परवल की सब्जी के गुण :-
परवल यह साधारण सब्जी नहीं है इसके विशेष गुण इंसान के लिए बेहद फायदेमंद होते है। परवल को अंग्रेजी में मोईंटेड गोर्ड कहते हैं और इसका वानस्पतिक नाम है ट्रायकोसेन्थ्स डायोका। आपको परवल के एैसे औषधिय गुणों के बारे में बताएँगे जो शायद ही आप जानते हों।
परवल के औषधिय गुण :
मोटापा कम करता है
मोटापा दूर करने में परवल बेहद फायदेमंद है। परवल के जूस में थोड़ा सौंफ और पिसी हुई हींग का चूर्ण मिलाकर सेवन करने से मोटापा दूर हो जाता है। और शरीर को उर्जा देने में परवल का जूस बेहद फायदेमंद होता है।
पेट की सूजन में सहायक है परवल की सब्जी :
कई बार हमें पेट में सूजन की समस्या और पेट में पानी भर जाने की शिकायत हो जाती है इसमें परवल किसी दवा से कम नहीं है। एैसे में नियमित परवल की सब्जी खाना शूरू कर दें। फायदा जरूर मिलेगा।
सिर दर्द में सहायक है परवल की सब्जी :
1- सिर दर्द होने पर परवल के रस से सिर पर मालिश करें।
2- परवल को अच्छे से पीसकर उसके निकले रस को माथे पर लेप लगाने से भी सिर दर्द दूर होता है।
3- परवल की पत्तियों का रस माथे पर लगाने से सिर दर्द ठीक हो जाता है।
फोड़े फुंसियों में परवल का लाभ :
परवल के पत्ते फोड़े फुंसियों को खत्म करने में लाभदायक होते हैं। इसके पत्तों को पीसकर फोड़े व फुंसियों तथा घाव पर लगाने से ये जल्दी सूख जाते हैं।
पेट के कीड़े में सहायक है परवल की सब्जी :
हरे धनिये की पत्तियों और परवल की बराबर 20-20 ग्राम मात्रा में अच्छे से पीस लें और एक पाव पानी में रात भर के लिए भिगो कर रख लें। सुबह छानकर इसके तीन हिस्से कर लें और हर हिस्से में थोड़ा शहद डालकर दिन में तीन बारी रोगी को दें। एैसा करने से पेट के कीड़े मर जाते हैं।
बढ़ती उम्र को रोके :
उम्र बढ़ने के साथ चेहरे पर झाइयां दिखने लगती हैं। इन्हें रोकने के लिए परवल की सब्जी का सेवन करना चाहिए। परवल में विटामिन और एंटीआक्सीडेंट होता है।
परवल को बीजों के साथ खाने से कब्ज की परेशानी दूर होती है।
परवल की सब्जी और परवल का जूस इंसान को जो फायदे दे सकता है वह शायद ही दूसरी कोई सब्जी देती हो। अपने खाने में परवल को जरूर शमिल करें।
मासिक धर्म के दोषों को दूर करे
हमारी माताओं -बहनो को मासिक धर्म (Periods) से सबन्धित समस्याएँ होना साधारण बात है अक्सर माहवारी की अनियमिता हो जाती है ,अर्थात कई बार रक्तस्त्राव बहुत अधिक हो जाता है और कई बार क्या होता है बिलकुल ही नहीं होता और कभी कभी ऐसा भी होता है की ये 2-3 दिन होना चाहिए लेकिन 1 ही दिन होता है ,और कई बार 15 दिन ही दुबारा आ जाता है और कई बार 2 महीने तक नहीं आता -
माताओं और बहनों के लिए मासिक - धर्म चक्र की अनियमिता की जितनी सभी समस्याएँ है इसकी हमारे आयुर्वेद मे बहुत ही अच्छी और लाभकारी ओषधि है वो है अशोक के पेड़ के पत्तों की चटनी -
लेकिन एक बात याद रखे आशोक का पेड़ दो तरह का है एक तो सीधा है बिलकुल लंबा ज़्यादातर लोग उसे ही अशोक समझते है जबकि वो नहीं है एक और होता है पूरा गोल होता है और फैला हुआ होता है वही असली अशोक का पेड़ है जिसकी छाया मे माता सीता ठहरी थी -
तो आप इस असली अशोक के 5-6 पत्ते तोड़िए उसे पीस कर चटनी बनाओ अब इसे एक से डेढ़ गिलास पानी मे कुछ देर तक उबाले तथा इतना उबाले की पानी आधा से पौन गिलास रह जाए .फिर उसे बिलकुल ठंडा होने के लिए छोड़ दीजिये और फिर उसको बिना छाने हुए पीये ! सबसे अच्छा है सुबह खाली पेट पीना -
कितने दिन तक पीना है ?
