Wednesday, 23 March 2016

सुहागा/ Borax

















सुहागा/ Borax

कनक क्षार, सुहागाचौकी, रसघ्न, धातु द्रावक, सौभाग्य, टंकण आदि सुहागा के नाम है। सुहागा पेट की जलन, बलगम, वायु तथा पित्त को नष्ट करता है, और धातुओं को द्रवित करता है।

सुहागे को पीसकर चुटकी भर चूसने से बैठी हुई आवाज खुल जाती है।
तवे पर सुहागा को सेंककर पीस ले। इसे चुटकी भर एक घूंट गर्म पानी में घोलकर रोजाना चार बार पीने से जुकाम और नज़ला ठीक हो जाता है।
एक चम्मच पिसा हुआ सुहागा एक बाल्टी पानी में मिलाकर नहाने से ज्यादा पसीना आना और शरीर से दुर्गन्ध आना बंद हो जाती है।

छोटा बच्चा रात को सोते हुए रोने लगे, दही की तरह जमे दूध की उल्टी करे, हरे रंग का अतिसार (दस्त) हो तो समझे कि बच्चे को खाया हुआ पचता नहीं है। बच्चे की पाचनशक्ति ठीक करने के लिए भुना सुहागा चुटकी भर दूध में घोलकर दो बार पिलाने से लाभ हो जाता है।

50 ग्राम सुहागे को तवे पर भूनकर पीस लें। एक चम्मच सुहागा, एक चम्मच नारियल का तेल और एक चम्मच दही को मिलाकर सिर में लगाकर अच्छे से मलिए और आधे घंटे के बाद सिर को धोने से सिर की फरास(सिकरी) समाप्त हो जाती है।

30 ग्राम भुना हुआ सुहागा और 100 ग्राम राई को पीसकर मैदा की छलनी से छान लें। इसे आधा चम्मच रोजाना डेढ़ महीना पानी से फंकी लें। तिल्ली सिकुड कर अपनी सामान्य अवस्था में आ जायेगी, पाचन प्रणाली अच्छी होगी और शरीर में शक्ति का संचार होगा।

सुहागे के तेल को चमड़ी पर लगाने से चमड़ी के सारे रोग ठीक हो जाते हैं।
लगभग एक ग्राम का चौथा भाग शुद्ध सुहागा शहद के साथ बच्चों को दिन में दो तीन बार देने से बच्चों की खांसी और सांस के रोग दूर होते हैं।

लगभग एक ग्राम का चौथा भाग सुहागा कान में दिन में दो बार डालने से कान के रोग ठीक हो जाते हैं।

आंख आने पर सुहागा और फिटकरी को एक साथ पानी में घोल बनाकर आंख को धोने और बीच-बीच में आई डरोप्स की तरह आंखों मे डालने से बहुत जल्दी लाभ होता है।

लगभग 75 ग्राम भुना हुआ सुहागा 100 ग्राम शहद में मिला ले इसे सोते समय एक चम्मच की मात्रा में लेकर चाटने से श्वास रोग में बहुत लाभ होता है।

भुने हुए सुहागे को पीसकर कपडे़ में छानकर सलाई से सुबह और शाम आंखों में लगाने से आराम आता है।

सुहागा को फुलाकर उसमें मिश्री मिलाकर बारीक पीस कर रोजाना मंजन करने से दांत साफ और मजबूत होते हैं। लकड़ी के कोयले में सुहागा मिलाकर बारीक पाउडर बना लें तथा बांस या नीम के दांतुन पर लगाकर मंजन करें। इससे दांत साफ और मजबूत होते हैं।

सुहागा, कलमी शोरा, फिटकरी, कालानमक और यवक्षार को पीसकर चूर्ण तैयार कर इसे तवे पर भूनकर दो दो ग्राम की मात्रा में शहद के साथ मिलाकर बच्चों को चटाने से कालीखांसी ठीक हो जाती है। भुना हुआ सुहागा और वंशलोचन को मिलाकर शहद के साथ रोगी बच्चे को चटाने से काली खांसी दूर हो जाती है।

20 ग्राम सुहागा और 10 ग्राम कपूर को 50 ग्राम उबले पानी में मिलाकर हल्के गर्म पानी के साथ धोने से बाल मुलायम तथा काले हो जाते हैं। 5 ग्राम सुहागा और 10 ग्राम कच्चे सुहागे को 250 ग्राम पानी में डालकर उबाल लें। इसके ठंडा होने पर बालों को धोने सें बाल मजबूत बनते हैं।
भुना हुआ सुहागा और शहद को मिलाकर बच्चे के मसूढ़ों पर धीरे-धीरे मलें। इससे दांत आसानी से निकल आते हैं तथा मसूड़ों का दर्द कम होता है।

