाने से पहले कढ़ी पत्ते को नहाने के पानी में छोड़ दें और एक घंटे के बाद उस पानी से सिर धो लें। या फिर आंवले की तरह कढ़ी पत्ते को भी बारीक काटकर और गर्म नारियल तेल में मिलाकर सिर पर लगाएं। नारियल तेल को कडी पत्‍ता और आमला के साथ गरम करें। इस तेल को लगातार लगाने से बाल मजबूत होगें और उसका पुराना रंग वापस आ जाएगा।

* बालों को सफेद होने से रोकने के लिये बालों और सिर की त्‍वचा पर अम्‍लान का रस लगाएं। इससे बाल ज्‍यादा उगते हैं और वह शाइनी और कोमल होते हैं।

सर्वाईकल स्पौण्डिलाइटिस














सर्वाईकल स्पौण्डिलाइटिस

गर्दन में स्थित रीढ़ की हड्डियों में लंबे समय तक कड़ापन रहने, उनके जोड़ों में घिसावट होने या उनकी नसों के दबने के कारण बेहद तकलीफ होती है। इस बीमारी को सर्वाईकल स्पौण्डिलाइटिस कहा जाता है। दूसरे नाम सर्वाइकल ऑस्टियोआर्थराइटिस, नेक आर्थराइटिस और क्रॉनिक नेक पेन के नाम से जाना जाता है। इसमें गर्दन एवं कंधों में दर्द तथा जकड़न के साथ-साथ सिर में पीड़ा तथा तनाव बना रहता है।

आधुनिक चिकित्सा में सर्वाइकल स्पौण्डिलाइटिस का इलाज फिजियोथेरेपी तथा दर्द निवारक गोलियां हैं। इनसे तात्कालिक आराम तो मिल जाता है, किंतु यह केवल अस्थायी उपचार है। योग ही इस समस्या का स्थाई समाधान है, क्योंकि यह इस बीमारी को जड़ से ठीक कर देता है। लेकिन जब रोगी को चलने-फिरने में दिक्कत आने लगे तो दवाएं, फिजियोथेरेपी तथा आराम ही करना चाहिए। ऐसी स्थिति में यौगिक क्रियाओं का अभ्यास नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह स्थिति रोग की गंभीर स्थिति होती है। आराम आते ही इससे पूरी तरह मुक्ति के लिए किसी कुशल मार्गदर्शक की निगरानी में यौगिक क्रियाओं का अभ्यास प्रारम्भ कर देना चाहिए।

सर्वाइकल स्पॉन्डलाइटिस के लक्षण
कई बार गर्दन का दर्द हल्के से लेकर ज्यादा हो सकता है। ऐसा अक्सर ऊपर या नीचे अधिक बार देखने के कारण या गाड़ी चलाने, किताबें पढ़ने के कारण यह दर्द हो सकता है।

गर्दन में दर्द और गर्दन में कड़ापन स्थिति को गम्भीर करने वाले मुख्य लक्षण है।

सिर का दर्द, मुख्य रूप से पीछे का दर्द इसका लक्षण है।

गर्दन को हिलाने पर प्राय:गर्दन में पिसने जैसी आवाज़ का आना।

हाथ, भुजा और उंगलियों में कमजोरियां या सुन्नता।

व्यक्ति को हाथ और पैरों में कमजोरी के कारण चलने में समस्या होना और अपना संतुलन खो देना।

गर्दन और कंधों पर अकड़न या अंगसंकोच होना।

रात में या खड़े होने के बाद या बैठने के बाद, खांसते, छींकते या हंसते समय और कुछ दूर चलने के बाद या जब आप गर्दन को पीछे की तरफ मोड़ते हैं तो दर्द में वृद्धि हो जाना।

सूक्ष्म व्यायाम रामबाण

1. सीधा बैठकर चेहरे को धीरे-धीरे दाएं कंधे की ओर ले जाएं। इसके बाद चेहरे को धीरे-धीरे सामने की ओर लाकर बाएं कंधे की ओर ले जाएं। इस क्रिया को प्रारम्भ में 5-7 बार करें। धीरे-धीरे बढ़ाकर इसे 15-20 बार तक करें। अब सिर को पीछे की ओर झुकाएं। सिर को आगे की ओर झुकाना इस रोग में वजिर्त है। इसके पश्चात सिर को दाएं-बाएं कंधे की ओर झुकाएं। यह क्रिया भी धीरे-धीरे 15 से 20 बार तक करें।