30 दिन तक लगातार पीना उससे मासिक धर्म (periods ) से सबन्धित सभी तरह की बीमारियाँ ठीक हो जाती हैं ! ये सबसे अधिक अकेली बहुत ही लाभकारी दवा है ! जिसका नुकसान कोई नहीं है -और अगर कुछ माताओ-बहनो को 30 दिन लेने से थोड़ा आराम ही मिलता है ज्यादा नहीं मिलता तो वो और अगले 30 दिन तक ले सकती है वैसे लगभग मात्र 30 दिन लेने से ही समस्या ठीक हो जाती है -
ये तो हुई महवारी मे अनियमिता की बात ! अब बात करते पीरियड्स के दौरान होने वाले दर्द की. बहुत बार माताओ -बहनो को ऐसे समय मे बहुत अधिक शरीर मे अलग अलग जगह दर्द होता है कई बार कमड़,दर्द होना ,सिर दर्द होना ,पेट दर्द पीठ मे दर्द होना जंघों मे दर्द होना ,स्तनो मे दर्द,चक्कर आना ,नींद ना आना बेचैनी होना आदि तो ऐसे मे तेज pain killer लेने से बचे क्योंकि इनके बहुत अधिक side effects है , एक बीमारी ठीक करेंगे 10 साथ हो जाएगी और बहुत से pain killer तो विदेशो मे 20 वर्षो से ban है जो भारत मे बिकती है -
तो आयुर्वेद मे भी इस तरह के दर्दों की तात्कालिक (instant relief ) दवाये है जिसका कोई side effect नहीं है ! तो पीरियडस के दौरान होने वाले दर्दों की सबसे अच्छी दवा है गाय का घी ,अर्थात देशी गाय का घी ! एक चम्मच देशी गाय का घी को एक गिलास गर्म पानी मे डालकर पीना ! पहले एक गिलास पानी खूब गर्म करना जैसे चाय के लिए गर्म करते है बिलकुल उबलता हुआ ! फिर उसमे एक चम्मच देशी गाय का घी डालना ,फिर ना मात्र सा ठंडा होने पर पीना ,चाय की तरह से बिलकुल घूट घूट करके पीना ! बिलकुल सिप सिप करके पीना है ! तात्कालिक (instant relief ) एक दम आराम आपको मिलेगा और ये लगातार 4 -5 दिन जितने दिन पीरियड्स रहते है पीना है उससे ज्यादा दिन नहीं पीना ! ये पीरियडस के दौरन होने वाले सब तरह के दर्दों के लिए instant relief देता है सामान्य रूप से होने वाले दर्दों के लिए अलग दवा है -
एक बात जरूर याद रखे घी देशी गाय का ही होना चाहिए , विदेशी जर्सी, होलेस्टियन ,फिरिजियन भैंस का नहीं -देशी गाय की पहचान है की उसकी पीठ गोल सा ,मोटा सा हम्प होता है -कोशिश करे घर के आस पास पता करे देशी गाय का -उसका दूध लाकर खुद घी बना लीजिये ! बाजारो मे बिक रहे कंपनियो के घी पर भरोसा ना करें -या भारत की सबसे बड़ी गौशाला जिसका नाम पथमेड़ा गौशाला है जो राजस्थान मे है यहाँ 2 लाख से ज्यादा देशी गाय है इनका घी खरीद लीजिये ये पूरा देशी गाय के दूध से ही बना है ! काफी बड़े शहरो मे उपलब्ध है !
