Tuesday, 5 April 2016

Juice Cure


अंकुरित आहार


















अंकुरित दानों का सेवन केवल सुबह नाश्ते के समय ही करना चाहिये।

अंकुरित आहार शरीर को नवजीवन देने वाला अमृतमय आहार कहा गया है।

अंकुरित भोजन क्लोरोफिल, विटामिन (`ए´, `बी´, `सी´, `डी´ और `के´) कैल्शियम, फास्फोरस, पोटैशियम, मैगनीशियम, आयरन, जैसे खनिजों का अच्छा स्रोत होता है।

अंकुरीकरण की प्रक्रिया में अनाज/दालों में पाए जाने वाले कार्बोहाइट्रेड व प्रोटीन और अधिक सुपाच्य हो जाते हैं।

अंकुरित आहार को अमृताहर कहा गया है अंकुरित आहार भोजन की सप्राण खाद्यों की श्रेणी में आता है। यह पोषक तत्वों का श्रोत मन गया है। 
अंकुरित आहार न सिर्फ हमें उन्नत रोग प्रतिरोधी व उर्जावान बनाता है बल्कि शरीर का आंतरिक शुद्धिकरण कर रोग मुक्त भी करता है । 

अंकुरित आहार अनाज या दालों के वे बीज होते जिनमें अंकुर निकल आता हैं इन बीजों की अंकुरण की प्रक्रिया से इनमें रोग मुक्ति एवं नव जीवन प्रदान करने के गुण प्राकृतिक रूप से आ जाते हैं।

अंकुरित भोजन क्लोरोफिल, विटामिन (`ए´, `बी´, `सी´, `डी´ और `के´) कैल्शियम, फास्फोरस, पोटैशियम, मैगनीशियम, आयरन, जैसे खनिजों का अच्छा स्रोत होता है। 

अंकुरित भोजन से काया कल्प करने वाला अमृत आहार कहा गया है अर्थात् यह मनुष्य को पुनर्युवा, सुन्दर स्वस्थ और रोगमुक्त बनाता है। 

यह महँगे फलों और सब्जियों की अपेक्षा सस्ता है, इसे बनाना खाना बनाने की तुलना में आसान है इसलिये यह कम समय में कम श्रम से तैयार हो जाता है। 

बीजों के अंकुरित होने के पश्चात् इनमें पाया जाने वाला स्टार्च- ग्लूकोज, फ्रक्टोज एवं माल्टोज में बदल जाता है जिससे न सिर्फ इनके स्वाद में वृद्धि होती है बल्कि इनके पाचक एवं पोषक गुणों में भी वृद्धि हो जाती है।

खड़े अनाजों व दालों के अंकुरण से उनमें उपस्थित अनेक पोषक तत्वों की मात्रा दोगुनी से भी ज्यादा हो जाती है, मसलन सूखे बीजों में विटामिन 'सी' की मात्रा लगभग नहीं के बराबर होती है लेकिन अंकुरित होने पर लगभग दोगुना विटामिन सी इनसे पाया जा सकता है। 

अंकुरण की प्रक्रिया से विटामिन बी कॉम्प्लेक्स खासतौर पर थायमिन यानी विटामिन बी१, राइबोप्लेविन यानी विटामिन बी२ व नायसिन की मात्रा दोगुनी हो जाती है। 

इसके अतिरिक्त 'केरोटीन' नामक पदार्थ की मात्रा भी बढ़ जाती है, जो शरीर में विटामिन ए का निर्माण करता है। 

अंकुरीकरण की प्रक्रिया में अनाज/दालों में पाए जाने वाले कार्बोहाइट्रेड व प्रोटीन और अधिक सुपाच्य हो जाते हैं। अंकुरित करने की प्रक्रिया में अनाज पानी सोखकर फूल जाते हैं, जिनसे उनकी ऊपरी परत फट जाती है व इनका रेशा नरम हो जाता है। परिणामस्वरूप पकाने में कम समय लगता है और वे बच्चों व वृद्धों की पाचन क्षमता के अनुकूल बन जाते हैं।