2. सीधा बैठकर या खड़े होकर दोनों हाथों की हथेलियों को आपस में गूंथें। इसके बाद हथेलियों को सिर के पीछे मेडुला पर रखें। अब हथेलियों से सिर को तथा सिर से हथेलियों को एक-दूसरे की विपरीत दिशा में पूरे जोर से इस प्रकार दबाएं कि सिर थोड़ा भी आगे या पीछे न झुकने पाए। इसके पश्चात् हथेलियों को माथे पर रखकर इसी प्रकार का विपरीत दबाव दीजिए। ये क्रियाएं 8 से 10 बार करें। अब दाईं हथेली को दाएं गाल पर रखकर एक-दूसरे के विपरीत दबाव डालिए। यही क्रिया बाएं गाल से भी करें। इन्हें भी 8 से 10 बार करें।

3. सीधा खड़ा होकर दोनों हाथों को घड़ी की सुई की दिशा में तथा इसके बाद घड़ी की सुई की विपरीत दिशा में 10 से 15 बार गोल-गोल घुमाएं। इसके पश्चात् दोनों हाथों को कंधे की ऊंचाई तक अगल-बगल उठाकर उन्हें कोहनी से मोड़ लें। इस स्थिति में हाथों को 10 से 15 बार वृत्ताकार घुमाएं। इसके पश्चात् वापस पूर्व स्थिति में आएं।

4. अपने दोनों हाथो को अपने कंधो पर रखे, अब दोनों कोहनियो को घडी की दिशा में घूमते हुए एक गोला बनाये और कोशिश करे दोनों कोहनियाँ आपस में एक दूसरे को छुए, १० बार ऐसा करे और और १० बार घडी की विपरीत दिशा में ऐसा करे।

आसन
एक-दो सप्ताह तक उपरोक्त क्रियाओं का अभ्यास करने के बाद अपने अभ्यास में आसनों को जोड़ देना चाहिए। इसके लिए मत्स्यासन, वज्रासन, मकरासन, धनुरासन, अर्धमत्स्येन्द्रासन तथा भुजंगासन बहुत उपयोगी हैं। अगर हर्निया की शिकायत हो तो भुजंगासन ना करे।

सूर्य नमस्कार :- सूर्य नमस्कार सर्वाइकल के लिए रामबाण योग मुद्रा हैं। हर रोज़ सुबह नित्य कर्म से निर्व्रत हो कर इसको १० से १५ बार दोहराये।

प्राणायाम
रोग की गंभीर स्थिति में झटके वाले किसी भी प्राणायाम का अभ्यास नहीं करना चाहिए। इस रोग में नाड़ियों को शांत तथा स्थिर करने के लिए नाड़ीशोधन अनुलोम विलोम, उज्जायी एवं भ्रामरी प्राणायाम बहुत लाभकारी है।

ध्यान एवं योग निद्रा
रीढ़ की हड्डी की बीमारी में ध्यान और योग निद्रा का अभ्यास बहुत लाभकारी है। इस स्थिति में शरीर को पूरी क्रिया के दौरान बिल्कुल स्थिर रखते हुए अपनी सहज श्वास-प्रश्वास पर मन को एकाग्र करना चाहिए। इसका अभ्यास आरामदायक अवधि तक करें।

इन बातों का भी रखें ध्यान
पीठ के बल बिना तकिया के सोयें। पेट के बल न सोयें। कड़े बिछावन पर सोना चाहिए ताकि रीढ़ की हड्डी ठीक रहे।

वजन नहीं उठाना चाहिए और न ही सिर झुकाकर काम करना चाहिए।
ठण्डे और गर्म पैक से चिकित्सा दर्द में कमी लयेगा। पानी का ठण्डा पैकेट दर्द करने वाले क्षेत्र पर रखें। और फिर पानी का गर्म पैकेट दर्द करने वाले क्षेत्र पर रखें।

आपका डॉक्टर किसी फिज़ियोथेरेपिस्ट के पास जाने की सलाह दे सकता है। यह भौतिक उपचार आपके दर्द में कमी लायेगा।

आप किसी मसाज़ चिकित्सक से भी मिला सकते हैं जो एक्यूपंक्चर और कशेरुका को सही करने का जानकार हो। कुछ ही बार इसका प्रयोग आपको आराम पहुंचायेगा।

गर्दन की नसों को मजबूत करने के लिये गर्दन का व्यायाम करें।
अपनी गाड़ी को सड़क पर मिलने वाले गड्ढ़ों पर न चलायें। यह दर्द को बढ़ा देगा।

