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Tuesday, 28 October 2014

तिल से उपचार (Benefits Of Sesame Seed)














तिल से उपचार (Benefits Of Sesame Seed)

तिल कई प्रकार के होते हैं किन्तु हमारी पहचान सफ़ेद तिल और काले तिल से है . मकर संक्रांति के पुण्य अवसर पर उड़द की खिचडी और तिल के लड्डू खाने का चलन हिन्दुस्तान में सदियों- सदियों से चला आ रहा है. तिल के लड्डू के अतिरिक्त तिल के तेल का चलन भी है जो हम सिर में लगाते हैं जो विद्यार्थियों के लिए अति उत्तम माना गया है . बस तिल का तीसरा कोई प्रयोग चलन में नहीं है . आइये आज अपने ज्ञान में हम वृद्धि करें .विश्वास कीजिए जब आप तिल के गुणों के बारे में जान लेंगे तो फिर सिर्फ मकर संक्रांति में ही नहीं पूरे वर्ष तिल के गुण गायेंगे और लड्डू खायेंगे.

तिल विशेषतः काले तिल में कार्बोहाईड्रेट ,प्रोटीन और कैल्शियम की प्रचुर मात्रा होती है .इसीलिए ये शरीर के लिए अमृत है.

दाँत- काले तिल को अगर आप २५ से ३० ग्राम रोज चबाकर खायेंगे तो दाँत आपके बेहदमजबूत हो जायेंगे. अगर दाँत में कीड़े लग रहे हों तो तिल को पानी में ४ घंटे भिगा दीजिये फिर छान कर उसी पानी से मुंह को भरिये और १० मिनट रुके रहिये .फिर पानी उगल दीजिये, चार पांच बार इसी तरह कुल्ला कीजिये, घाव, पायरिया सभी परेशानिया ख़त्म.

मोटापा- अगर पेट निकल रहा हो तो सुबह शाम एक चम्मच भर के तिल का तेल पी जाएं .

महिलाओं के लिए- लड़कियों और महिलाओं को तो प्रतिदिन कम से कम १० ग्राम तिल चबा चबा कर खाना चाहिए ,इससे उन्हें मासिक चक्र के समय होने वाले दुःख दर्द औरअनियमितता से तो मुक्ति मिलेगी ही उनका गर्भाशय भी मजबूत और बीमारी रहित होजाएगा .वे स्वस्थ और सुन्दर बच्चे पैदा करने में सक्षम होंगी.

बालों के लिए - तिल का तेल प्रतिदिन सिर में लगाने से मेधा शक्ति बढ़ती है और बाल भी सुन्दर बने रहते हैं. अपने इसी गुण के कारण तिल का तेल विद्यार्थियों के लिए अति पौष्टिक और उत्तम माना गया है.

ल्यूकोरिया- अक्सर महिलायें इस बीमारी से त्रस्त रहती हैं और किसी को बताती भी नहीं , उनका स्वास्थ्य भी इसकी वजह से गिरता चला जाता है.उन्हें रुई को तिल के तेल में भिगा कर अपने जननांगो में रखना चाहिए ताकि वे इस बीमारी से मुक्त हो जाएं.

बवासीर- तिल के लड्डू सुबह ,दोपहर , को खाइए . इस मुसीबत से पीछा छुडाइये. या तिल को पीस कर चटनी बनाएं और मक्खन मिला कर खा जाएं .

खांसी- तिल का काढा बनाइये, शक्कर मिला कर पीजिये. सारा कफ ख़त्म हो जाएगा.कम से कम ४ बार.

मोच में - तिल और महुए को एक साथ पीसिये और जहां मोच आई हो वहाँ बाँध दीजिये . फिर देखिये जादुई असर.

अगर आप बूढ़े नहीं होना (दिखना) चाहते तो प्रतिदिन शरीर में तिल के तेल की मालिश कीजिए ,न स्किन सिकुड़ेगी न झुर्रियां पड़ेंगी.

गर्भाशय - अगर किसी वजह से या ठंड से गर्भाशय में पीड़ा हो रही है तो तिल को पीस करउसमें थोड़ा तिल का तेल मिलाइए और गर्म कीजिए फिर नाभि के नीचे लेप कर दीजिये. जो दर्द तमाम पेनकिलर से नहीं गया वह चुटकी बजाते ही गायब हो जाएगा.

अगर बच्चेदानी में खून जम गया हो तो आधा आधा चम्मच तिल का पावडर दिन में चार बार खिलाएं . गर्भ और गर्भिणी दोनों को आराम महसूस होगा और खून बिखर जाएगा.