Showing posts with label ईसबगोल की भूसी. Show all posts
Showing posts with label ईसबगोल की भूसी. Show all posts

Monday, 22 December 2014

ईसबगोल की भूसी से विभिन्न रोगों में उपचार












ईसबगोल की भूसी से विभिन्न रोगों में उपचार 

अमीबिका (पेचिश):
100 ग्राम ईसबगोल की भूसी में 50-50 ग्राम सौंफ और मिश्री को 2-2 चम्मच की मात्रा में रोजाना 3 बार सेवन करने से लाभ मिलता है।

कांच खाने पर:
ईसबगोल की भूसी 2 चम्मच की मात्रा में दूध के साथ दिन में 3 बार सेवन करने से लाभ होता है।

जोड़ों का दर्द:
ईसबगोल की पुल्टिश (पोटली) पीड़ित स्थान पर बांधने से जोड़ों के दर्द में लाभ मिलता है।

पायरिया:
ईसबगोल को सिरके में मिलाकर दांतों पर मालिश करने से पायरिया के रोग में लाभ मिलता है।

स्वप्नदोष:
ईसबगोल और मिश्री मिलाकर एक-एक चम्मच एक कप दूध के साथ सोने से 1 घंटा पहले लें और सोने से पहले पेशाब करके सोयें।

आंव:
1 चाय की चम्मच ईसबगोल गर्म दूध में फुलाकर रात्रि को सेवन करें। प्रात: दही में भिगोकर, फुलाकर उसमें सोंठ, जीरा मिलाकर 4 दिन तक लगातार सेवन करने से आंव निकलना बंद हो जाएगा।

पुरानी कब्ज, आंव, आंतों की सूजन :
पुरानी आंव या आंतों की सूजन में 100-100 ग्राम बेल का गूदा, सौंफ, ईसबगोल की भूसी और छोटी इलायची को एक साथ पीसकर पाउडर बना लेते हैं। अब इसमें 300 ग्राम देशी खांड या बूरा मिलाकर कांच की शीशी में भरकर रख देते हैं।
इस चूर्ण की 2 चम्मच मात्रा सुबह नाश्ता करने के पहले ताजे पानी के साथ लेते हैं और 2 चम्मच शाम को खाना खाने के बाद गुनगुने पानी या गर्म दूध के साथ 7 दिनों तक सेवन करने से लाभ मिल जाता है। लगभग 45 दिन तक यह प्रयोग करने के बाद बंद कर देते हैं। इससे कब्ज, पुरानी आंव और आंतों की सूजन के रोग दूर हो जाते हैं।

आंव (पेचिश, संग्रहणी):
ईसबगोल 3 भाग, हरड़ और बेल का सूखा गूदा बराबर मात्रा में मिलाकर तीनों को बारीक पीसकर 2-2 चम्मच की मात्रा में सुबह-शाम दूध के साथ सेवन करने से लाभ मिलता है।

कांच या कंकड़ खा लेने पर:
यदि खाने के साथ कांच या कंकड़ पेट में चला जाए तो 2 चम्मच की ईसबगोल की भूसी गरम दूध के साथ दिन में 3 बार सेवन करने से लाभ मिलता है।
ईसबगोल की भूसी को 2 से 3 चम्मच की मात्रा में 1 गिलास ठण्डे पानी में भिगोकर मीठा (बूरा) मिलाकर खायें।

श्वास या दमा:
1 वर्ष या 6 महीने तक लगातार रोजाना सुबह-शाम 2 चम्मच ईसबगोल की भूसी गर्म पानी से सेवन करते रहने से सभी प्रकार के श्वांस (सांस) रोग दूर हो जाते हैं। 6 महीने से लेकर 2 साल तक सेवन करते रहने से 20 से 22 साल तक का पुराना दमा रोग भी इस प्रयोग से चला जाता है।
1-1 चम्मच ईसबगोल की भूसी को दूध के साथ लगातार सुबह और शाम कुछ महीनों तक सेवन करने से दमा के रोग में लाभ मिलता है।

शीघ्रपतन:
ईसबगोल, खसखस और मिश्री सभी की 5-5 ग्राम मात्रा को पानी में मिलाकर सेवन करने से शीघ्रपतन (धातु का जल्दी निकल जाना) का रोग दूर हो जाता है।

पेशाब की जलन:
1 गिलास पानी में 3 चम्मच ईसबगोल की भूसी को भिगोकर उसमें स्वाद के मुताबिक बूरा (खांड या चीनी) डालकर पीने से पेशाब की जलन दूर हो जाती है।

श्वेतप्रदर:
ईसबगोल को दूध में देर तक उबालकर, उसमें मिश्री मिलाकर खाने से स्त्रियों के श्वेत प्रदर में बहुत लाभ मिलता है।

सिर दर्द:
ईसबगोल को बादाम के तेल में मिलाकर मस्तक पर लेप करने से सिर दर्द दूर हो जाता है।

कान का दर्द:
ईसबगोल के लुवाब में प्याज का रस मिलाकर, हल्का सा गर्म करके कान में बूंद-बूंद करके डालने से कान के दर्द में लाभ मिलता है।

मुंह के छाले:
ईसबगोल को पानी में डालकर रख दें। लगभग 2 घंटे के बाद उस पानी को कपड़े से छानकर कुल्ले करने से मुंह के छाले दूर हो जाते हैं।
3 ग्राम ईसबगोल की भूसी को मिश्री में मिलाकर हल्के गर्म पानी के साथ सेवन करें। इससे मुंह के छाले और दाने ठीक हो जाते हैं।
ईसबगोल से कब्ज व छाले नष्ट होते हैं। ईसबगोल को गर्म पानी में घोलकर दिन में 2 बार कुल्ला करने से मुंह के छालों में आराम होगा।