अंकुरित करने के लिये चना, मूँग, गेंहू, मोठ, सोयाबीन, मूँगफली, मक्का, तिल, अल्फाल्फा, अन्न, दालें और बीजों आदि का प्रयोग होता है। अंकुरित भोजन को कच्चा, अधपका और बिना नमक आदि के प्रयोग करने से अधिक लाभ होता है। एक दलीय अंकुरित (गेहूं, बाजरा, ज्वार, मक्का आदि) के साथ मीठी खाद्य (खजूर, किशमिश, मुनक्का तथा शहद आदि) एवं फल लिए जा सकते हैं। 

द्विदलीय अंकुरित (चना, मूंग, मोठ, मटर, मूंगफली, सोयाबीन, आदि) के साथ टमाटर, गाजर, खीरा, ककड़ी, शिमला मिर्च, हरे पत्ते (पालक, पुदीना, धनिया, बथुआ, आदि) और सलाद, नींबू मिलाकर खाना बहुत ही स्वादिष्ट और स्वास्थ्यदायक होता है। इसे कच्चा खाने बेहतर है क्यों कि पकाकर खाने से इसके पोषक तत्वों की मात्रा एवं गुण में कमी आ जाती है। 

अंकुरित दानों का सेवन केवल सुबह नाश्ते के समय ही करना चाहिये। एक बार में दो या तीन प्रकार के दानों को आपस में मिला लेना अच्छा रहता है। यदि ये अंकुरित दाने कच्चे खाने में अच्छे नहीं लगते तो इन्हें हल्का सा पकाया भी जा सकता है। फिर इसमें कटे हुए प्याज, कटे छोटे टमाटर के टुकड़े, बारीक कटी हुई मिर्च, बारीक कटा हुई धनिया एकसाथ मिलाकर उसमें नींबू का रस मिलाकर खाने से अच्छा स्वाद मिलता है।

अंकुरण की विधि -

अंकुरित करने वाले बीजों को कई बार अच्छी तरह पानी से धोकर एक शीशे के जार में भर लें शीशे के जार में बीजों की सतह से लगभग चार गुना पानी भरकर भीगने दें अगले दिन प्रातःकाल बीजों को जार से निकाल कर एक बार पुनः धोकर साफ सूती कपडे में बांधकर उपयुक्त स्थान पर रखें ।

गर्मियों में कपडे के ऊपर दिन में कई बार ताजा पानी छिडकें ताकि इसमें नमी बनी रहे।

गर्मियों में सामान्यतः २४ घंटे में बीज अंकुरित हो उठते हैं सर्दियों में अंकुरित होने में कुछ अधिक समय लग सकता है । 

अंकुरित बीजों को खाने से पूर्व एक बार अच्छी तरह से धो लें तत्पश्चात इसमें स्वादानुसार हरी धनियाँ, हरी मिर्च, टमाटर, खीरा, ककड़ी काटकर मिला सकते हैं द्य यथासंभव इसमें नमक न मिलाना ही हितकर है।

अनाज अंकुरित करने का तरीका


















अनाज अंकुरित करने का तरीका

किसी भी अनाज, गिरी तथा बीज आदि को अंकुरित करने का एक सीधा-सा तरीका है- इसके लिए अनाज को 12 घंटे तक पानी में भिगोने के बाद छानकर एक कपड़े में बांध लें। 

लेकिन इसके लिए तीन नियमों का पालन करना जरूरी हैं- 

पहला भिगोने के बाद पानी हटाना, 
दूसरा पानी हटाने के बाद हवा लगाना और 
तीसरा अंधेरा। 

मूंगफली में 12 घंटे में अंकुर फूटते हैं, 
चना 24 घंटे में और 
गेहूं आदि 36 घंटे में अंकुरित होते हैं। 

वैसे तो अंकुरित अनाजों को कच्चा ही खाना चाहिए लेकिन यदि उन्हे स्वादिष्ट बनाना है तो उनमें थोड़ी मूंग भिगोकर मिला दें। फिर उसमें हरा धनिया, टमाटर, अदरक और प्याज मिला लें।

यदि उसमें चना मिलाना चाहे तो मिला सकते हैं लेकिन बिल्कुल थोड़ी मात्रा में। 

अब प्रश्न उठता है कि इन्हे अलग-अलग भिगोएं या एक साथ। इसे अलग-अलग भिगोना अच्छा है जैसे- आपने चना भिगोया और उसके साथ मूंग भी भिगो दी लेकिन दोनों के अंकुरित होने का समय अलग-अलग है। ऐसे में मूंग पहले ही अंकुरित हो जाएगा, लेकिन चना नहीं हो पाएगा। 

