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Wednesday, 17 December 2014

एसिडिटी


















हम जो खाना खाते हैं, उसका सही तरह से पचना बहुत ज़रूरी होता है। पाचन की प्रक्रिया में हमारा पेट एक ऐसे एसिड को स्रावित करता है जो पाचन के लिए बहुत ही ज़रूरी होता है। पर कई बार यह एसिड आवश्यकता से अधिक मात्रा में निर्मित होता है, जिसके परिणामस्वरूप सीने में जलन और फैरिंक्स और पेट के बीच के पथ में पीड़ा और परेशानी का एहसास होता है। इस हालत को एसिडिटी या एसिड पेप्टिक रोग के नाम से जाना जाता है ।

एसिडिटी होने के कारण
एसिडिटी के आम कारण होते हैं, खान पान में अनियमितता, खाने को ठीक तरह से नहीं चबाना, और पर्याप्त मात्रा में पानी न पीना इत्यादि। मसालेदार और जंक फ़ूड आहार का सेवनकरना भी एसिडिटी के अन्य कारण होते हैं। इसके अलावा हड़बड़ी में खाना और तनावग्रस्त होकर खाना और धूम्रपान और मदिरापान भी एसिडिटी के कारण होते हैं। भारी खाने के सेवन करने से भी एसिडिटी की परेशानी बढ़ जाती है। और सुबह सुबह अल्पाहार न करना और लंबे समय तक भूखे रहने से भी एसिडिटी आपको परेशान कर सकती है। 

एसिडिटी के लक्षण
*.पेट में जलन का एहसास
*.सीने में जलन
*.मतली का एहसास
*.डीसपेपसिया
*.डकार आना
*.खाने पीने में कम दिलचस्पी
*.पेट में जलन का एहसास

एसिडिटी के आयुर्वेदिक उपचार

*.अदरक का रस:नींबू और शहद में अदरक का रसमिलाकर पीने से, पेट की जलन शांत होती है।

*.अश्वगंधा:भूख की समस्या और पेट की जलन संबधित रोगों के उपचार में अश्वगंधा सहायक सिद्ध होती है।

*.बबूना:यह तनाव से संबधित पेट की जलन को कम करता है।

*.चन्दन:एसिडिटी के उपचार के लिए चन्दन द्वारा चिकित्सा युगों से चली आ रही चिकित्सा प्रणाली है। चन्दन गैस से संबधित परेशानियों को ठंडक प्रदान करता है। 

*.चिरायता:चिरायता के प्रयोग से पेट की जलन और दस्त जैसी पेट की गड़बड़ियों को ठीक करने में सहायता मिलती है।

*.इलायची:सीने की जलन को ठीक करने के लिए इलायची का प्रयोग सहायक सिद्ध होता है।

*.हरड: यह पेट की एसिडिटी और सीने की जलन को ठीक करता है ।

*.लहसुन:पेट की सभी बीमारियों के उपचार के लिए लहसून रामबाण का काम करता है।

*.मेथी:मेथी के पत्ते पेट की जलन दिस्पेप्सिया के उपचार में सहायक सिद्ध होते हैं।

*.सौंफ:सौंफ भी पेट की जलन को ठीक करने में सहायक सिद्ध होती है। यह एक तरह की सौम्य रेचक होती है और शिशुओं और बच्चों की पाचन और एसिडिटी से जुड़ी समस्याओं को दूर करने के लिए भी मदद करती है।

एसिडिटी के घरेलू उपचार:

*.विटामिन बी और ई युक्त सब्जियों का अधिक सेवन करें।

*.व्यायाम और शारीरिक गतिविधियाँ करते रहें।

*.खाना खाने के बाद किसी भी तरह के पेय का सेवन ना करें।

*.बादाम का सेवन आपके सीने की जलन कम करनेमें मदद करता है।

*.खीरा, ककड़ी और तरबूज का अधिक सेवन करें।

*.पानी में नींबू मिलाकर पियें, इससे भी सीने की जलन कम होती है।

*.नियमित रूप से पुदीने के रस का सेवन करें ।

*.तुलसी के पत्ते एसिडिटी और मतली से काफी हद तक राहत दिलाते हैं।

*.नारियल पानी का सेवन अधिक करें

Monday, 17 November 2014

एसिडिटी
















एसिडिटी

एसिडिटी की समस्या इन दिनों आम हो गई है। पेट में जब सामान्य सेअधिक मात्रा में एसिड निकलता है, तो उसे एसिडिटी कहते हैं। और जबयह स्राव तेज हो जाता है, तो हमें सीने में जलन का अहसास
होता है। आइए जानें ऐसे कुछ घरेलू उपाय जिन्हें अपनाकर आप
एसिडिटी से छुटकारा पाया जा सकता है।