अंत जब तक आपको जीवन मे आपको मासिक धर्म रहता है आप नियमित रूप से चूने का सेवन करें-
गीला चूना , जो पान वाले के पास से मिलता है कितना लेना है - गेहूं के दाने जितना ही ले -
इसे कैसे लेना है .?
बढ़िया है की सुबह सुबह खाली पेट लेकर काम खत्म करे आधे से आधा गिलास पानी हल्का गर्म करे गेहूं के दाने के बराबर चूना डाले चम्मच से हिलाये पी जाए-
इसके अतिरिक्त दही मे ,जूस मे से सकते है बस एक बात का ध्यान रखे कभी आपको पथरी की समस्या रही तो चूने का सेवन ना करे-
ये चुना बहुत ही अच्छा है बहुत ही ज्यादा लाभकरी है मासिक धर्म मे होने वाली सब तरह की समस्याओ के लिए-
इसके अतिरिक्त आप जंक फूड खाने से बचे , और नियमित सैर करे-
प्रोस्टेट ग्रन्थि बढने (enlarged prostate)के सरल उपचार :-
प्रोस्टेट एक छोटी सी ग्रंथि होती है जिसका आकार अ्खरोट के बराबर होता है। यह पुरुष के मूत्राषय के नीचे और मूत्रनली के आस-पास होती है। ५० की आयु के बाद बहुधा प्रोस्टेट ग्रन्थि का आकार बढने लगता है।इसमें पुरुष के सेक्स हार्मोन प्रमुख भूमिका होती है। जैसे ही प्रोस्टेट बढती है मूत्र नली पर दवाब बढता है और पेशाब में रुकावट की स्थिति बनने लगती है। पेशाब पतली धार में ,थोडी-थौडी मात्रा में लेकिन बार-बार आता है कभी-कभी पेशाब टपकता हुआ बूंद बूंद जलन के साथ भी आता है। कभी-कभी पेशाब दो फ़ाड हो जाता है। रोगी मूत्र रोक नहीं पाता है। रात को बार -बार पेशाब के लिये उठना पडता जिससे नीद में व्यवधान पडता है। यह रोग ७० के उम्र के बाद उग्र हो जाता है। यह देखने में आया है कि ६० के पार ५०% पुरुषों और ७०-८० की आयु पार कर चुके लगभग ९०% पुरुषों में प्रोस्टेट वृद्धि के लक्षण दिखाई पडते हैं।
प्रोस्टेट वृद्धि के लक्षण--
१) पेशाब करने में कठिनाई मेहसूस होना।
२) थौडी २ देर में पेशाब की हाजत होना। रात को कई बार पेशाब के लिये उठना।
३) पेशाब की धार चालू होने में विलंब होना।
४) मूत्राषय पूरी तरह खाली नहीं होता है। मूत्र की कुछ मात्रा मूत्राषय में शेष रह जाती है। इस शेष रहे मूत्र में रोगाणु पनपते हैं।
५) मालूम तो ये होता है कि पेशाब की जोरदार हाजत हो रही है लेकिन बाथरूम में जाने पर बूंद-बूंद या रुक-रुक कर पेशाब होता है।
६) पेशाब में जलन मालूम पडती है।
७ ) पेशाब कर चुकने के बाद भी मूत्र की बूंदे टपकती रहती हैं, याने मूत्र पर नियंत्रण नहीं रहता।
८) अंडकोषों में दर्द उठता रहता है।
९) संभोग में दर्द के साथ वीर्य छूटता है।
इस बीमारी को नियंत्रित करने वाले कुछ घरेलू उपचार यहां प्रस्तुत कर रहा हूं जिनका समुचित प्रयोग करने से इस व्याधि से मुक्ति पाई जा सकती है।
१) दिन में ३-४ लिटर पानी पीने की आदत डालें। लेकिन शाम को ६ बजे बाद जरुरत मुताबिक ही पानी पियें ताकि रात को बार बार पेशाब के लिये न उठना पडे।.