10 ग्राम भुना सुहागा और 10 ग्राम पिसी हुई मुलहठी लेकर चूर्ण बना लें। इसमें से लगभग एक ग्राम का चौथा भाग चूर्ण में शहद मिलाकर मसूड़ों पर मलें। इससे बच्चों के दांत निकलते समय दर्द नहीं होता तथा बार-बार दस्त आना बंद हो जाता है।

सुहागा और हीराबोल को मिलाकर रोजाना दो से तीन बार मसूढ़ों पर धीरे-धीरे मलें। इससे दांतों व मसूढ़ों के सभी रोग ठीक होकर पायरिया रोग दूर होता है।

तीन ग्राम सुहागा भुना और नीलाथोथा भुना हुआ पीसकर अदरक के रस में बाजरे के बराबर आकार की गोलियां बनाकर छाया में सुखा लेते हैं। एक एक गोली मां के दूध के साथ सेवन करने से निमोनिया रोग ठीक हो जाता है।

एक चुटकी फूला सुहागा, एक चुटकी फूली फिटकरी, एक चम्मच तुलसी का रस, एक चम्मच अदरक का रस, आधा चम्मच पान के पत्तों के रस को एक साथ मिलाकर शहद के साथ सुबह-शाम सेवन करने से निमोनिया के रोग मे लाभ होता है।

20 ग्राम सुहागा और 20 ग्राम कपूर को बारीक पीसकर पानी में घोलकर बाल धोने से बालों का गिरना कम हो जाता है।

20 ग्राम सुहागा और 20 ग्राम फिटकरी को 250 ग्राम पानी में मिलाकर सिर पर मालिश करने से सिर की जूएं मर जाती है।

किस-किस चीज को साथ नहीं खाना चाहिए और क्यों
















किस-किस चीज को साथ नहीं खाना चाहिए और क्यों?

दूध के साथ दही लें या नहीं?
दूध और दही दोनों की तासीर अलग होती है। दही एक खमीर वाली चीज है। दोनों को मिक्स करने से बिना खमीर वाला खाना (दूध) खराब हो जाता है। साथ ही, एसिडिटी बढ़ती है और गैस, अपच व उलटी हो सकती है। इसी तरह दूध के साथ अगर संतरे का जूस लेंगे तो भी पेट में खमीर बनेगा। अगर दोनों को खाना ही है तो दोनों के बीच घंटे-डेढ़ घंटे का फर्क होना चाहिए क्योंकि खाना पचने में कम-से-कम इतनी देर तो लगती ही है।

दूध के साथ तला-भुना और नमकीन खाएं या नहीं?
दूध में मिनरल और विटामिंस के अलावा लैक्टोस शुगर और प्रोटीन होते हैं। दूध एक एनिमल प्रोटीन है और उसके साथ ज्यादा मिक्सिंग करेंगे तो रिएक्शन हो सकते हैं। फिर नमक मिलने से मिल्क प्रोटींस जम जाते हैं और पोषण कम हो जाता है। अगर लंबे समय तक ऐसा किया जाए तो स्किन की बीमारियां हो सकती हैं।

सोने से पहले दूध पीना चाहिए या नहीं?
आयुर्वेद के मुताबिक नींद शरीर के कफ दोष से प्रभावित होती है। दूध अपने भारीपन, मिठास और ठंडे मिजाज के कारण कफ प्रवृत्ति को बढ़ाकर नींद लाने में सहायक होता है। मॉडर्न साइंस में भी माना जाता है कि दूध नींद लाने में मददगार होता है। इससे सेरोटोनिन हॉर्मोन भी निकलता है, जो दिमाग को शांत करने में मदद करता है। वैसे, दूध अपने आप में पूरा आहार है, जिसमें कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और कैल्शियम होते हैं। इसे अकेले पीना ही बेहतर है। साथ में बिस्किट, रस्क, बादाम या ब्रेड ले सकते हैं, लेकिन भारी खाना खाने से दूध के गुण शरीर में समा नहीं पाते।
दूध में पत्ती या अदरक आदि मिलाने से सिर्फ स्वाद बढ़ता है, उसका मिजाज नहीं बदलता। वैसे, टोंड दूध को उबालकर पीना, खीर बनाकर या दलिया में मिलाकर लेना और भी फायदेमंद है। बहुत ठंडे या गर्म दूध की बजाय गुनगुना या कमरे के तापमान के बराबर दूध पीना बेहतर है।
नोट : अक्सर लोग मानते हैं कि सर्जरी या टांके आदि के बाद दूध नहीं लेना चाहिए क्योंकि इससे पस पड़ सकती है, यह गलतफहमी है। दूध में मौजूद प्रोटीन शरीर की टूट-फूट को जल्दी भरने में मदद करते हैं। दूध दिन भर में कभी भी ले सकते हैं। सोने से कम-से-कम एक घंटे पहले लें। दूध और डिनर में भी एक घंटे का अंतर रखें।

