Showing posts with label प्राणायाम एवं ध्यान विधि. Show all posts
Showing posts with label प्राणायाम एवं ध्यान विधि. Show all posts

Friday, 19 February 2016

प्राणायाम एवं ध्यान विधि














प्राणायाम एवं ध्यान विधि -

1. पदमासन / सिद्धासन / सुखासन की स्थिति मे एकान्त, शान्त स्थान मे बैठे । 

2. 11 बार तीव्र भस्त्रिका प्राणायाम का अभ्यास करे । लुहार की धौंकनी के समान तीव्र गति से शवास को अन्दर भरना और बाहर निकालना । 

3. 11 बार मृदु भस्त्रिका अर्थात् दीर्घ शवसन करना । मन को शान्त और स्तिर करना ।
विशेष - अभ्यास 2 एंव 3 मन को शान्त करने के लिए ही है ।ऋषि द्वारा निर्दिष्ट नही है

4. शवास को तेजी से बह्यर निकालकर बहार ही यथाशक्ति रोके । साथ ही मूलेन्द्रिय को उपर की ओर खीचे । फिर जब घबराहट हो तो शवास को धीरे धीरे अन्दर लेवे। इस को 5 बार करे ।

5. अब शवास को भरकर अन्दर ही यथाशक्ति रोके । साथ ही मूलेन्द्रिय को उपर की और खीचे । फिर जब घबराहट हो तो शवास को बाहर निकाले । इस अभ्यास को भी 5 बार करे ।

6. प्राणायाम के अभ्यास के पश्चात् मस्तिष्क के अग्र भाग मे भृकुटि स्थल मे ध्यान केन्द्रित करते हुए गायत्री मंत्र के अर्थ का विचार करते हुए ध्यान का अभ्यास करे । जब तक अर्थ याद न होवे तब तक गायत्री मंत्र के शब्दो पर ही ध्यान केन्द्रित करे ।

7. सम्पूर्ण प्राणायाम के दौरान मन मे केवल ओउम् का ही जाप करे ।

8. लाभ : - 
प्राणायाम - के अभ्यास से बुद्धि इतनी तीव्र और सूश्र्म हो जाती है कि कठिन से कठिन विषय को भी शीघ्र ग्रहण कर लेती है ।

ध्यान :- इसके अभ्यास से आत्मबल इतना बढ जाता है कि व्यक्ति पहाड जैसे दु:ख को भी चींटी के समान तुच्छ समझने लगता है ।