२) अलसी को मिक्सर में चलाकर पावडर बनालें । यह पावडर २० ग्राम की मात्रा में पानी में घोलकर दिन में दो बार पीयें। बहुत लभदायक उपचार है।
३) कद्दू में जिन्क पाया जाता है जो इस रोग में लाभदायक है। कद्दू के बीज की गिरी निकालकर तवे पर सेक लें। इसे मिक्सर में पीसकर पावडर बनालें। यह चूर्ण २० से ३० ग्राम की मात्रा में नित्य पानी के साथ लेने से प्रोस्टेट सिकुडकर मूत्र खुलासा होने लगता है।
४) सोयाबीन में फ़ायटोएस्टोजीन्स होते हैं जो शरीर मे टेस्टोस्टरोन का लेविल कम करते हैं। रोज ३० ग्राम सोयाबीन के बीज गलाकर खाना लाभदायक उपचार है।
५) दो टमाटर प्रतिदिन अथवा हफ़्ते में कम से कम दो बार खाने से प्रोस्टेट केंसर का खतरा ५०% तक कम हो जाता है। इसमें पाये जाने वाले लायकोपिन और एन्टिआक्सीडेंट्स केंसर पनपने को रोकते हैं।
६) जिन्क एवं विटामिन डी३ प्रोस्टेट बढने की बीमारी में उत्तम परिणाम प्रस्तुत करते हैं। ३० एम जी जिन्क प्रतिदिन लेने से अच्छे परिणाम आते हैं। विटामिन डी३ याने केल्सीफ़ेर्रोल ६०० एम जी प्रतिदिन लेना चाहिये।
स्वप्नदोष का घरेलु इलाज
रात के समय सोते हुए अपने आप या अश्लील स्वप्न देखते हुए वीर्य का निकल जाना ही स्वप्नदोष कहलाता है। फिल्मों में अश्लील दृश्यों को देखना, स्कूल कॉलजों मे लड़के- लड़कियों का खुले मे घूमना, नवयुवकों के सर में हमेशा कामवासना का ध्यान रहना, लड़कियों के बारे ज्यादा सोचना, उनके अंगों को कामुक नजरों से देखना, अधिक मैथुन करना, किसी लड़की के स्पर्श करने पर सोचना, सहवास में खोये रहना मसालेदार भोजन खाने, चाय, शराब व रात को गर्म दूध पीना ही स्वप्नदोष का कारण बनता हो सकता है। कभी-कभी यह कारण न होकर इसका उलटा होता है। जैसे हार्मोन के बढ़ने पर वीर्य ज्यादा बनने लगते हैं। इससे शरीर में गर्मी पैदा होती है और वीर्य अपने आप रात में या जरा सी गर्मी होते ही बाहर निकल पड़ता है। इसमें रोगी का कोई दोष नहीं होता है। स्वप्नदोष अगर महीने या साल में होता है तो डरने की कोई बात नहीं मगर रोज या हफ्ते में हो तो इसका उपचार जल्द से जल्द कराना चाहिए नहीं तो रोगी नपुंसक भी बन सकता है।
इस रोग के लक्षण :
इस रोग से ग्रस्त रोगी का शरीर कमजोर हो जाता है। चेहरे की चमक खत्म हो जाती है। रात मे सोते समय ही वीर्य निकल जाता है। भूख की कमी, बैचेनी, बुखार, हाथ-पैरों के तलवे में जलन, वीर्य का पतला पन, आलस्य, कमर में दर्द, स्वरभंग, नजर का कमजोर होना आदि लक्षण दिखाई देने लगता है।
भोजन तथा परहेज :
शिश्न को रोज सुबह के समय 10 मिनट तक ठंड़े पानी की धार से धोयें। मानसिक शान्ति तथा सुबह-शाम टहलना भी जरूरी है। रोज व्यायाम करें तथा
