मुहांसे दूर करने के घरेलू नुस्खे
आप अपने चेहरे पर मुहांसों से परेशान हैं तो अपनाएं कुछ ऐसे नुस्खे जिससे आपकी सारी समस्या दूर हो जाएगी.
मुहांसे क्या हैं?
मुहांसे (Pimples or Acne) त्वचा की एक स्थिति है जो सफेद, काले और जलने वाले लाल दाग के रूप में दिखते हैं. यह लगभग 14 वर्ष की आयु से शुरू होकर 30 वर्ष तक कभी भी निकल सकते हैं. ये निकलते समय तकलीफ दायक होते हैं और बाद में भी इसके दाग-घब्बे चेहरे पर रह जाते हैं.
मुहांसों के कारण
- त्वचा में तेल की अत्यधिक मात्रा का स्राव
- हार्मोनल परिवर्तन के कारण
- त्वचा के बाहरी हिस्से में रुकावट
- वंशानुगत
- मासिक धर्म
- गर्भावस्था
- तनाव
मुहांसों के लिए घरेलू नुस्खे
- ताजा नींबू का रस मुहांसों और ब्लैक्हेडस पर लगाएं.
- एक चम्मच धनिया पाउडर के साथ थोड़ा सा हल्दी पाउडर मिलाकर मुहांसे वाली त्वचा पर लगाएं. इसे पूरी रात त्वचा पर लगे रहने दें और सुबह अपना चहरा ठंडे पानी से धो लें.
- करी पत्ते का पेस्ट बनाएं और अपनी त्वचा पर पूरी रात लगे रहन दें और सुबह उठकर अपना चेहरा गुनगुने पानी से धो लें. यह झुर्रियों को हल्का करने में मदद करता है.
- कच्चे दूध के साथ जायफल (Jaiphal) का पेस्ट बनाएं. मुहांसो और ब्लैक्हेडस पर 20 मिनट या रात भर लगे छोड़ दें. यह तब तक करते रहें जब तक चेहरा साफ नहीं हो जाता. इसे कम से कम 10-12 दिनों तक करें तभी चेहरे में असर दिखेगा.
- सूखी त्वचा के लिए चिकने पत्थर पर चंदन और कच्चे दूध की कुछ बूंदों के साथ रगड़ें. इस पेस्ट को प्रभावित क्षेत्रों पर लगाएं. 1 घंटे के लिए रखकर धो लें.
- चिकनी त्वचा के लिए चंदन और गुलाब जल का पेस्ट बनाएं जिसे प्रभावित क्षेत्रों पर 1 घंटे के लिए रखें और धो लें.
- ताजा मेथी के पत्तों का पेस्ट बनाएं और यह रात भर में आपके मुहांसो को साफ कर देगा.
बालों की नेचुरल ब्यूटी के लिए
● इसमें कोई दो राय नहीं है कि सुन्दर काले व चमकदार बाल नारी की सुंदरता में चार चांद लगा देते हैं। पुराने समय में बालों के रखरखाव व निखार के लिए नारियां अनेक तरीके इस्तेमाल में लाती थीं, जिनसे बाल वास्तव में ही काले, घने, मजबूत और चमकदार बनते थ।
आज के युग में कई तरह के साबुन और अन्य चीजों को बालों की सार-संभाल के लिए प्रयोग में लाया जाने लगा है। इनसे बाल पोषक तत्व हासिल करने के स्थान पर समय से पूर्व टूट कर गिरने लगते हैं, साथ ही सफेद होने लगते हैं। इस लेख में हम अपने पाठकों को बालों के रख रखाव के बारे में कुछ ऐसी महत्वपूर्ण जानकारियां दे रहे हैं, जिन्हें इस्तेमाल में लाकर बालों को सुदृढ़, काले और चमकदार बनाया जा सकता है।
● खट्टी दही में चुटकी भर फिटकरी मिला लें, साथ ही थोड़ी सी हल्दी भी मिला लें। इस मिश्रण को सिर के बालों में लगाने से सिर की गंदगी तो दूर होती ही, साथ ही सिर में फैला संक्रमण भी दूर होता है। इस क्रिया को करने से सिर के बाल निखर उठते हैं।