यदि चने के साथ मूंग को 24 घंटे छोड़ते हैं तो मूंग का अंकुर अधिक लम्बा हो जाएगा और उसका न्यूट्रेशन कम हो जाएगा। जिनका अंकुरण समय एक समान हो उन अनाजों को एक साथ भिगो सकते हैं।

अंकुरित आहार का फायदा-

इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसमें वेस्टेज नहीं होता जिसके कारण उसे निकालने के लिए शरीर को अनावश्यक एनर्जी नहीं लगानी पड़ती। 

शरीर में वेस्टेज न होने से एनर्जी शरीर की सफाई में लग जाती है जिससे सारे शरीर की सफाई हो जाती है। 

इससे रोग पैदा होने का जो भी कारण है वह शरीर से बाहर निकल जाता है।

बर्फ के औषधीय गुण












बर्फ के औषधीय गुण

गर्मियों में बर्फ सभी को अच्छा लगता है। बर्फ का प्रयोग हम गर्मी से राहत पाने के लिए करते हैं। लेकिन बर्फ के कई औषधीय गुण भी हैं। 

जल जाने पर :
जल जाने के तुरंत बाद बर्फ का टुकड़ा लेकर जले स्थान पर मलने से जलन शांत होती है। छाले नहीं पड़ते।

नकसीर :
नाक से खून निकलने पर बर्फ को किसी कपड़े में लेकर नाक के ऊपर चारों ओर रखें। थोड़ी देर में खून निकलना बंद हो जाएगा।

चोट लगने पर :
किसी भी प्रकार की अंदरूनी चोट लगने पर तुरंत बर्फ मलने से खून जमने की आशंका नहीं रहती। दर्द भी कम होता है।

खून बहने पर :
चोट लगने के कारण खून बह रहा हो और किसी भी प्रकार से खून रूक नहीं रहा हो तो ऐसे में उस स्थान पर बर्फ की पट्टी बांध दें। इससे खून बहना बंद हो जाएगा।

मोच आने पर :
मोच आने पर उस जगह पर तुरंत बर्फ लगाने से सूजन नहीं आती।

गले में खराश :
गले में खराश होने पर बर्फ का टुकड़ा लेकर गले के बाहर धीरे-धीरे मलने पर खराश में राहत मिलती है।

वात रोग :
वात या गठिया के दर्द को दूर करने के लिए दर्द वाले हिस्से पर बर्फ का टुकड़ा दो मिनट तक रखें। फिर हटा दें। दो मिनट बाद पुन: उस स्थान पर बर्फ का टुकड़ा रखें। यह प्रक्रिया 8 से 10 बार करें। इससे दर्द में राहत मिलती है।

Monday, 4 April 2016

अंकुरित गेहूं












अंकुरित गेहूं 

अंकुर उगे हुए गेहूं में विटामिन-ई भरपूर मात्रा में होता है। शरीर की उर्वरक क्षमता बढ़ाने के लिए विटामिन-ई एक आवश्यक पोषक तत्व है। यही नहीं, इस तरह के गेहूं के सेवन से त्वचा और बाल भी चमकदार बने रहते हैं। किडनी, ग्रंथियों, तंत्रिका तंत्र की मजबूत तथा नई रक्त कोशिकाओं के निर्माण में भी इससे मदद मिलती है।

इतना ही नहीं, अंकुरित गेहूं खाने से शरीर का मेटाबॉलिज्म रेट बढ़ता है। यह शरीर में बनने वाले विषैले तत्वों को भी निष्प्रभावी कर, रक्त को शुद्घ करता है। अंकुरित गेहूं के दानों को चबाकर खाने से शरीर की कोशिकाएं शुद्घ होती हैं और इससे नई कोशिकाओं के निर्माण में भी मदद मिलती है। अंकुरित गेहूं में उपस्थित फाइबर के कारण इसके नियमित सेवन से पाचन क्रिया भी सुचारु रहती है। अतः जिन लोगों को पाचन संबंधी समस्याएं हो उनके लिए भी अंकुरित गेहूं का सेवन फायदेमंद है।