त्रिफला चूर्ण एक चम्मच गर्म पानी से खाना खाने के बाद लें। गर्मी पदार्थ, रात को सोने से पूर्व गर्म दूध, गुड़, सिगरेट, शराब आदि का सेवन न करें और पेट में कब्ज न बनने दें।
घरेलु उपचार smile emoticon
1. मुलहठी : मुलहठी के चूर्ण को मक्खन और शहद के साथ मिलाकर खाने से लाभ होता है।
मुलहठी के चूर्ण में 2 ग्राम की मात्रा में शहद और घी मिलाकर खाने से स्वप्नदोष की बीमारी खत्म हो जाती है।
2. बबूल : बबूल की गोंद 10 ग्राम मात्रा में रात को 100 मिलीलीटर पानी में डालकर रख दें। सुबह उठने पर गोंद को थोड़ा-सा मसलकर पानी में छानकर मिश्री मिलाकर पीने से स्वप्नदोष में बहुत लाभ होता है।
बबूल की फली का चूर्ण 3 से 6 ग्राम चीनी में मिलाकर सुबह-शाम खाने से लाभ मिलता है।
3. चोपचीनी : चोपचीनी का पिसा हुआ चूर्ण 10 ग्राम, मिश्री 10 ग्राम और घी 10 ग्राम मिलाकर 7 दिनों तक खाने से स्वप्नदोष खत्म होता है।
4. बादाम : बादाम के एक बीज की गिरी, 3 ग्राम मिसरी, 3 ग्राम घी और 3 ग्राम गिलोय का चूर्ण इन सबको 6 ग्राम की मात्रा में लेकर शहद में मिलाकर 7 दिनों तक दिन मे सुबह-शाम खाने से स्वप्नदोष खत्म होता है।
बादाम और काली मिर्च की फीकी शर्बत पीने से भी स्वप्नदोष में लाभ होता है।
5. त्रिफला : त्रिफले का चूर्ण और शहद दोनों को मिलाकर खाने से स्वप्नदोष में बहुत लाभ होता है।
त्रिफला का चूर्ण 4-6 ग्राम की मात्रा में रात को सोने से पहले दूध के साथ खाने से स्वप्नदोष दूर हो जाता है। त्रिफला 12 ग्राम, गुड़ 24 ग्राम, वच और भीमसेनी कर्पूर 3-3 ग्राम की मात्रा में लेकर सबको पानी के साथ मिलाकर छोटी-छोटी एक समान गोली बना लें, 1 से 2 गोलीयों को सुबह-शाम पानी के साथ सेवन करने से स्वप्नदोष व शीघ्रपतन दूर हो जायेगा।
6. आंवला : आंवले का चूर्ण 6 ग्राम और मिसरी का चूर्ण 6 ग्राम मिलाकर रोज खाने से कुछ हफ्ते में स्वप्नदोष खत्म होता है।
7. शतावर : शतावर, मूसली, विदारीकन्द, असगंध, गोखरू या इलायची के बीज इनमें से 2-3 वनौशधि को बराबर मात्रा में लेकर कूटकर पीसकर रख लें, और मिश्री को मिलाकर 3 ग्राम पानी के साथ पीने से लाभ होता है। शतावरी, असगंध, विधारा 20-20 ग्राम कूटकर छानकर रख लें, इसमें 60 ग्राम खांड़ मिलाकर 10-20 ग्राम की मात्रा में दिन सुबह-शाम दूध के साथ लें।
शतावर के रस को शहद मे मिलाकर पीने सुबह-शाम से स्वप्नदोष दूर होता है।
8. हरड़ : हरड़ का चूर्ण 3 ग्राम की मात्रा में शहद 10 ग्राम में लेकर में मिलाकर रोज खायें इससे कुछ दिनों में स्वप्नदोष का रोग खत्म हो जाता है।