खाने के साथ छाछ लें या नहीं?
छाछ बेहतरीन ड्रिंक या अडिशनल डाइट है। खाने के साथ इसे लेने से खाने का पाचन भी अच्छा होता है और शरीर को पोषण भी ज्यादा मिलता है। यह खुद भी आसानी से पच जाती है। इसमें अगर एक चुटकी काली मिर्च, जीरा और सेंधा नमक मिला लिया जाए तो और अच्छा है। इसमें अच्छे बैक्टीरिया भी होते हैं, जो शरीर के लिए फायदेमंद होते हैं। मीठी लस्सी पीने से फालतू कैलरी मिलती हैं, इसलिए उससे बचना चाहिए। छाछ खाने के साथ लेना या बाद में लेना बेहतर है। पहले लेने से जूस डाइल्यूट हो जाएंगे।

दही और फल एक साथ लें या नहीं?
फलों में अलग एंजाइम होते हैं और दही में अलग। इस कारण वे पच नहीं पाते, इसलिए दोनों को साथ लेने की सलाह नहीं दी जाती। फ्रूट रायता कभी-कभार ले सकते हैं, लेकिन बार-बार इसे खाने से बचना चाहिए।

दूध के साथ फल खाने चाहिए या नहीं?
दूध के साथ फल लेते हैं तो दूध के अंदर का कैल्शियम फलों के कई एंजाइम्स को एड्जॉर्ब (खुद में समेट लेता है और उनका पोषण शरीर को नहीं मिल पाता) कर लेता है। संतरा और अनन्नास जैसे खट्टे फल तो दूध के साथ बिल्कुल नहीं लेने चाहिए। व्रत वगैरह में बहुत से लोग केला और दूध साथ लेते हैं, जोकि सही नहीं है। केला कफ बढ़ाता है और दूध भी कफ बढ़ाता है। दोनों को साथ खाने से कफ बढ़ता है और पाचन पर भी असर पड़ता है। इसी तरह चाय, कॉफी या कोल्ड ड्रिंक के रूप में खाने के साथ अगर बहुत सारा कैफीन लिया जाए तो भी शरीर को पूरे पोषक तत्व नहीं मिल पाते।

मछली के साथ दूध पिएं या नहीं?
दही की तासीर ठंडी है। उसे किसी भी गर्म चीज के साथ नहीं लेना चाहिए। मछली की तासीर काफी गर्म होती है, इसलिए उसे दही के साथ नहीं खाना चाहिए। इससे गैस, एलर्जी और स्किन की बीमारी हो सकती है। दही के अलावा शहद को भी गर्म चीजों के साथ नहीं खाना चाहिए।
फल खाने के फौरन बाद पानी पी सकते हैं, खासकर तरबूज खाने के बाद?
फल खाने के फौरन बाद पानी पी सकते हैं, हालांकि दूसरे तरल पदार्थों से बचना चाहिए। असल में फलों में काफी फाइबर होता है और कैलरी काफी कम होती है। अगर ज्यादा फाइबर के साथ अच्छा मॉइश्चर यानी पानी भी मिल जाए तो शरीर में सफाई अच्छी तरह हो जाती है। लेकिन तरबूज या खरबूज के मामले में यह थ्योरी सही नहीं बैठती क्योंकि ये काफी फाइबर वाले फल हैं। तरबूज को अकेले और खाली पेट खाना ही बेहतर है। इसमें पानी काफी ज्यादा होता है, जो पाचन रसों को डाइल्यूट कर देता है। अगर कोई और चीज इसके साथ या फौरन बाद/पहले खाई जाए तो उसे पचाना मुश्किल होता है। इसी तरह, तरबूज के साथ पानी पीने से लूज-मोशन हो सकते हैं। वैसे तरबूज अपने आप में काफी अच्छा फल है। यह वजन घटाने के इच्छुक लोगों के अलावा शुगर और दिल के मरीजों के लिए भी अच्छा है।

खाने के साथ फल नहीं खाने चाहिए।
कार्बोहाइड्रेट और प्रोटींस के पाचन का मिकैनिज्म अलग होता है। कार्बोहाइड्रेट को पचानेवाला स्लाइवा एंजाइम एल्कलाइन मीडियम में काम करता है, जबकि नीबू, संतरा, अनन्नास आदि खट्टे फल एसिडिक होते हैं। दोनों को साथ खाया जाए तो कार्बोहाइड्रेट या स्टार्च की पाचन प्रक्रिया धीमी हो जाती है। इससे कब्ज, डायरिया या अपच हो सकती है। वैसे भी फलों के पाचन में सिर्फ दो घंटे लगते हैं, जबकि खाने को पचने में चार-पांच घंटे लगते हैं। मॉडर्न मेडिकल साइंस की राय कुछ और है। उसके मुताबिक, फ्रूट बाहर एसिडिक होते हैं लेकिन पेट में जाते ही एल्कलाइन हो जाते हैं। वैसे भी शरीर में जाकर सभी चीजें कार्बोहाइड्रेट, फैट, प्रोटीन आदि में बदल जाती हैं, इसलिए मॉडर्न मेडिकल साइंस तरह-तरह के फलों को मिलाकर खाने की सलाह देता है।