● बालों को धोने के बाद गोलाकार कंघी से बालों में भली प्रकार से ब्रश करना चाहिए। इसके बाद सिर के बालों की जड़ों में उंगली घुमाते हुए अपना हाथ ऊपर से नीचे की ओर फिराएं। ऐसा करने से आपके बाल हमेशा मुलायम बने रहेंगे।
● हफ्ते में कम से कम एक बार अपने सिर के बालों में जैतून के तेल की मालिश अवश्य करें। ऐसा करने से सिर के बाल सफेद होने बंद होते हैं और मजबूती पाते हैं।
● धूल और प्रदूषण के प्रभाव से सिर के बाल रूखे और बेजान से हो जाते हैं। इनसे छुटकारा पाने के लिए हमेशा अच्छे शैम्पू से बालों को धोना चाहिए और अच्छा हेयर टॉनिक लगाना चाहिए
● कुदरती साधनों के इस्तेमाल से बालों को सुंदर बनाया जा सकता है। बालों को अच्छी तरह धोने के बाद बालों में ताजी मेहंदी पीसकर लगानी चाहिए। कुछ वक्त बाद बालों को पानी से धो लेना चाहिए।
● हफ्ते में एक बार बालों में तेल की मालिश जरूर करनी चाहिए। ऐसा करने से बालों की बेहतर कसरत हो जाती है। और सिर में खून का दौरा भी सुचारु रूप से होता रहता है।
● भूलकर भी अपने सिर के बालों के साथ ज्यादा एक्सपेरिमेंट न करें। ऐसा करने से बाल कमजोर होकर असमय टूटने लगते हैं।
● बालों की साफ-सफाई में लापरवाही न बरतें। याद रखें कि पसीना बालों की जड़ों में पहुंचने पर बालों को नुकसान पहुंचाता है। इससे बचने के लिए हफ्ते में कम से कम दो बार बालों की सफाई जरूर करें
● बालों में अक्सर रूसी की समस्या उत्पन्न हो जाया करती है जिससे बाल बेजान होकर टूटने लगते हैं। इससे छुटकारा पाने के लिए सबसे पहले बालों में अच्छी तरह तेल लगा लें, फिर गर्म पानी में भीगे तौलिए से बालों को भाप दें। ऐसा करने से बालों की रूसी खत्म हो जाएगी।
● प्रयोग में लाई गई चाय की पत्ती को थोड़े से पानी में उबाल लें। इसके ठंडा होने पर इसे बालों में लगाएं। हफ्ते में कम से कम एक बार इस क्रिया को जरूर करें। इस क्रिया को करने से बाल मजबूत हो जाएंगे
Soursop for Health Benefits -
The results of some of the university's research to prove if the magic tree and its fruit can be:
Attacking cancer cells with naturally safe and effective, without nausea, weight loss, hair loss, as happened in chemo therapy.
Protecting the immune system and prevent deadly infections.
Increased energy and improved physical appearance.
Effectively selecting a target and kill the bad cells from 12 different types of cancer, including colon, breast, prostate, lung, and pancreas.
Power works 10,000 times stronger in slowing the growth of cancer cells compared with adriamycin and chemo therapy is commonly used.
Unlike chemo therapy, this juice is only selectively hunt down and kill the bad cells and not harm or kill healthy cells.