- टमाटर
टमाटर में कैल्शियम, फास्फोरस व विटामिन-सी पाया जाता है।
जो शरीर से जीवाणुओं को बाहर निकालता है। टमाटर स्वाद में
खट्टा होता है, लेकिन इससे शरीर में क्षार की मात्रा बढ़ती है।
टमाटर के नियमित सेवन से एसिडिटी की शिकायत नहीं होती।

- अनानास
एसिडिटी होने पर एंजाइम्स से भरे अनानास के रस का सेवन करें।
खाने के बाद अगर आपको पेट अधिक भरा व भारी महसूस हो रहा है,तो आधा गिलास अनानास का ताजा रस पीने से सारी बेचैनी और
एसिडिटी खत्म हो जाती है।

- अजवाइन
अजवाइन का उपयोग भारतीय मसाले के रूप में कई सदियों होता आ
रहा है, लेकिन अजवाइन सिर्फ एक मसाला ही नहीं है ये कई तरह के
औषधीय गुणों से भरपूर है। यह एसिडिटी में भी बहुत फायदेमंद
होती है। एसिडिटी होने थोड़ी सी अजवाइन और जीरे को साथ भून
लें। फिर इसे पानी में उबाल कर छान लें। इस छने हुए पानी में
चीनी मिलाकर पिएं, एसिडिटी से राहत मिलेगी।

- पपीता
पपीता अत्यंत गुणकारी फलों में से एक है। यह पेट से संबंधित
बीमारियां जैसे कब्ज, गैस, एसिडिटी व कफ के लिए अमृत की तरह
काम करता है। इससे निकलने वाला रस अपने वजन से 100
गुना प्रोटीन बहुत जल्द पचा देता है। इससे आमाशय तथा आंत
संबंधी विकारों में बहुत लाभ मिलता है।

- शतावरी
शतावारी की जड़ एसिडिटी के लिए बहुत फायदेमंद होती है। अगर
इसकी जडों का चूर्ण को गाय के दूध में उबाल कर एसिडिटी से ग्रस्त
रोगी को दिया जाए तो तेजी से आराम मिलता है।
शतावरी की जडों का चूर्ण शहद के साथ चाटने से भी तेजी से फायदा होता है।

- काली मिर्च और नीबू
काली मिर्च और नीबू का एसिडिटी में प्रयोग बहुत अच्छा रहता है।
एसिडिटी में एक गिलास गुनगुने पानी में चुटकी भर काली मिर्च
का चूर्ण तथा आधा नींबू निचोड़कर नियमित रूप से सुबह
पीना चाहिए। ऐसा करने से पेट साफ रहता है और एसिडिटी में
फायदा होता है।

- मेथी
मेथी से पेट और आंत की सभी समस्याएं दूर होती है।
एसिडिटी की समस्या से बचने के लिए रोज सुबह खाली पेट कुछ दानेमेथी के खाने से फायदा होता है। या फिर मेथी और मठ्ठे का घोलबना कर पीएं। ऐसा करने से एसिडिटी समेत पेट के सभी रोग दूर हो जाएगें।

- अमरूद
अमरूद का सेवन कब्ज और एसिडिटी में बहुत फायदेमंद होता है। इसमें प्रचुर मात्रा में मौजूद विटामिन, फाइबर व मिनरल स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभकारी होते हैं। अमरूद में पाया जाने वाला फाइबर कब्ज को दूर करता है।

- जामुन
जामुन में ग्लूकोज और फ्रक्टोज और इसके बीज में कार्बोहाइड्रेज,
प्रोटीन और कैल्शियम अधिक मात्रा में पाया जाता है। मौसम के
अनुरूप इसका सेवन औषधि के रूप में करना चाहिए। इसका सेवन
पाचनशक्ति को बढ़ाता है और पेट के रोगों में आराम देता है।
खाली पेट जामुन खाने से गैस व एसिडिटी की समस्या समाप्त
हो जाती है।

- दूध
अगर आपको ज्यादा मसालेदार खाना खाने से एसिडिटी हो रही है
तो आप ठंडे दूध का सेवन करें। कैल्शियम से भरपूर एक गिलास दूध
एसिडिटी की समस्या को दूर करने में सहायक होता है। साथ
ही कैल्शियम युक्त एंटी एसिड टेबलेट और कैल्शियम एसिडिटी को कम करने में मदद करता है।

Friday, 7 November 2014

एसिडिटी
















एसिडिटी

कई बीमारियां ऐसी होती हैं। जिसे हम खुद ही बुलावा देते हैं। कहने का मतलब यह है कि हमारी गलत जीवनशैली ही ऐसे रोगों को बढ़ावा देती है। एसिडिटी ऐसे ही रोगों में से एक है। एसिडिटी को चिकित्सकीय भाषा में गैस्ट्रोइसोफेजियल रिफलक्स डिजीज (GERD) के नाम से जाना जाता है। आयुर्वेद में इसे अम्ल पित्त कहते हैं। आज इससे हर दूसरा व्यक्ति या महिला पीडि़त है। एसिडिटी होने पर शरीर की पाचन प्रक्रिया ठीक नहीं रहती।