40 ग्राम यानी 4 चम्मच (बड़े) गेहू और 10 ग्राम मेथीदाना- दोनों को 4-5 बार साफ पानी से अच्छी तरह धो लें, धोने के बाद आधा गिलास पानी में डालकर चौबीस घंटे तक रखें। चौबीस घंटे बाद पानी से निकालकर एक गीले तथा मोटे कपड़े में रखकर बांध दें और चौबीस घंटे तक हवा में लटका कर रखें। गिलास का पानी फेंकें नहीं, इस पानी में आधा नींबू निचोड़कर दो ग्राम सोंठ का चूर्ण डाल दें। इसमें 2 चम्मच शहद घोलकर सुबह खाली पेट पी लें। यह पेय बहुत शक्तिवर्धन, पाचक और स्फूर्तिदायक है।

चौबीस घंटे पूरे होने पर हवा में लटके कपड़े को उतारकर खोलें और गेहूं तथा मेथीदाना एक प्लेट में रखकर इस पर पिसी काली मिर्च और सेंधा नमक बुरक दें। गेहूं और मेथीदाना अंकुरित हो चुका होगा। इसे खूब चबा-चबाकर प्रात: खायें।

यदि इसे मीठा करना चाहें तो काली मिर्च और नमक न डालकर गुड़ मसलकर डाल दें, शक्कर न डालें। यह मात्रा एक व्यक्ति के लिये हैं।
यह फार्मूला सस्ता भी है और बनाने में सरल भी इसमें गजब की शक्ति है, यह स्फूर्ति और पुष्टि देने वाला है। इस प्रयोग को प्रौढ़ ही नहीं, वृध्द स्त्री पुरुष भी कर सकते हैं। यदि दांत न हों या कमजोर हों तो वे अंकुरित अन्न चबा नहीं सकते, ऐसी स्थिति में निम्नलिखित फार्मूले का सेवन करना चाहिए।

प्रात:काल एक कटोरी गेहूं और तीन चम्मच मेथीदाना अच्छी तरह धो-साफ कर चार कप पानी में डालकर चौबीस घंटे रखें। दूसरे दिन सुबह इसका एक कप पानी लेकर नींबू तथा शहद डालकर पी लें। शेष तीन कप पानी निकाल कर फ्रिज में रख दें। यदि फ्रिज न हो तो पानी गिलास में डालकर गिलास पर गीला कपड़ा लपेट दें और गिलास ठंडे पानी में रख दें और ढंक दें, ताकि पानी शाम तक खराब न हो। इस पानी को शाम तक एक कप पीकर समाप्त कर दें। गेहूं और मेथीदाने को फेंकें नहीं बल्कि फिर से 4 कप पानी में डालकर रख दें। दूसरे दिन सुबह 1 कप पानी और शेष दिन भर में पी लें। अब नया गेहूं तथा मेथीदाना लें और सुबह पानी में डालकर रख दें। दो दिन तक भिगोये हुए गेहूं और मेथी दाने को सुखा लें और पिसाने के रखे गये गेहूं में मिला दें। इस तरह बिना दांत वाले भी इस नुस्खे का सेवन कर लाभ उठा सकते हैं।

नेचुरल ब्लीच से 15 मिनट में गोरी त्वचा










नेचुरल ब्लीच से 15 मिनट में गोरी त्वचा

हमारे चेहरे की रंगत को बहुत से बाहरी कारण प्रभावित करते हैं. प्रदूषण, सूरज की किरणें और रसायनिक उत्पादों से हमारे चेहरे की रंगत सबसे अधिक प्रभावित होती है.

चेहरे की रंगत वापस पाने का सबसे आसान उपाय है ब्लीच कराना. लेकिन क्या आपने कभी ये सोचा है कि रासायनिक ब्लीच से त्वचा पर कितना बुरा असर पड़ता है? बाजार में बिकने वाले ब्लीच करने से त्वचा पर कुछ समय के लिए तो निखार आ जाता है लेकिन इससे त्वचा को काफी नुकसान पहुंचता है. ऐसे में बेहतर होगा कि आप नेचुरल ब्लीच का इस्तेमाल करें.

हालांकि बाजार में कई ऐसे ब्रांड हैं जो ये दावा करते हैं कि उनके इस्तेमाल से त्वचा को कोई नुकसान नहीं पहुंचेगा लेकिन संदेह तो बना ही रहता है. आप चाहें तो इन घरेलू ब्लीच का इस्तेमाल करके कुछ ही मिनटों में गोरी-निखरी त्वचा पा सकती हैं.