एलोवेरा जूस - बेस्ट डाइट जूस
अगर आप एक स्वस्थ तरीके से अपना वजन कम करना चाहती हैं, तो एलो वेरा का जूस बना कर पीजिये। एलो वेरा जूस में एंटीऑक्सीडेंट की मात्रा काफी ज्यादा होती है जिससे इम्मयून सिस्टम बिल्कुल मजबूत हो जाता है और शरीर अंदर से साफ हो जाता है। साथ ही एलो वेरा जूस पीने से शरीर को कोई बीमारी भी नहीं लगती। एलो वेरा जूस में काफी प्रोटीन, 10 तरक के विटामिन और 30 प्रकार के एंजाइम पाए जाते हैं। तो अगर आप डायट पर हैं तो, इस एलो वेरा जूस को रोज पियें। आइये जानते हैं कि एलो वेरा जूस कैसे बनाया जाता है।
कितने- 1 गिलास
तैयारी में समय- 15 मिनट
बनाने में समय- 10 मिनट
सामग्री- 2 चम्मच ऐलो वेरा का रस 1 नींबू अदरक छोटे पीस में कटा चीनी अगर जरुरत हो तो चुटकी भर नमक पानी जरुरत के अनुसार
विधि- एक जूसर में नींबू का रस, पानी, अलो वेरा जेल, अदरक के टुकड़े, चीनी और नमक मिक्स कर के ब्लेंड करें। फिर इसे एक गिलास में छान लें । जरुरत के अनुसार नमक या चीनी को बढ़ा या घटा लें। आपका ऐलो वेरा जूस तैयार है। इसे सर्व करने से पहले इसमें आइस क्यूब्स डालना ना भूलें।
थायराइड के इलाज के लिए करें अखरोट का सेवन
● तितली के आकार की थॉयराइड ग्रंथि गले में पायी जाती है।
● यह ऊर्जा और पाचन की मुख्य ग्रंथि है, यह मास्टर लीवर है।
● अखरोट का सेवन करने से थॉयराइड ग्रंथि सुचारु हो जाती है।
● इसमें सेलेनियम नामक तत्व होता है जो थॉयरइड में प्रभावी है।
● थॉयराइड ग्रंथि की समस्या से ग्रस्त लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है, खानपान में अनियमिता के कारण यह समस्या होती है। थॉयराइड ग्रंथि
तितली के आकार की होती है जो गले में पाई जाती है। यह ग्रंथि उर्जा और पाचन की मुख्य ग्रंथि है। यह एक तरह के मास्टर लीवर की तरह है जो ऐसे जीन्स का स्राव करती है जिससे कोशिकाएं अपना कार्य ठीक प्रकार से करती हैं। इस ग्रंथि के सही तरीके से काम न कर पाने के कारण कई तरह की समस्यायें होती हैं। अखरोट इस बीमारी के उपचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इस लेख में विस्तार से जानें थॉयराइड फंक्शन और इसके उपचार के लिए अखरोट के सेवन के बारे में।
क्या है थॉयराइड समस्या :-
थॉयराइड को साइलेंट किलर माना जाता है, क्योंकि इसके लक्षण व्यक्ति को धीरे-धीरे पता चलते हैं और जब इस बीमारी का निदान होता है तब तक देर हो चुकी होती है। इम्यून सिस्टम में गड़बड़ी से इसकी शुरुआत होती है लेकिन ज्यादातर चिकित्सक एंटी बॉडी टेस्ट नहीं करते हैं जिससे ऑटो-इम्युनिटी दिखाई देती है।
थॉयराइड की समस्या दो प्रकार की होती है :-
हाइपोथॉयराइडिज्म और हाइपरथॉयराइडिज्म। थॉयराइड ग्रंन्थि से अधिक हॉर्मोन बनने लगे तो हाइपरथॉयरॉइडिज्म और कम बनने लगे तो हाइपोथायरॉइडिज्म होता है। थॉयराइड की समस्या होने पर थकान, आलस, कब्ज का होना, चिड़चिड़ापन, अत्यधिक ठंड लगना, भूलने की समस्या, वजन कम होना, तनाव और अवसाद जैसे लक्षण दिखाई देते हैं।
अखरोट है फायदेमंद :-
अखरोट में सेलेनियम नामक तत्व पाया जाता है जो थॉयराइड की समस्या के उपचार में फायदेमंद है। 1 आंउस अखरोट में 5 माइक्रोग्राम सेलेनियम होता है। अखरोट के सेवन से थॉयराइड के कारण गले में होने वाली सूजन को भी काफी हद तक कम किया जा सकता है। अखरोट सबसे अधिक फायदा हाइपोथॉयराइडिज्म (थॉयराइड ग्रंथि का कम एक्टिव होना) में करता है।
सेलीनियम है फायदेमंद :-
थॉयराइड ग्रंथि में सेलीनियम उच्च सांद्रता में पाया जाता है इसे थायराइड-सुपर-न्युट्रीएंट भी कहा जाता है। यह थॉयराइड से सम्बंधित अधिकांश एंजाइम्स का एक प्रमुख घटक द्रव्य है, इसके सेवन से थॉयराइड ग्रंथि सही तरीके से काम करने लगता है। यह ऐसा आवश्यक सूक्ष्म तत्व है जिस पर शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता सहित प्रजनन आदि अनेक क्षमतायें भी निर्भर करती है। यानी अगर शरीर में इस तत्व की कमी हो गई तो रोग-प्रतिरोधक क्षमता भी कम हो जाती है। इसलिए खाने में पर्याप्त मात्रा में सेलेनियम के सेवन की सलाह दी जाती है। अखरोट के अलावा सेलेनियम बादाम में भी पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है।
● थॉयराइड ग्रंथि की समस्या होने पर नमक का सेवन बढ़ा देना चाहिए, इसके अलावा स्वस्थ खानपान और नियमित रूप से व्यायाम को अपनी दिनचर्या बनायें।.