कम्प्यूटर पर अधिक देर तक न बैठें। और बीच बीच में पैरो के पंजो पर खड़े हो कर दोनों हाथो को आपस में मिला कर ऊपर आकाश की तरह धकेले। कंधो को और गर्दन को थोड़ा हिला ले।

विटामिन बी और कैल्शियम से भरपूर आहार का सेवन करें। बादाम, पिस्ता और अखरोट में विटामिन इ और बी - 1, बी - 6, और बी - 9 के साथ प्रोटीन और मैग्नीशियम पाया जाता हैं, दूध, गाजर, स्ट्रॉबेरी, केला, पत्ता गोभी, प्याज, इनको भी अपने भोजन में स्थान दे।

घरेलु नुस्खे।
चूना : - चूना जो पान में खाते हैं, अगर आपको पत्थरी की समस्या नहीं है तो चूना एक बहुत बढ़िया औषिधि हैं सर्वाइकल के लिए, गेंहू के दाने सामान चूना पानी में, जूस में, या दही में मिला कर खाए।

विजयसार का चूर्ण :- विजयसार का चूर्ण एक बहुत बढ़िया औषिधि हैं, किसी भी प्रकार के हड्डियों के सम्बंधित रोग के लिए। 1 चम्मच विजयसार का चूर्ण शाम को एक गिलास पानी में भिगो कर रख दे, इसको सुबह 15 घंटे के बाद कपडे से छान कर अच्छी तरह निचोड़ कर घूँट घूँट कर पिए। कैसा भी कोई दर्द हैं, 1 महीने से 3 महीने के अंदर सही होगा, इसके साथ में इस से आप को अगर मधुमेह रोग भी हैं तो उसके लिए भी ये रामबाण हैं।

4 लहसुन 1 गिलास दूध में उबाले, सोते समय पीजिये।
रात को सोते समय दोनों नाक में 5-5 बूंदे गाय के घी की डाले।
उपरोक्त विधियां और नुस्खे अपनाने से कैसा भी सर्वाइकल हो 1 से 3 महीने में बहुत आराम आएगा।

एसिडिटी (अलसर की प्रथम स्थिति) के घरेलु उपचार















एसिडिटी (अलसर की प्रथम स्थिति) के घरेलु उपचार

पाचन तंत्र की विकृति के कारण से अपचन होता हैं उसी को आयुर्वेद में अम्लपित्त या एसिडिटी कह देते हैं। शरीर में पित्त बढ़ जाता हैं। ये एसिड इतना खतरनाक होता हैं के इसकी तीव्रता आप इस से लगा सकते हैं के पेट में बनने वाला ये एसिड लोहे के ब्लेड को भी गलने की क्षमता रखता हैं। 
अनियमित जीवनशैली और गलत आहार ही है एसिडिटी की मुख्य वजह।
अगर समय से इसका उपचार ना किया जाए तो ये अलसर का रूप धारण कर लेती हैं। इसलिए जहाँ तक संभव हो आप अपना खान पान सुधार ले।
ज़्यादा मिर्च वाले मसाले वाले तले हुए पदार्थ ना खाए, खाली पेट चाय कॉफ़ी तो ज़हर हैं, और संभव हो सके तो इसको दिन में भी ना पिए। शराब और मासाहार भी इसका मुख्य कारण हैं।

कोका कोला, पेप्सी, ड्यू, थम्स अप, ये सभी सॉफ्ट ड्रिंक्स एसिडिटी के लिए ज़हर समान हैं। इनको अपने जीवन से त्याग दे।
भोजन के साथ पानी का सेवन भी अमल पित्त को बढ़ा देता हैं, पानी भोजन के 1 घंटे बाद ही पिए। अगर भोजन बहुत ज़्यादा रुक्षण हो तो साथ में छाछ या मट्ठा ले, इसको आप नियमित भी भोजन के साथ ले सकते हैं।
एसिडिटी होने पर मुलेठी का चूर्ण या काढ़ा बनाकर उसका सेवन करना चाहिए। इससे एसिडिटी में फायदा होता है।

नीम की छाल का चूर्ण या रात में भिगोकर रखी छाल का पानी छानकर पीना चाहिए। ऐसा करने से अम्लापित्त या एसिडिटी ठीक हो जाता है।
एसिडिटी होने पर त्रिफला चूर्ण का प्रयोग करने से फायदा होता है। त्रिफला को दूध के साथ पीने से एसिडिटी समाप्त होती है।