मीठे फल और खट्टे फल एक साथ न खाएं
आयुर्वेद के मुताबिक, संतरा और केला एक साथ नहीं खाना चाहिए क्योंकि खट्टे फल मीठे फलों से निकलनेवाली शुगर में रुकावट पैदा करते हैं, जिससे पाचन में दिक्कत हो सकती है। साथ ही, फलों की पौष्टिकता भी कम हो सकती है। मॉडर्न मेडिकल साइंस इससे इत्तफाक नहीं रखती।

खाने के साथ पानी पिएं या नहीं?
पानी बेहतरीन पेय है, लेकिन खाने के साथ पानी पीने से बचना चाहिए। खाना लंबे समय तक पेट में रहेगा तो शरीर को पोषण ज्यादा मिलेगा। अगर पानी ज्यादा लेंगे तो खाना फौरन नीचे चला जाएगा। अगर पीना ही है तो थोड़ा पिएं और गुनगुना या नॉर्मल पानी पिएं। बहुत ठंडा पानी पीने से बचना चाहिए। पानी में अजवाइन या जीरा डालकर उबाल लें। यह खाना पचाने में मदद करता है। खाने से आधा घंटा पहले या एक घंटा बाद 
गिलास भर पानी पीना अच्छा है।

लहसुन या प्याज खाने चाहिए या नहीं?
लहसुन और प्याज को रोजाना के खाने में शामिल किया जाना चाहिए। लहसुन फैट कम करता है और बैड कॉलेस्ट्रॉल (एलडीएल) घटाकर गुड कॉलेस्ट्रॉल (एचडीएल) बढ़ाता है। इसमें एंटी-बॉडीज और एंटी-ऑक्सिडेंट गुण होते हैं। प्याज से भूख बढ़ती है और यह खून की नलियों के आसपास फैट जमा होने से रोकता है। लंबे समय तक इसके इस्तेमाल से सर्दी-जुकाम और सांस संबंधी एलर्जी का मुकाबला अच्छे से किया जा सकता है। लहसुन और प्याज कच्चा या भूनकर, दोनों तरह से खा सकते हैं। लेकिन लहसुन कच्चा खाना बेहतर है। कच्चे लहसुन को निगलें नहीं, चबाकर खाएं क्योंकि कच्चा लहसुन कई बार पच नहीं पाता। साथ ही, उसमें कई ऐसे तेल होते हैं, जो चबाने पर ही निकलते हैं और उनका फायदा शरीर को मिलता है।

परांठे के साथ दही खाएं या नहीं?
आयुर्वेद के मुताबिक परांठे या पूरी आदि तली-भुनी चीजों के साथ दही नहीं खाना चाहिए क्योंकि दही फैट के पाचन में रुकावट पैदा करता है। इससे फैट्स से मिलनेवाली एनजीर् शरीर को नहीं मिल पाती। दही खाना ही है तो उसमें काली मिर्च, सेंधा नमक या आंवला पाउडर मिला लें। हालांकि रोटी के साथ दही खाने में कोई परहेज नहीं है। मॉडर्न साइंस कहता है कि दही में गुड बैक्टीरिया होते हैं, जोकि खाना पचाने में मदद करते हैं इसलिए दही जरूर खाना चाहिए।

फैट और प्रोटीन एक साथ खाएं या नहीं?
घी, मक्खन, तेल आदि फैट्स को पनीर, अंडा, मीट जैसे भारी प्रोटींस के साथ ज्यादा नहीं खाना चाहिए क्योंकि दो तरह के खाने अगर एक साथ खाए जाएं, तो वे एक-दूसरे की पाचन प्रक्रिया में दखल देते हैं। इससे पेट में दर्द या पाचन में गड़बड़ी हो सकती है।

दूध, ब्रेड और बटर एक साथ लें या नहीं?
दूध को अकेले लेना ही बेहतर है। तब शरीर को इसका फायदा ज्यादा होता है। आयुर्वेद के मुताबिक प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट और फैट की ज्यादा मात्रा एक साथ नहीं लेनी चाहिए क्योंकि तीनों एक-दूसरे के पचने में रुकावट पैदा कर सकते हैं और पेट में भारीपन हो सकता है। मॉडर्न साइंस इसे सही नहीं मानता। उसके मुताबिक यह सबसे अच्छे नाश्तों में से है क्योंकि यह अपनेआप में पूरा है।