हरड़ का मुरब्बा खाकर हल्का गर्म दूध पीने से कब्ज दूर होती है।
9. खादिर (कत्था) : खादिर (कत्था) सार 1 ग्राम, ठंड़े पानी के साथ खाने से स्वप्नदोष खत्म होता है।
10. गिलोय : गिलोय, गोक्षुर और आंवला तीनों को बराबर मात्रा में कूट पीसकर 1 चम्मच चूर्ण को खाकर पानी को पीने से स्वप्नदोष खत्म होता है।
टिप : आप को यहाँ जो भी उपचार बताये है वो अजमाए हुवे उपाय है। इसके कोई भी साइड इफ़ेक्ट नहीं है। जो भी नुस्का उपयोग में लाना चाहते है वह असली चीजो का इस्तेमाल कर के ला सकते है। मार्केट में पंसारी की दूकान या जड़ी बुटी की दूकान से खरीदी हुयी चीजे डुप्लीकेट हो तो असर नहीं करेगी और आप आयुर्वेदिक जड़ी बुटी के प्रति निराशा व्यक्त करोगे। आयुर्वेद अपने आप में एक शक्ति है। इसका सही तरह से उपयोग किया जाये तो यह एक संजीवनी है। (डुप्लीकेट दवाई को खरेदी ना करे और ताज़ी वनस्पति का ही उपयोग करे)
घमौरी का आयुर्वेदिक इलाज :-
गर्मी के मौसम में अत्यधिक पसीना आने से पीठ पर दाने निकल आते हैं। इसे घमौरी के नाम से जाना जाता है। इसमें खुजली होने के साथ सुई सी चुभन होती है। गर्मी की अधिकता, अधिक पसीना आने, गंदगी से यह दिक्कत होती है।
बचाव |--
-अत्यधिक धूप में न निकलें।
-हल्के कपड़े पहनें।
-गरम और तेज मिर्च-मसाले युक्त भोजन से पहरेज करें।
-ठंडे और शांतिदायक शर्बत व पेय का सेवन करें।
उपचार
-गुलाब के फूलों का तेल 12 मिली, सिरका 48 मिली, कपूर एक ग्राम और फिटकरी तीन ग्राम लेकर मिलाकर दानों में लगाएं।
-नौशादर, कपूर, नीला थोथा, गंधक आमलासार सबको नौ-नौ ग्राम लेकर पीसकर तीन भाग में कर लें। फिर इसके एक भाग को दही में मिलाकर दानों पर मले। इसके सूखने पर स्नान कर लें।
-मुलतानी मिट्टी का दानों पर लेप करने से आराम मिलता है।
-खशखश के बीज 12 ग्राम को बकरी के दूध में पीसकर दानों पर मलें। फिर आधा घंटा बाद स्नान करना लाभकारी होता है।
ओट्स के सौंदर्य लाभ
● ओट्स ना सिर्फ आपकी सेहत बनाता है बल्कि आपकी त्वचा और बालों के लिए भी काफी फायदेमंद है। जानिए किस तरह ओट्स आपकी त्वचा और बालों की समस्या को दूर कर आपको खूबसूरत बनाता है।
1) ओट्स बनाएं खूबसूरत :-
ओट्स का नाम सुनते ही सबसे पहले हमारे जेहन में वजन घटाने का खयाल आता है। लेकिन क्या आप जानते हैं ओट्स में हेल्दी रखने के गुणों के अलावा सौंदर्य निखारने के गुण भी प्राकृतिक रुप से पाए जाते हैं। आइए जानें ओट्स से कैसे निखारें अपनी खूबसूरती।
2) एक्ने दूर करे
पके हुए ओट्स को एक्ने पर लगाने से इससे छुटकारा मिल सकता है। पके हुए ओट्स में त्वचा से बैक्टेरिया और ऑयल को अवशोषित करने की क्षमता होती है। जब आप अपने नाशते के लिए ओट्स बनाए तो उसमें से थोड़ा सा ओट्स लेकर एक्ने पर लगाएं