दूध में मुनक्का डालकर उबालना चाहिए। उसके बाद दूध को ठंडा करके पीने से फायदा होता है और एसिडिटी ठीक होती है।

गिलास गुनगुने पानी में थोड़ी सी पिसी काली मिर्च तथा आधा नींबू निचोड़कर नियमित रूप से सुबह पीने से लाभ होता है।

सौंफ, आंवला व गुलाब के फूलों का चूर्ण बनाकर उसे सुबह-शाम आधा-आधा चम्मच लेने से एसिडिटी में लाभ होता है।

एसिडिटी होने पर सलाद के रूप में मूली खाना चाहिए। मूली काटकर उस पर काला नमक तथा काली मिर्च छिडककर खाने से फायदा होता है।
जायफल तथा सोंठ को मिलाकर चूर्ण बना लीजिए। इस चूर्ण को एक-एक चुटकी लेने से एसिडिटी समाप्त होती है।

एसिडिटी होने पर कच्ची सौंफ चबानी चाहिए। सौंफ चबाने से एसिडिटी समाप्त हो जाती है।

अदरक और परवल को मिलाकर काढा बना लीजिए। इस काढे को सुबह-शाम पीने से एसिडिटी की समस्या समाप्त होती है।

सुबह-सुबह खाली पेट गुनगुना पानी पीने से एसिडिटी में फायदा होता है। 
नारियल का पानी पीने से एसिडिटी की समस्या से छुटकारा मिलता है।
लौंग एसिडिटी के लिए बहुत फायदेमंद है। भोजन के बाद 1 लौंग चूसे, ध्यान रहे ज़्यादा लौंग खाने से गर्मी और बवासीर जैसी समस्याओ का सामना भी करना पड़ सकता हैं, इसलिए दोपहर के भोजन के बाद सिर्फ एक लौंग।

गुड़, केला, बादाम और नींबू खाने से एसिडिटी जल्दी ठीक हो जाती है। 
पानी में पुदीने की कुछ पत्तियां डालकर उबाल लीजिए। हर रोज खाने के बाद इन इस पानी का सेवन कीजिए। एसिडिटी में फायदा होगा।
अंकुरित भोजन एसिडिटी और अलसर के लिए रामबाण का काम करता हैं, जहाँ तक संभव हो नाश्ते में अंकुरित भोजन ले। अंकुरण के लिए अनाज के साथ साथ दालो का प्रयोग करे।

भोजन से आधा घंटा पहले सलाद खाए, भोजन में हरी सब्जियों का सेवन करे। 

जिनको एसिडिटी हैं वह सुबह खाली पेट आधा गिलास गाय का दूध ले कर इसमें आधा गिलास घड़े का पानी मिला ले और दो छोटी इलायची को पीस कर मिला कर पिए।

खाने से आधा घंटे पहले और खाने के आधा घंटे के बाद अगर आप २ चम्मच एलो वेरा जूस ले तो ये हाइपर एसिडिटी का स्थायी इलाज हैं।
खाने के बाद आधा चम्मच कच्चा जीरा चबा चबा कर खाए तो हाइपर एसिडिटी में तुरंत राहत मिलती हैं।

अगर ज़्यादा समय तक एसिडिटी रहे तो ये अल्सरेटिव कोलाइटिस हो सकती हैं, ऐसी स्थिति में आप सुबह खाली पेट और दोपहर में खाने से 1 घंटा पहले और शाम को आधा गिलास गाय का दूध ले कर इसमें आधा गिलास घड़े का पानी मिला ले और दो छोटी इलायची को पीस कर मिला कर पिए। उपरोक्त उपचार अलसर के लिए भी अत्यंत प्रभावशाली हैं। इसके साथ आप बेल अनार गाय के दही से बानी छाछ और एलो वेरा का सेवन नियमित करे। अलसर की ज़्यादा जानकारी आप हमारी इस पोस्ट से ले सकते हैं। 

इसके लिए आप सुबह नित्य कर्म से निर्व्रत हो कर ये प्राणायाम भी नियमित करे। 

कपाल भाति और भस्त्रिका प्राणायाम इसके लिए बहुत उपयोगी हैं। और ध्यान रखे कपाल भाति तेज़ गति से नहीं करनी हैं, मंद गति से करे।
वो इंसान कभी रोगी नहीं हो सकते जो भोजन ऋतू के अनुसार, अपनी प्रकृति के अनुसार और भूख से कम करे।