1. नींबू और शहद को बराबर मात्रा में मिला लें. इस पेस्ट को चेहरे पर लगाने से पहले चेहरे को साफ पानी से धो लें. इस मिश्रण को चेहरे पर 15 मिनट तक लगाकर सूखने दें. उसके बाद चेहरे को हल्के गुनगुने पानी से धो लें. चेहरे की रंगत खिल उठेगी. इस पैक को सप्ताह में दो से तीन बार लगाकार आप और भी बेहतर परिणाम पा सकती हैं.

2. मसूर दाल को पानी में भिंगोकर कुछ देर के लिए छोड़ दें. उसके बाद इसे महीन पीस लें. आप चाहें तो इसमें कुछ मात्रा में कच्चा दूध भी मिला सकती हैं. इसके बाद इस पैक को चेहरे पर लगाकर कुछ देर के लिए छोड़ दें. जब ये सूख जाए तो चेहरा धो लें. आपको खुद ही फर्क नजर आने लगेगा.

3. आप चाहें तो दही में बेसन मिलाकर भी चेहरे की रंगत निखार सकती हैं. ये भी एक बेहतरीन नेचुरल ब्लीच है. दो चम्मच दही में एक चम्मच बेसन अच्छी तरह मिला लें. उसके बाद इस पेस्ट को चेहरे पर समान रूप से लगाएं. जब ये पैक सूख जाए तो चेहरे को साफ गुनगुने पानी से धो लें. आपका चेहरा साफ हो जाएगा.

रोजाना कैसे पियें अधिक पानी
















रोजाना कैसे पियें अधिक पानी

पर्याप्‍त मात्रा में पानी पीने की बात आने पर यह कहना तो बहुत आसान है कि हो जायेगा। लेकिन यह बात जानते हुए भी हर दिन कम से कम दो लीटर पानी पीना चाहिए ऐसा करना हमारे लिए थोड़ा मुश्किल होता है।

1. अधिक पानी पीने के उपाय
पानी शरीर का अनिवार्य पोषक तत्व है। हमारे शरीर का 70 फीसदी हिस्‍सा पानी होता है। भोजन के बिना तो कुछ दिन तक जीवित रह सकते हैं किन्तु पानी के बिना नहीं। शरीर के निर्माण तथा पोषण में अपनी अति महत्वपूर्ण भूमिका के कारण पर्याप्‍त मात्रा में पानी पीना चाहिए। पर्याप्‍त मात्रा में पानी पीने की बात आने पर यह कहना तो बहुत आसान है कि हो जायेगा। लेकिन यह बात जानते हुए भी हर दिन कम से कम दो लीटर पानी पीना चाहिए ऐसा करना हमारे लिए थोड़ा मुश्किल होता है। यहां पर कुछ अनोखे उपाय दिये गये है जिनकी मदद से आप दिन भर में आसानी से अधिक पीना पीने लगेंगे।

2. एक लक्ष्य निर्धारित करें
नियमित रूप से पर्याप्‍त पानी पीने की शुरुआत करने से पहले, आपको इस बात पर अनुमानित विचार करना चाहिए कि आप पहले एक दिन में कितना पानी पीते थे और अब आपको प्रतिदिन कितना अधिक पानी पीने की जरूरत है।

3. बोतल के साथ अनुबंधित
पानी पीने के लिए अपनी पसंद की बोतल का चयन करें। अपनी पसंद की बोतल के होने आप पानी पीने की लिए ज्‍यादा उत्‍साहित होंगे। आपने यह बात बच्‍चों में नोटिस की होगी। नई या पसंदीदा बोतल होने पर बच्‍चे अक्‍सर पानी पीने के प्रति ज्‍यादा उत्‍साहित होते हैं। यह अच्‍छे से रंग या सुंदर चित्र की या जो भी आपको पसंद हो आप ले सकते हैं।