3) ड्राई स्किन
ओट्स में पॉलीसेक्रीराइड्स होता है जो पानी में मिलने पर पतला हो जाता है। फिर जब आप इसे अपने चेहरे पर लगाते हैं तो आपके चेहरे को सुरक्षित करने के लिए इसकी एक पतली परत बन जाती है। यह स्किन की पीलिगं कर ड्राइ स्किन की समस्या से छुटकारा दिलाता है।
4) त्वचा में खुजली
त्वचा में खुजली की समस्या होने पर ओटमील बाथ लेना काफी फायदेमंद रहता है। ओट्स में एंटी इंफाल्मेटरी गुण होते हैं जो खुजली की समस्या दूर करते हैं। जब त्वचा में खुजली की समस्या हो तो नहाने के पानी में ओटमील मिलाकर नहाएं।
5) मॉश्चरराइजर
गुलाब की पंखुड़ियों को पानी में 30 मिनट के लिये भिगो दीजिये, इसके बाद इसे बाहर निकाल कर उसके पीछे से किसी चम्मच से दबा कर पीस लीजिये। इसमें पिसा हुआ ओट्स मिलाएं । यह फेस पैक आपकी त्वचा के लिये अच्छा है। इस फेस पैका को त्वचा पर लगाने से पहले चेहरे को पानी से धोएं।
6) रंगत निखारे
ओट्स में रंग निखारने के गुण भी पाए जाते हैं। अगर आपकी त्वचा धूप में टैन हो गयी है तो इसकी रंगत निखारने के लिए हर रोज ओट्स का फेस पैक लगाएं। इससे आपकी खोयी रंगत लौट आएगी।
7) डेड स्किन से छुटकारा
ओट्स और छाछ यह बहुत ही प्रभावशाली स्क्रब है। बस इन दोनों को एक साथ मिलाइये और त्वचा पर लगाइये। फिर जब यह सूख जाए तब स्क्रब कर लीजिये। इससे डेड स्किन निकल जाएगी और आपके चेहरे पर ग्लो आएगा।
8) प्राकृतिक क्लींजर
चेहरे की प्राकृतिक रुप से सफाई करने के लिए दो टेबलस्पून ओटमील में पांच-छह बूंद रोज एसेंशियल ऑयल मिलाकर पेस्ट बनाएं और गीली त्वचा पर इससे हल्का मसाज करें। गुनगुने पानी से चेहरा साफ कर लें।
9) ड्राई स्कैल्प की समस्या
जिस तरह ओट्स त्वचा का रूखापन दूर करने में कारगर है उसी तरह यह ड्राई स्कैल्प की समस्या को भी दूर करता है। ओट्स को पानी में मिलाकर स्कैल्प पर लगाएं इससे खुजली और ड्राई स्कैल्प की समस्या दूर हो जाती है। इस प्रक्रिया को महीने में दो या तीन बार करना चाहिए।
10) डैंड्रफ से छुटकारा
ओट्स को मसाज ऑयल या दही में मिलाकर बालों और स्कैल्प पर मसाज करें। इसके थोड़ी बाद बालों में शैंपू कर लें। महीने में एक दो बार ऐसा करने से निश्चित ही ड्रैंडर्फ की समस्या दूर हो जाएगी
दालचीनी के फायदे
सामान्यत: दालचीनी मसालों के रूप में काम मे ली जाती है। लेकिन यह पेट रोग, इंफ्यूएंजा, टाइफाइड, टीबी और कैंसर जैसे रोगों में उपयोगी पाई गई है। दालचीनी का तेल बनता है। दालचीनी,साबुन, दांतों के मंजन, पेस्ट, चाकलेट, सुगंध व उत्तेजक के रूप में काम में आती है। चाय, काफी में दालचीनी डालकर पीने से स्वादिष्ट हो जाती है तथा जुकाम भी ठीक हो जाता है।