पथरी के रामबाण घरेलू उपाय
किडनी में स्टोन की समस्या आजकल आम हो चली है। इसकी बड़ी वजह खान-पान की गलत आदतें होती हैं। जब नमक एवं अन्य खनिज (जो हमारे मूत्र में होते हैं) वे एक दूसरे के संपर्क में आते है या अगर किसी कारण से पेशाब गाढा हो जाता है तो किडनी के अन्दर छोटे-छोटे पत्थर जैसी कठोर वस्तुएं बन जाती हैं जिन्हे गुर्दे की पथरी के रूप में जाना जाता है।
गुर्दे की पथरी अलग अलग आकार की हो सकती है| कुछ पथरी रेत के दानों की तरह बहुत हीं छोटे आकार के होते हैं तो कुछ बहुत हीं बड़े। आमतौर पर छोटे मोटे पथरी मूत्र के जरिये शरीर के बाहर निकल जाया करते हैं लेकिन जो पथरी आकार में बड़े होते हैं वे बाहर नहीं निकल पाते एवं मूत्र के बाहर निकलने में बहुत ही बाधा डालते हैं उससे बहुत हीं ज्यादा पीड़ा उत्पन्न होती है। पथरी का दर्द कभी-कभी बर्दाश्त से बाहर हो जाता है। इसमें पेशाब करने में बहुत दिक्कत होती है और कई बार पेशाब रूक जाता है। पथरी होने की कोई उम्र नहीं होती है, यह किसी भी उम्र में हो सकती है।यहाँ पर हम आपको पथरी के कुछ आसान घरेलू नुस्खे के बारे में जानकारी देते हैं।
*नारियल का पानी पीने से पथरी में फायदा होता है। पथरी होने पर नारियल का प्रतिदिन पानी पीना चाहिए।
*करेला वैसे तो बहुत कड़वा होता है परन्तु पथरी में यह रामबाण की तरह काम करता है। करेले में मैग्नीशियम और फॉस्फोरस नामक तत्व होते हैं, जो पथरी को बनने से रोकते हैं।
*15 दाने बडी इलायची के एक चम्मच, खरबूजे के बीज की गिरी और दो चम्मच मिश्री, एक कप पानी में मिलाकर सुबह-शाम दो बार पीने से पथरी निकल जाती है।
*अंगूर में एल्ब्यूमिन और सोडियम क्लोराइड बहुत ही कम मात्रा में होता हैं, इसलिए किडनी में स्टोन के उपचार के लिए अंगूर को बहुत ही उत्तम माना जाता है। चूँकि इनमें पोटेशियम नमक और पानी भरपूर मात्रा में होते है इसलिए अंगूर प्राकृतिक मूत्रवर्धक के रूप में भी उत्कृष्ट रूप में कार्य करता है।
*पका हुआ जामुन पथरी से निजात दिलाने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। पथरी होने पर पका हुआ जामुन खाना चाहिए।
*किडनी में स्टोन को निकालने में बथुए का साग भी बहुत ही कारगर होता है। इसके लिए आप आधा किलो बथुए के साग को उबाल कर छान लें। अब इस पानी में जरा सी काली मिर्च, जीरा और हल्का सा सेंधा नमक मिलाकर, दिन में चार बार पीने से शीघ्र ही फायदा होता है।
*आंवला का पथरी में बहुत फायदा करता है। आंवला का चूर्ण मूली के साथ खाने से मूत्राशय की पथरी निकल जाती है।