4. हमेशा पानी का साथ रखें
बाहर जाने पर अक्‍सर पानी की आवश्‍यकता होने पर आपको पानी नहीं मिल पाता। और आप हमेशा रुककर इसे खरीदने में सक्षम भी नहीं होते। जिससे आप पानी की मात्रा कम लेते हैं। इसलिए जब भी आप घर से बाहर जाये तो हर बार पानी की एक बोतल को अपने साथ जरूर लेकर जाये। बोतल के साथ में होने से पानी पीने की अधिक संभावना रहती है।

5. रात में पानी को अपने पास रखें
रात को सोते समय पानी को अपने पास रखें ताकि रात को नींद खुलने पर आप इसे आसानी से पी सकें। रात को पानी लेने जाने के चक्‍कर में कई बार आप प्‍यास लगने पर भी पानी पीने नहीं जाते। और सुबह पानी पीने की स्‍वस्‍थ आदत को भी नहीं अपना पाते। इसके कारण आप सात या आठ घंटे बिना पानी के रहने के कारण अपने शरीर को भी डिहाइड्रेट कर देते हैं।

6. बोतल पर निशान लगाये
दिन भर अपने आपको पानी पीने की दिशा में गतिमान करने के लिए पानी के स्‍तर और समय की सीमा को ध्‍यान रखने के लिए पानी की बोतल पर निशान लगाये। एक स्‍थायी मार्कर लेकर पानी को सेक्शन में चिह्न करें और ऐसा करने के लिए अगला समय भी लिखें। जैसे पहले सेक्शन में पानी को 11 बजे तक और दूसरे सेक्शन में पानी को 2 बजे तक सेवन किया जाना चाहिए।

7. बोतल को हमेशा भरा हुआ रखें
ऐसा बाहर होने पर संभव नहीं है, लेकिन घर या ऑफिस पर आप अपनी बोतल को हमेशा भरा हुआ रखें ताकि वह कभी भी खाली न हो। आमतौर पर ऐसा करने से आपको अधिक से अधिक पानी पीने में मदद मिलेगी।

8. स्ट्रॉ से पानी पीना
स्ट्रॉ के माध्‍यम से अधिक पीने के चक्‍कर में आप बहुत तेजी से पीते हैं। यही तर्क पानी पर भी लागू होता है। इसलिए दिन भर में पानी की मात्रा को बढ़ाने के लिए आप स्‍ट्रॉ से पानी पीने की कोशिश करें।

9. सही तापमान का पता लगाएं
तापमान से पानी के स्वाद में काफी फर्क पड़ता है। कुछ लोग बर्फ का ठंडा पानी पीना पसंद करते हैं जबकि कुछ नार्मल या थोड़ा गुनगुना पानी पीना पसंद करते हैं। आप थोड़ा सा प्रयोग करके स्‍वयं को सूट करने वाले तापमान का पता लगाकर पानी के स्‍वाद को थोड़ा सा बेहतर बना सकते हैं।

10. पानी को फ्लेवर दें
पानी में स्‍वाद को जोड़ने के लिए अपने पानी में कोई जड़ी बूटी या फल के टुकड़े मिलाये, ताकी आप वास्‍तव में इसे पीने के लिए तत्‍पर रहें। वैसे तो नींबू, संतरा और मिंट सबसे आम फ्लेवर है, लेकिन आप अपने पसंदीदा या कुछ नया लेने का भी प्रयास कर सकते हैं।
कृत्रिम फ्लेवर की बजाय प्राकृतिक फ्लेवर को अपनाये।

11. अन्य पेय पदार्थों को भी लें
अगर आपको अन्‍य पेय जैसे जूस, चाय, सॉफ्ट ड्रिंक या कॉफी पीने की आदत हैं, तो इसे पानी के साथ बदलने का प्रयास करें। लेकिन ध्‍यान रहें कि सॉफ्ट ड्रिंक और पैक फलों के जूस में चीनी बहुत ज्‍यादा और पोषण तत्व बिल्‍कुल भी नहीं होते, और सिर्फ कैलोरी की आपको जरूरत नहीं हैं।

12. पानी को खाओ
अगर भारी पानी की बोतल को अपने साथ ले जाना मुमकिन नहीं है तो इसकी बजाय फलों और सब्जियों के छोटे बॉक्‍स को अपने साथ रखें। खीरा, सलाद का पत्‍ता, अजवाइन, तरबूज और स्ट्रॉबेरी जैसे खाद्य पदार्थों बहुत अधिक मात्रा में पानी होता है।