तरह-तरह की डिश एक साथ खाएं या नहीं?
एक बार के खाने में बहुत ज्यादा वैरायटी नहीं होनी चाहिए। एक ही थाली में सब्जी, नॉन-वेज, मीठा, चावल, अचार आदि सभी कुछ खा लेने से पेट में खलबली मचती है। रोज के लिए फुल वैरायटी की थाली वाला कॉन्सेप्ट अच्छा नहीं है। कभी-कभार ऐसा चल जाता है।

खाने के बाद मीठा खाएं या नहीं?
मीठा अगर खाने से पहले खाया जाए तो बेहतर है क्योंकि तब न सिर्फ यह आसानी से पचता है, बल्कि शरीर को फायदा भी ज्यादा होता है। खाने के बाद में मीठा खाने से प्रोटीन और फैट का पाचन मंदा होता है। शरीर में शुगर सबसे पहले पचता है, प्रोटीन उसके बाद और फैट सबसे बाद में।

खाने के बाद चाय पिएं या नहीं?
खाने के बाद चाय पीने से कई फायदा नहीं है। यह गलत धारणा है कि खाने के बाद चाय पीने से पाचन बढ़ता है। हालांकि ग्रीन टी, डाइजेस्टिव टी, कहवा या सौंफ, दालचीनी, अदरक आदि की बिना दूध की चाय पी सकते हैं।

छोले-भठूरे या पिज्जा/बर्गर के साथ कोल्ड ड्रिंक्स लें या नहीं?
कोल्ड ड्रिंक में मौजूद एसिड की मात्रा और ज्यादा शुगर फास्ट फूड (पिज्जा, बर्गर, फ्रेंच फ्राइस आदि) में मौजूद फैट के साथ अच्छा नहीं माना जाता। तला-भुना खाना एसिडिक होता है और शुगर भी एसिडिक होती है। ऐसे में दोनों को एक साथ लेना सही नहीं है। साथ ही बहुत गर्म और ठंडा एक साथ नहीं खाना चाहिए। गर्मागर्म भठूरे या बर्गर के साथ ठंडा कोल्ड ड्रिंक पीना शरीर के तापमान को खराब करता है। स्नैक्स में मौजूद फैटी एसिड्स शुगर का पाचन भी खराब करते हैं। फास्ट फूड या तली-भुनी चीजों के साथ कोल्ड ड्रिंक के बजाय जूस, नीबू-पानी या छाछ ले सकते हैं। जूस में मौजूद विटामिन-सी खाने को पचाने में मदद करता है।

भारी काबोर्हाइड्रेट्स के साथ भारी प्रोटीन खाएं या नहीं?
मीट, अंडे, पनीर, नट्स जैसे प्रोटीन ब्रेड, दाल, आलू जैसे भारी कार्बोहाइड्रेट्स के साथ न खाएं। दरअसल, हाई प्रोटीन को पचाने के लिए जो एंजाइम चाहिए, अगर वे एक्टिवेट होते हैं तो वे हाई कार्बो को पचाने वाले एंजाइम को रोक देते हैं। ऐसे में दोनों का पाचन एक साथ नहीं हो पाता। अगर लगातार इन्हें साथ खाएं तो कब्ज की शिकायत हो सकती है।

एल्यूमिनियम फॉयल- पेन किलर











एल्यूमिनियम फॉयल- पेन किलर

कैसे इसकी परतें करती हैं दर्द छू - मंतर

▶एल्यूमिनियम फॉयल खाना पैक करने के काम आता है, लेकिन एल्यूमिनियम फॉयल के इस्तेमाल से शरीर के किसी भी अंग में होने वाले दर्द को दूर किया जा सकता है !शरीर के दर्दनाक हिस्से पर एल्यूमिनियम फॉयल लगा रात भर के लिए छोड़ दें !

1. गर्दन - पीठ - कंधे - घुटने या पैरों में दर्द हो रहा हो तोदर्द वाले हिस्से पर एल्यूमिनियम फॉयल लगाएं - दर्द गायब हो जाएगा !

इस फॉयल में चिकित्सकीय गुण होते हैं - एल्यूमिनियम फॉयल का एक टुकड़ा दर्द वाली जगह लगा उस पर बैंडेज बांध दें,इससे दर्द मे काफी राहत मिलेगी !
2. यह गठिया और निशान के इलाज के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है !

3. कमर दर्द सताने लगे - दवाई न खाएं - रसोई में रखे एल्यूमिनियम फॉयल को कमर पर लपेट कर उसके ऊपर गर्म पट्टी बांध कर सो जाएं - दर्द में आराम मिल जाएगा !