*प्याज में गुर्दे की पथरी के इलाज के लिए औषधीय गुण पाए जाते हैं। इसका प्रयोग से हम किडनी में स्टोन से निजात पा सकते है। लगभग 70 ग्राम प्याज को पीसकर और उसका रस निकाल कर पियें। सुबह, शाम खाली पेट प्याज के रस का नियमित सेवन करने से पथरी छोटे-छोटे टुकडे होकर निकल जाती है।
*जीरे और चीनी को समान मात्रा में पीसकर एक-एक चम्मच ठंडे पानी से रोज तीन बार लेने से लाभ होता है और पथरी निकल जाती है।
सहजन की सब्जी खाने से गुर्दे की पथरी टूटकर बाहर निकल जाती है। आम के पत्ते छांव में सुखाकर बहुत बारीक पीस लें और आठ ग्राम रोज पानी के साथ लीजिए, फायदा होगा।
*पथरी की समस्या से निपटने के लिए केला जरूर खाना चाहिए क्योंकि इसमें विटामिन बी 6 होता है। विटामिन बी 6 ऑक्जेलेट क्रिस्टल को बनने से रोकता और तोड़ता भी है। विटामिन बी-6, विटामिन बी के अन्य विटामिन के साथ सेवन करना किडनी में स्टोन के इलाज में काफी मददगार माना जाता है ।
*मिश्री, सौंफ, सूखा धनिया लेकर 50-50 ग्राम मात्रा में लेकर डेढ लीटर पानी में रात को भिगोकर रख दीजिए। अगली शाम को इनको पानी से छानकर पीस लीजिए और फिर पानी में मिलाकर इसका घोल बना लीजिए, इस घोल को पीजिए।ऐसा नियमित रूप से करें शीघ्र ही पथरी निकल जाएगी।
*चाय, कॉफी व अन्य पेय पदार्थ जिसमें कैफीन पाया जाता है, उन पेय पदार्थों का सेवन बिलकुल मत कीजिए। हो सके कोल्ड्रिंक ज्यादा मात्रा में पीजिए।
*शुद्ध तुलसी का रस लेने से भी पथरी को यूरीन के रास्ते निकलने में मदद मिलती है। कम से कम एक महीना तुलसी के पतों के रस के साथ शहद लेने से बहुत लाभ मिलता है। तुलसी के कुछ ताजे पत्तों को भी रोजाना चबाना चाहिए ।
*जीरे को मिश्री की चासनी अथवा शहद के साथ लेने पर पथरी घुलकर पेशाब के साथ निकल जाती है।
*नींबू का रस और जैतून के तेल का मिश्रण, गुर्दे की पथरी के लिए सबसे प्रभावी प्राकृतिक उपचार में से एक है। पत्थरी का दर्द होने पर 60 मिली लीटर नींबू के रस में उतनी ही मात्रा में आर्गेनिक जैतून का तेल मिला कर सेवन करने से जल्दी ही आराम मिलता है। नींबू का रस और जैतून का तेल पूरे स्वास्थ्य के लिए भी बहुत अच्छा रहता है।
*बेल पत्थर को पर जरा सा पानी मिलाकर घिस लें, इसमें एक साबुत काली मिर्च डालकर सुबह काली मिर्च खाएं। दूसरे दिन काली मिर्च दो कर दें और तीसरे दिन तीन ऐसे सात काली मिर्च तक पहुंचे।आठवें दिन से काली मिर्च की संख्या घटानी शुरू कर दें और फिर एक तक आ जाएं। दो सप्ताह के इस प्रयोग से पथरी समाप्त हो जाती है। याद रखें एक बेल पत्थर दो से तीन दिन तक चलेगा।