दालचीनी के कुछ घरेलु प्रयोग जो बहुत उपयोगी हैं।
- दालचीनी का तेल दर्द, घावों और सूजन को नष्ट करता है।
- दालचीनी को तिल के तेल, पानी, शहद में मिलाकर उपयोग करना चाहिए। दर्द वाले स्थान पर मालिश करने के बाद इसे रातभर रहने देते है। मालिश अगर दिन में करें तो 2-3 घंटे के बाद धोएं।
- दालचीनी त्वचा को निखारती है तथा खुजली के रोग को दूर करती है।
- दालचीनी सेहत के लिए लाभकारी है। यह पाचक रसों के स्त्राव को भी उत्तेजित करती है। दांतों की समस्याओं को दूर करने में भी यह उपयोगी है।
- रात को सोते समय नियमित रूप से एक चुटकी दालचीनी पाउडर शहद के साथ मिलाकर लेने से मानसिक तनाव में राहत मिलती है और स्मरण शक्ति बढ़ती है।
- दालचीनी का नियमित प्रयोग मौसमी बीमारियों को दूर रखता है।
- ठंडी हवा से होने वाले सिरदर्द से राहत पाने के लिए दालचीनी के पाउडर को पानी में मिलाकर पेस्ट बनाकर माथे पर लगाएं।
- दालचीनी पाउडर में नीबू का रस मिलाकर लगाने से मुंहासे व ब्लैकहैड्स दूर होते हैं।
- दालचीनी, डायरिया व जी मिचलाने में भी औषधी के रूप में काम में लाई जाती है।
- मुंह से बदबू आने पर दालचीनी का छोटा टुकड़ा चूसें। यह एक अच्छी माउथ फ्रेशनर भी है।
- दालचीनी में एंटीएजिंग तत्त्व उपस्थित होते हैं। एक नीबू के रस में दो बड़े चम्मच जैतून का तेल, एक कप चीनी, आधा कप दूध, दो चम्मच दालचीनी पाउडर मिलाकर पांच मिनट के लिए शरीर पर लगाएं। इसके बाद नहा लें, त्वचा खिल उठेगी।
- दालचीनी पाउडर की तीन ग्राम मात्रा सुबह-शाम पानी के साथ लेने पर दस्त बंद हो जाते हैं
- आर्थराइटिस का दर्द दूर भगाने में शहद और दालचीनी का मिश्रण बड़ा कारगर है।
-गंजेपन या बालों के गिरने की समस्या बेहद आम है। इससे छुटकारा पाने के लिए गरम जैतून के तेल में एक चम्मच शहद और एक चम्मच दालचीनी पाउडर का पेस्ट बनाएं। इसे सिर में लगाए और पंद्रह मिनट बाद धो लें।
- एक चम्मच दालचीनी पाउडर और पांच चम्मच शहद मिलाकर बनाए गए पेस्ट को दांत के दर्द वाली जगह पर लगाने से फौरन राहत मिलती है।
- सर्दी जुकाम हो तो एक चम्मच शहद में एक चौथाई चम्मच दालचीनी पाउडर मिलाकर दिन में तीन बार खाएं। पुराने कफ और सर्दी में भी राहत मिलेगी।
- पेट का दर्द-शहद के साथ दालचीनी पाउडर लेने पर पेट के दर्द से राहत मिलती है।
- खाली पेट रोजाना सुबह एक कप गरम पानी में शहद और दालचीनी पाउडर मिलाकर पीने से फैट कम होता है। इससे मोटे से मोटा व्यक्ति भी दुबला हो जाता है।