4. शरीर के विभिन्न अंगों में दर्द होने पर एल्यूमिनियम फॉयल लपेट कर गर्म पट्टी बांध कर 10 से 12 घंटों के अंतर्गत दर्द से छुटकारा पाया जा सकता है !

5. फॉयल से जुकाम भी ठीक होता है - इसके लिए 5 - 7 परतों में फॉयल को अपने पैर पर लपेटें - हर परत के बीच कागज और पतला सा कपड़ा लगा दें - कुछ देर ऐसे ही रहने दे !

लगभग दो घंटे बाद इसे निकाल कर रीसेट करें -

करने से जुकाम में आराम मिलेगा

Monday, 21 March 2016

जामुन खाने के फायदे














जामुन खाने के फायदे

जामुन खाने में तो स्वादिष्ट  होता ही साथ ही इसके कई औषधीय गुण भी होते हैं। जामुन को कई अन्य नामों से भी जाना जाता है – राजमन, काला जामुन, जमाली, ब्लैकबेरी आदि। इसकी प्रकृति अम्लीय और कसैली होती है, लेकिन इसका स्वाद खाने में मीठा होता है। अम्लीय होने के कारण जामुन को नमक के साथ खाया जाता है। जामुन में ग्लूकोज और फ्रक्टोज पाया जाता है।

जामुन में खनिजों की मात्रा अधिक होती है। इसके बीज में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और कैल्शियम अधिक मात्रा में पाया जाता है। जामुन में आयरन, विटामिन और फाइबर पाया जाता है। आइए जानते हैं कि जामुन आपके स्वास्‍थ्‍य के लिए कितना फायदेमंद है। 

जामुन खाने में स्वादिष्ट होता ही है साथ ही इसके कई औषधीय गुण भी होते हैं। जामुन को कई अन्य नामों से भी जाना जाता है – राजमन, काला जामुन, जमाली आदि। इसकी प्रकृति अम्लीय और कसैली होती है, लेकिन इसका स्वाद खाने में मीठा होता है।

अम्लीय होने के कारण जामुन को नमक के साथ खाया जाता है। जामुन में ग्लूकोज और फ्रक्टोज पाया जाता है। इसके बीज में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और कैल्शियम अधिक मात्रा में पाया जाता है।  जामुन में आयरन, विटामिन और फाइबर पाया जाता है। आइए जानते हैं कि जामुन आपके स्वास्‍थ्‍य के लिए कितना फायदेमंद है। 


1. जामुन पाचनशक्ति बढ़ाता है। जामुन खाने से पेट सं‍बंधित विकार कम होते हैं। 

2. मधुमेह के उपचार के लिए जामुन बहुत ही फायदेमंद माना जाता है। मधुमेह के रोगी जामुन की गुठलियों को सुखाकर, पीसकर उनका सेवन करें। इससे शुगर का स्तर सामान्‍य रहता है। 

3. जामुन में कैंसर रोधी गुण भी पाये जाते हैं। कीमोथेरेपी और रेडिएशन थेरेपी के बाद जामुन खाना चाहिए, इससे फायदा होता है।

4. जामुन खाने से पथरी में फायदा होता है। जामुन की गुठली के चूर्ण को दही के साथ मिलाकर खाने से पथरी में फायदा होता है। लीवर के लिए जामुन का प्रयोग फायदेमंद होता है। कब्ज और पेट के रोगों में भी जामुन बहुत फायदेमंद है। 

5. मुंह में छाले होने पर जामुन के रस का प्रयोग करने से लाभ होता है।

6. दस्त या खूनी दस्त होने पर जामुन का सेवन करना चहिए। दस्त होने पर जामुन के रस को सेंधानमक के साथ मिलाकर खाने से दस्त बंद हो जाता है। 

7. मुंहासे होने पर जामुन की गुठलियों को सुखाकर पीस लीजिए। इस पाउडर में रात को सोते समय गाय का दूध मिलाकर चेहरे पर लगाइए, इस लेप को सुबह ठंडे पानी से धो लीजिए। 

8. अगर आवाज फंस गई हो या फिर बोलने में दिक्कत हो रही हो तो जामुन की गुठली के काढे़ से कुल्ला कीजिए। आवाज को मधुर बनाने के लिए जामुन का काढा बहुत फायदेमंद है। 

9. जामुन की छाल को बारीक पीसकर हर रोज मंजन करने से दांत मजबूत और रोग-रहित होते हैं। 

10. एसिडिटी होने पर जामुन का सेवन भूना हुआ चूर्ण और काला नमक के साथ कीजिए, एसिडिटी समाप्त हो जाएगी। 