एसिडिटी का कारण?
आधुनिक विज्ञान के अनुसार आमाशय में पाचन क्रिया के लिए हाइड्रोक्लोरिक अम्ल तथा पेप्सिन का स्रवण होता है। सामान्य तौर पर यह अम्ल तथा पेप्सिन आमाशय में ही रहता है तथा भोजन नली के सम्पर्क में नही आता है। आमाशय तथा भोजन नली के जोड पर विशेष प्रकार की मांसपेशियां होती है जो अपनी संकुचनशीलता से आमाशय एवं आहार नली का रास्ता बंद रखती है तथा कुछ खाते-पीते ही खुलती है। जब इनमें कोई विकृति आ जाती है तो कई बार अपने आप खुल जाती है और एसिड तथा पेप्सिन भोजन नली में आ जाता है। जब ऐसा बार-बार होता है तो आहार नली में सूजन तथा घाव हो जाते हैं।इसकी वजह गलत खान-पान, आरामदायक जीवनशैली, प्रदूषण, चाय, कॉफी, धूम्रपान, अल्कोहल और कैफीनयुक्त पदार्थों का ज्यादा इस्तेमाल करना है।

एसिडिटी के लक्षण?
एसिडिटी के लक्षणों में हैं सीने और छाती में जलन। खाने के बाद या प्राय: सीने में दर्द रहता है, मुंह में खट्टा पानी आता है। इसके अलावा गले में जलन और अपचन भी इसके लक्षणों में शामिल होता है। जहां अपचन की वजह से घबराहट होती है, खट्टी डकारें आती हैं। वहीं खट्टी डकारों के साथ गले में जलन-सी महसूस होती है।

कुछ घरेलू उपचार-

1:हर तीन टाइम भोजन के बाद गुड जरुर खाएं। इसको मुंह में रखें और चबा चबा कर खा जाएं।

2:एक कप पानी उबालिये और उसमें एक चम्मच सौंफ मिलाइये। इसको रातभर के लिए ढंक कर रख दीजिये और सुबह उठ कर पानी छान लीजिये। अब इसमें 1 चम्मच शहद मिलाइये और तीन टाइम भोजन के बाद इसको लीजिये।

3:एक गिलास गर्म पानी में एक चुटकी कालीमिर्च चूर्ण तथा आधा नींबू निचोड़कर नियमित रूप से सुबह सेवन करें। इसके साथ ही सदाल के रूप मे मूली को जरुर शामिल करें। उस पर काला नमक छिडक कर खाएं।

4:एक लौंग और एक इलायची ले कर पाउडर बना लें। इसको हर मील के बाद माउथफ्रेशनर के रूप में खाएं। इसको खाने से एसिडिटी भी सही होगी और मुंह से बदबू भी नहीं आएगी।

ऐसे करें बचाव-

1.समय पर भोजन करें और भोजन करने के बाद कुछ देर टहलें ।

2.अपने खाने में ताजे फल, सलाद, सब्जियों का सूप, उबली हुई सब्जी को शामिल करें। हरी पत्तेदार सब्जियां और अंकुरित अनाज खूब खाएं। ये विटामिन बी और ई का बेहतरीन स्रोत होते हैं जो शरीर से एसिडिटी को बाहर निकाल देते हैं।

3.खाना हमेशा चबा कर और जरूरत से थोड़ा कम ही खाएं। सदैव मिर्च-मसाले और ज्यादा तेल वाले भोजन से बचें।

4.अपने रोजमर्रा के आहार में मट्ठा और दही शामिल करें।

5.शराब और मांसाहारी भोजन से परहेज करें।

6.पानी खूब पिएं। याद रखें इससे न सिर्फ पाचन में मदद मिलती है, बल्कि शरीर से टॉक्सिन भी बाहर निकल जाते हैं।

7.खाने के बाद तुरंत पानी का सेवन न करें। इसका सेवन कम से कम आधे घंटे के बाद ही करें।

8.धूम्रपान, शराब से बचें।

9.पाइनेपल के जूस का सेवन करें, यह एन्जाइम्स से भरा होता है। खाने के बाद अगर पेट अधिक भरा व भारी महसूस हो रहा है, तो आधा गिलास ताजे पाइनेपल का जूस पीएं। सारी बेचैनी और एसिडिटी खत्म हो जाए

10.आंवले का सेवन करें हालांकि यह खट्टा होता है, लेकिन एसिडिटी के घरेलू उपचार के रूप में यह बहुत काम की चीज है।

11.गैस से फौरन राहत के लिए 2 चम्मच ऑंवला जूस या सूखा हुआ ऑंवला पाउडर और दो चम्मच पिसी हुई मिश्री ले लें और दोनों को पानी में मिलाकर पी जाएं।