अमरुद की पत्तियों से बिमारियों का इलाज़














अमरुद की पत्तियों से बिमारियों का इलाज़ 

अमरूद की पत्तियों के कई स्वास्थ्य लाभ हैं जिसके बारे में हमें पता ही नहीं है। यह आपकी कई बीमारियों में आराम पहुंचा सकती है। वजन घटाना हो, गठिया के दर्द ने परेशान कर रखा हो या फिर पेट ठीक ना रहता हो, तो आप अमरूद की पत्तियों के रस का प्रयोग कर सकते हैं।

● इसमें ऐसे चमत्‍कारी गुण हैं जो आपकी कई बिमारियों को एक पल में दूर कर सकती हैं। त्‍वचा, बाल और स्‍वास्‍थ्‍य की देखभाल के लिये अमरूद की ताजी पत्तियों का रस या फिर इसकी बनी हुई चाय बहुत ही फायदेमंद होती है।

● वजन घटाना हो, गठिया के दर्द ने परेशान कर रखा हो या फिर पेट ठीक ना रहता हो, तो आप अमरूद की पत्तियों के रस का प्रयोग कर सकते हैं। आइये जानते हैं अमरूद की पत्तियाँ किस बीमारी में लाभ पहुंचाती हैं...

1) वजन घटाए 
अमरूद की पत्तियां जटिल स्टार्च को शुगर में बदलने की प्रक्रिया को रोकता है जिसके द्वारा शरीर के वज़न को घटाने में सहायता मिलती है।

2) गठिया दर्द 
अमरूद के पत्तों को कूटकर, लुगदी बनाकर उसे गर्म करके लगाने से गठिया की सूजन दूर हो जाती hai.

3) स्वप्नदोष में लाभ
अमरूद के पत्तों को पीसकर उसका रस निकालकर उसमें स्वादानुसार चीनी मिलाकर नित्य पीते रहने से स्वप्नदोष की बीमारी में लाभ होता hai.

4) ल्यूकोरिया में लाभ
अमरूद की ताजी पत्तियों का रस १० से २० मिलीलीटर तक नित्य सुबह-शाम पीने से ल्यूकोरिया नामक बीमारी में अप्रत्याशित लाभ पहुंचाता है।

5) कोलेस्‍ट्रॉल कम करे
अमरूद की पत्तियों का जूस लिवर से गंदगी निकालने में मदद करता है। यह खराब कोलेस्‍ट्रॉल को कम करता है।

6) डायरिया मिटाए
यह पेट की कई बीमारियों को ठीक करने में असरदार है। एक कप खौलते हुए पानी में अमरूद की पत्तियों को डाल कर उबालिये और फिर उसका पानी छान कर पी लीजिये।

7) पाचन तंत्र ठीक करे 
अमरूद की पत्तियाँ या फिर उससे तैयार जूस पी कर आप पाचन तंत्र को ठीक कर सकते हैं। इससे फूड पाईजोनिंग में भी काफी राहत मिलती है।

8) दांतों की समस्‍या के लिये
दांतदर्द, गले में दर्द, मसूड़ों की बीमारी आदि अमरूद की पत्तियों के रस से दूर हो जाती है। आप पत्तियों को पीस कर पेस्‍ट बना कर उसे मसूड़ों या दांत पर रख सकती हैं।

9) डेंगू बुखार 
डेंगू बुखार में अमरूद की पत्तियों का रस पियें। यह बुखार को संक्रमण को दूर करता है।

10) एलर्जी दूर करे 
अमरूद की पत्तियों का रस किसी भी प्रकार की एलर्जी को दूर कर सकता है। यह उस वायरस को खतम करता है जिससे एलर्जी पैदा होती है।

11) सिर में दर्द 
आधे सिर में दर्द होने पर सूर्योदय के पूर्व ही कच्चे हरे ताजे अमरूद लेकर पत्थर पर घिसकर लेप बनाएं और माथे पर लगाएं। कुछ दिनों तक नित्य प्रयोग करने से पूर्ण लाभ होता है।

12) मुंह के छाले 
अमरूद के पत्तों पर कत्था लगाकर चबाएं। केवल अमरूद के पत्ते चबाने से भी छाले ठीक हो जाते हैं।

13) मुंहासे मिटाए
यह एक एंटीसेप्‍टिक पत्तियों होती हैं जो कि बैक्‍टीरिया को मार सकती हैं। इसके लिये ताजी पत्‍तियों को पीस कर दाग धब्बों के साथ मुंहासो पर लगाएं। ऐसा रोज़ाना करना उचित रहेगा।

14) बालों की ग्रोथ बढाए 
इन पत्तियों में बहुत सारा पोषण और एंटीऑक्‍सीडेंट होता है जो कि बालों की ग्रोथ को बढ़ाता है।

15) मधुमेह रोगियों के लिये अच्छा 
एक शोध के अनुसार अमरूद की पत्तियां एल्फा-ग्लूकोसाइडिस एंज़ाइम की क्रिया द्वारा रक्त शर्करा को कम करती है। दूसरी तरफ सुक्रोज़ और लैक्टोज़ को सोखने से शरीर को रोकती है जिससे शुगर का स्तर नियंत्रित रहता है।

16) खुजलाहट 
अमरूद की पत्तियों में एलर्जी अवरोधक गुण पाया जाता है। एलर्जी बहुत सारे अन्य खुजलाहट का मुख्य कारण है। अत: एलर्जी को कम करने से खुजलाहट अपने आप कम हो जायेगी। 

अमरूद की पत्तियों के औषधीय गुण
















अमरूद की पत्तियों के औषधीय गुण

अमरूद तो आप सब ने खाया होगा। आप में से कुछ लोगों ने तो अमरूद को पेड़ से तोड़कर भी खाया होगा। घबराइए मत आपको अमरूद पेड़ से तोड़कर खाने के लिए नहीं कहेंगे। बल्कि आज हम आपको ताज़ी अमरूद की पत्तियों के कुछ चमत्कारी गुणों के बारे में बताएंगे।
अगर आप एलर्जी, गठियां दर्द, मुंह के छाले, अपच की समस्या, दांत दर्द, मुहांसों की समस्या, डायरिया या डेंगू आदि रोगों से परेशान है तो इन सबका एक मात्र उपाय अमरूद की पत्तियों में छुपा है। जिसके सेवन से आप इन सब बीमारियों से राहत पा सकते हैं। तो आइए जानते है कि किस तरह अमरूद के पत्तों से आपको कई रोगों में लाभ मिल सकता है…

अमरूद की पत्तियों के औषधीय गुण

1. गठिया
अमरूद के पत्तियों को गर्म करके गठिया के दर्द व सूजन में लगाने से गठिया की सूजन व दर्द दूर हो जाती है। इससे गठिया के दर्द में बेहद आराम मिलता है।

2. कोलेस्‍ट्रॉल
अमरूद की कोमल पत्ते पीसकर प्रतिदिन पिएं, क्योंकि यह लीवर से गंदगी निकालता है और ख़राब कोलेस्‍ट्रॉल को कम करता है।

3. डायरिया रोग
अमरूद और अमरूद की पत्तियां पेट की किसी भी समस्या के लिए असरकारक औषधि है। अतः एक गिलास पानी में अमरूद की पत्‍तियों को डाल कर उबालें और फिर उसका पानी छान कर पीने से यह डायरिया रोग को दूर भगाता है।

4. अपच
अमरूद की पत्ते या फिर उससे तैयार जूस का सेवन अपच की समस्या में राहत प्रदान करता हैं और पाचन तंत्र को भी ठीक रखता है।

5. दांतों की समस्‍या
अगर अमरुद की पत्तियों को पीस कर इसका पेस्‍ट बना कर उसे मसूड़ों या दांत पर रखें तो इससे आपको दांत दर्द या मसूड़ों की समस्या में राहत प्राप्त होगी।

6. डेंगू बुखार
डेंगू बुखार होने पर यदि अमरूद की पत्‍तियों का रस रोगी को पिला दें तो इसके सेवन से बुखार के संक्रमण दूर हो जाते है।

7. एलर्जी
अमरूद की पत्तियों में एंटीसेप्टिक गुण होता है। जो किसी भी बैक्टीरियां को मारने की अचूक शक्ति रखती हैं। इसका रस किसी भी प्रकार की एलर्जी को दूर कर उस वायरस को ख़तम कर देता है जिससे एलर्जी उत्पन्न होती है।

8. आधे सिर का दर्द
आधे सिर में दर्द होने पर कच्चे हरे ताज़े अमरूद को सूर्य के उदय होने से पहले पत्थर पर घिसकर लेप तैयार कर लें और इस लेप को माथे पर लगाएं। ऐसा कुछ दिनों तक नित्य प्रयोग करने से आपको शीघ्र ही लाभ प्राप्त होगा।

9. मुंह के छाले
अपच की समस्या या अन्य कारणों से मुंह के छालें निकल आने पर आप अक्सर परेशान हो जाते हैं। तो मुंह के छालों से छुटकारा पाने के लिए आप अमरूद के पत्तों पर कत्था लगाकर इन्हें धीरे धीरे चबाएं। मुंह के छालों में राहत मिलती है।

10. मुंहासे
एंटीसेप्‍टिक गुण के कारण अमरूद के पत्ते बैक्‍टीरिया को मारने की अचूक शक्ति रखते हैं। ताज़ी पत्तियों को पीस कर मुंहासों पर लगाएं, तो कुछ ही दिनों में मुहांसे दूर भाग जायें

6 Moves For Flat Tummy